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‘धुरंधर’ की सारा अर्जुन ने खोले राज, रणवीर सिंह से लेकर आदित्य धर तक से मिली बड़ी सीख

चाइल्ड आर्टिस्ट से ‘धुरंधर’ की यालिना तक सारा अर्जुन का सफर, बोलीं- ‘मैं सफलता को तय नहीं करना चाहती’
चाइल्ड आर्टिस्ट से ‘धुरंधर’ की यालिना तक सारा अर्जुन का सफर, बोलीं- ‘मैं सफलता को तय नहीं करना चाहती’
चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर ‘देइवा थिरुमगल’, ‘एक थी डायन’ और ‘सैवम’ जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी से पहचान बनाने वाली सारा अर्जुन अब अपने करियर के उस मुकाम पर हैं, जहां बचपन की मासूम कलाकार वाली छवि पीछे छूट चुकी है और एक परिपक्व अभिनेत्री के रूप में उनकी पहचान मजबूत हो रही है। आदित्य धर की ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में नजर आ चुकीं सारा ने अब ग्राजिया इंडिया के जुलाई-अगस्त अंक में अपने सफर, फेम, एक्टिंग और इंडस्ट्री के दिग्गजों से मिली सीख को लेकर खुलकर बात की है।
 
सारा अर्जुन ने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में बहुत छोटी उम्र में कदम रखने के बावजूद उनके माता-पिता ने उन्हें स्टारडम की चमक-दमक से बचाकर रखा। उनका मकसद था कि बेटी का बचपन फिल्मों और शोहरत के बीच कहीं खो न जाए। अपने बचपन को याद करते हुए सारा ने कहा, “मेरे माता-पिता इस बात को लेकर काफी सजग थे कि मैं सुरक्षित रहूं और यह सुनिश्चित करें कि मैं फेम का वह पक्ष न देखूं। वे फिल्मों के विषयों को लेकर काफी सोच-समझकर फैसला लेते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि मैं अपनी गति से काम करूं। मैं साल में एक फिल्म करती थी, जो स्कूल की छुट्टियों के दौरान शूट होती थी। इसलिए मैं सेट पर बड़ी हुई, लेकिन अब पीछे मुड़कर देखती हूं तो मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं फेमस होकर बड़ी हुई या मेरा फेम के साथ कोई खास रिश्ता था।”
 
यही वजह है कि सारा के लिए बचपन में फिल्मों में काम करना किसी स्टार की जिंदगी जीने जैसा नहीं था। वह स्कूल जाती रहीं, सामान्य जिंदगी जीती रहीं और फिल्मों को भी अपनी पढ़ाई और बाकी जिंदगी के बीच संतुलित तरीके से करती रहीं। शायद यही वजह है कि आज भी वह अपनी सफलता को किसी एक तय पैमाने से नहीं देखना चाहतीं।
 

एक्टिंग से दूरी बनाई, लेकिन सपना कभी नहीं छोड़ा

किशोरावस्था में सारा ने कुछ समय के लिए एक्टिंग से दूरी बना ली थी। उस दौर में उन्हें महसूस हुआ कि वह एक इंसान के तौर पर तेजी से बदल रही हैं और खुद को समझने के लिए उन्हें समय चाहिए। लेकिन इस दौरान भी एक चीज उनके भीतर बिल्कुल नहीं बदली, एक्टर बनने का सपना।
 
सारा ने इस बारे में कहा, “मुझे एहसास हुआ कि एक इंसान के तौर पर मैं बहुत बदल रही थी। लेकिन एक चीज जो हमेशा कायम रही, वह यह थी कि मैं एक एक्टर बनना चाहती थी और अपनी पूरी जिंदगी यही करना चाहती थी।”
 
यानी कैमरे से दूरी भले ही कुछ समय की रही हो, लेकिन अभिनय उनके लिए कभी बीती हुई कहानी नहीं बना। ‘धुरंधर’ के साथ उन्होंने जिस तरह वापसी की, उसने उनके करियर को एक नया मोड़ दिया।
 

‘धुरंधर’ के सेट पर सीखना ही नहीं, कई चीजें दोबारा सीखीं

‘धुरंधर’ में काम करने के दौरान सारा को निर्देशक आदित्य धर के साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म की तैयारी को याद करते हुए उन्होंने बताया कि यह उनके लिए सिर्फ एक अभिनय प्रोजेक्ट नहीं था, बल्कि सीखने और खुद को नए तरीके से तैयार करने का अनुभव भी था।
 
सारा ने कहा, “इसमें बहुत कुछ सीखना और फिर कुछ चीजों को भूलकर नए तरीके से सीखना शामिल था। आदित्य [धर] सर ने पूरी प्रक्रिया में मेरा मार्गदर्शन किया और मैंने घर पर भी काफी सीन की तैयारी की।”
 
सारा की बातों से साफ है कि ‘धुरंधर’ उनके लिए सिर्फ एक बड़ी फिल्म का हिस्सा बनना नहीं था, बल्कि अपने अभिनय को एक अलग स्तर पर ले जाने की प्रक्रिया भी थी।
 

बचपन की एक्टिंग वाली मासूमियत आज भी बचाकर रखना चाहती हैं

सारा अर्जुन के करियर की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने कैमरे के सामने काम करना बचपन में शुरू किया था। ऐसे में उनके पास उस उम्र की एक खास सहजता रही, जिसे वह आज भी अपने अभिनय का हिस्सा बनाए रखना चाहती हैं।
 
वह कहती हैं, “बच्चों के तौर पर आप बहुत सहज होते हैं। आपके अंदर कोई जजमेंट नहीं होता, भावनाओं की कोई परत नहीं होती। आप ज्यादा नहीं सोचते। यह बिल्कुल वास्तविक होता है, इसलिए मैं इसे बचाकर रखने की कोशिश करूंगी।”
 
सारा के मुताबिक, जैसे-जैसे कलाकार बड़ा होता है, उसके अभिनय में सोच, तकनीक और अनुभव की कई परतें जुड़ती जाती हैं। लेकिन वह उस शुरुआती सहजता और सच्चाई को खोना नहीं चाहतीं।
 

रणवीर सिंह को करीब से देखकर सारा ने सीखी सबसे बड़ी बात

‘धुरंधर’ में सारा को रणवीर सिंह के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिला। रणवीर के काम करने के तरीके ने उन पर खास प्रभाव छोड़ा। सारा ने उनके जुनून और पूरी टीम के प्रति उनके रवैये की जमकर तारीफ की।
 
उन्होंने कहा, “रणवीर को एक को-एक्टर के तौर पर देखना और उन्हें अपना पूरा योगदान देते हुए देखना मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य था। जिस तरह वह फिल्म को अपना बच्चा मानते हैं और हर किसी के प्रदर्शन और ऊर्जा की परवाह करते हैं, वह उनकी तरफ से बहुत उदारता है।”
 
सारा ने आगे कहा, “एक और चीज जो मैं अपने साथ घर लेकर आई, वह है अपने काम के प्रति उनके अंदर मौजूद सम्मान और जुनून। यह देखना शानदार है कि हर परिस्थिति में उनके अंदर अपने काम को लेकर ऐसा करो या मरो वाला रवैया है।”
 
सारा की बातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि रणवीर के साथ काम करना उनके लिए सिर्फ एक फिल्म का अनुभव नहीं रहा, बल्कि एक बड़े कलाकार को करीब से देखकर अपने काम को समझने का मौका भी बना।
 

सफलता को लेकर सारा की सोच बिल्कुल अलग

आज जब सारा अर्जुन ‘धुरंधर’ जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी का हिस्सा बन चुकी हैं, तब भी वह सफलता को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहतीं। उनके लिए करियर अभी लंबा है और वह खुद को किसी एक मुकाम पर रोककर नहीं देखना चाहतीं।
 
सारा ने कहा, “मैं उस उम्र में हूं जहां मैं बहुत लचीली हूं और मेरे अंदर अभी बहुत विकास बाकी है। सफलता को लेकर मेरा विचार लगातार बदलता रहता है। अगर मैं इसे बहुत ज्यादा स्पष्ट तरीके से परिभाषित कर दूंगी तो मैं अपने विकास को ही सीमित कर दूंगी।”
 
यही सोच शायद सारा को अपनी पीढ़ी की दूसरी अभिनेत्रियों से अलग बनाती है। वह अभी से खुद को किसी एक छवि में बांधने के बजाय अलग-अलग तरह के किरदार और अनुभव तलाशना चाहती हैं।
 
भाषा नहीं, किरदार की भावना देखती हैं सारा
सारा ने अलग-अलग फिल्म इंडस्ट्री में काम करने को लेकर भी अपनी सोच साझा की। उनका मानना है कि एक कलाकार के लिए फिल्म की भाषा से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि किरदार दर्शक को क्या महसूस कराता है।
 
उन्होंने कहा, “एक कलाकार के तौर पर हमारा उद्देश्य यही होना चाहिए कि जब दर्शक हमारी फिल्म देखें तो उन्हें कुछ महसूस हो। इसलिए यह भावनाओं से ज्यादा जुड़ा है और भाषा से कम। जब मैं किसी किरदार को देखती हूं तो मैं उसे इस आधार पर देखती हूं कि वह एक इंसान के तौर पर कौन है, न कि वह कौन सी भाषा बोलता है।”
 
यानी सारा के लिए सिनेमा की असली ताकत भाषा की सीमा से आगे जाकर इंसानी भावनाओं को छूने में है।
 

अब सारा के लिए आगे की राह कितनी बड़ी?

‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी ने सारा अर्जुन को एक बड़े हिंदी सिनेमा दर्शक वर्ग तक पहुंचाया है। ‘धुरंधर’ में यालिना के किरदार के साथ उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और फ्रेंचाइजी के दूसरे हिस्से में भी उनकी भूमिका चर्चा में रही। ‘धुरंधर’ 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई थी, जबकि ‘धुरंधर: द रिवेंज’ 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में आई।
 
ग्राजिया इंडिया के जुलाई-अगस्त अंक में सारा अर्जुन ने अपने इसी बदलते सफर पर विस्तार से बात की है। चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में शुरू हुआ सफर अब उन्हें एक ऐसे दौर में ले आया है, जहां वह अपनी पहचान खुद गढ़ना चाहती हैं। फेम से दूरी बनाकर सामान्य बचपन जीने वाली सारा अब स्टारडम के बीच भी अपनी सबसे बड़ी ताकत, सहजता और अभिनय के प्रति जुनून, ‘धुरंधर’ के बाद सारा अर्जुन ने खोले राज, रणवीर सिंह से लेकर आदित्य धर तक से मिली बड़ी सीख को बचाए रखना चाहती हैं।
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