महिमा मकवाना ने बताया कैसे मिला 'मुसाफिर कैफे', विक्रांत मैसी की जमकर की तारीफ
टेलीविजन के लिए हमेशा शुक्रगुजार रहूंगी जो मुझे दिया है, चाहे नाम हो, शोहरत और जो भी कुछ पहचान हो, जो भी दिया है वह सब टेलीविजन ने ही दिया है। यह मेरी जिंदगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा है जिसे मैं कभी नकार नहीं सकती। मुझे बहुत गर्व होता है इस बात पर कि मैं टेलीविजन से जुड़ी रही और अपने करियर की शुरुआत मैंने टेलिविजन शो से ही की है। लोग आज भी मुझे टेलीविजन की वजह से ही पहचानते हैं।
यह कहना है महिमा मकवाना का जो कि 'मुसाफिर कैफे' में एक दमदार भूमिका निभा रही हैं। उनके साथ जो काम कर रहे हैं राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड से सम्मानित कलाकार विक्रांत मैसी। पत्रकारों से अपने दिल की बात को आगे साझा करते हुए हमें महिमा मकवाना बताती है कि आज भी जब मैं बाहर निकलती हूं तो लोग मुझे रचना के नाम से ही बुलाते हैं। वह मुझसे ऐसे पेश आते हैं। जैसे मैं उनके घर का ही कोई इंसान हूं और फिर कई बार मुझे हंसी आ जाती है और फिर लगता है कि टेलीविजन की जो पहुंच है, वह कभी सोच ही नहीं सकते हैं।
अब जब हम काम कर रहे होते हैं तब आप सब से जुड़े रहते हैं। लेकिन आज भी दस या पंद्रह साल बाद बाहर जब मैं निकलती हूं, तुम लोग मुझे रचना के नाम से बुलाते हैं। तब मेरे दिल से एक आवाज निकलती है कि उस समय मैं सिर्फ 12 साल की थी और अब देखिए मैं 15 साल गुजर चुके हूं और 27 साल की हो चुकी हूं। इतना होने के बाद भी मैं यही कहूंगी कि टीवी जगत का धन्यवाद!
आप इस सिरीज से कैसे जुड़े?
ऑडिशन देना पड़ा था। हुआ यह था कि मैं कहीं किसी गांव में शूट कर रही थी। अपनी एक फिल्म के लिए और उसी रोल में रची बसी थी। ऐसे में मुझे कास्टिंग डायरेक्टर करण का फोन आया। उन्होंने मुझे ज्यादा कुछ बताया नहीं और कहा लव स्टोरी है। तुम आ जाओ और लुक टेस्ट देना है। मैं पहुंच गई और लुक टेस्ट हुआ।
उसके बाद फिर मुझे केमिस्ट्री टेस्ट देना था तो विक्रांत आ गए तब जाकर मालूम पड़ा कि अच्छा मेरे इस प्रोजेक्ट में मेरे साथ विक्रांत भी होने वाले हैं। यह सब पास हो जाने के बाद फिर मेरे सामने स्क्रिप्ट आई और जब स्क्रिप्ट पढ़ी तो ऐसा लगा कि शायद मुझे कुछ ऐसा ही करने की इच्छा थी। हमेशा दिल में सोच कर रखा था कि एक दिन एक ऐसा शो मुझे करना चाहिए और बस सामने आ गया नेटफ्लिक्स का शो था। और इस तरीके से मैं इस प्रोजेक्ट से जुड़ गई।
आप विक्रांत के साथ काम कर रही हैं कैसा रहा एक्सपीरियंस?
विक्रांत के साथ काम करने के लिए मैं हमेशा मुझे अच्छा ही लगेगा। मुझे आज भी याद है कि मुझे एक बार फोन आया था बचपन में और कहा गया कि कुछ दो-तीन दिन का काम है। उस सेट पर चली जाओ यह बालिका वधू का सेट था। मैं वहां पर पहुंची 8 से 10 साल की मुश्किल से रही होंगी। मैंने काम करना शुरू किया और मेरे डायरेक्टर ने बड़े जोर से डांट दिया। कहां से ले आए इस लड़की को निकालो उसको काम करना नहीं आता। मैं बहुत डर गई थी।
मुझे तब भी याद है की एक बहुत दयालु सा कोई शख्स था। जिसने मुझसे बहुत अच्छे से बातचीत की थी उसके बाद आज जब मैं मुसाफिर कैफे में काम करने गई तब मुझे याद आता है कि यह दयालुता शख्स जो रहा है, वह विक्रांत मैसी है। वह इतने अच्छे कलाकार हैं। वह इतने सादगी पूर्ण कलाकार है। इतने दयालु और इतने अच्छे स्वभाव के हैं आपको उनके साथ काम करना अच्छा ही लगता है? ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि यह व्यक्ति इतना बड़ा कलाकार है। हर रोल में इतना फिट रह चुका है। वह आपको महसूस ही नहीं कराएंगे। और वैसे भी एक्टिंग जो है, वह एक्शन रिएक्शन का काम है तो वह इतना अच्छे से एक्ट करते हैं कि आपको उस पर रिऐक्ट करने में मजा आ जाता है।
ऐसे में जब आप उसी दयालु शख्स से अपनी एक वेब सीरीज के सूट के लिए मिलती है तब ऑफ स्क्रीन केमिस्ट्री कैसे रही?
विक्रांत इतने अच्छे इंसान हैं कि उनके साथ ऑफ स्क्रीन भी बात करने में बहुत मजा आता है। सबसे अच्छी बात है कि हम तीनों कलाकारों को अगर आप देखेंगे तो हम तीनों आपस में बहुत ज्यादा कंफर्टेबल है। मजा तो तभी आता है जब आप किसी के साथ फेक ना हो जबरदस्ती आपको अच्छा बनकर तमीजदार बनकर बातचीत की कोशिश ना करनी पड़ेगी। दोस्तों की तरह मिलो और काम करो और यह जो दोस्ती होती है, हमारी ऑनस्क्रीन भी मदद करती है हमारा काम। कई गुना निखर जाता है।
वैसे भी मुझे ऐसा लगता है कि हम जहां काम करते हैं वहां आपको टैलेंटेड लोग तो भरपूर मिल जाएंगे, लेकिन टैलेंटेड होने के बावजूद भी एक अच्छे इंसान के गुण भी उस में मौजूद हो। ऐसे लोग बहुत कम ही मिलेंगे और यह मैं हमारे कलाकारों के लिए नहीं बल्कि पूरी टीम के लिए भी कहना चाहूंगी। मुझे मालूम है कि जिंदगी में कुछ भी हो जाए तब भी यह मेरे से उतने ही अच्छे से पेश आने वाले हैं और यह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
आप जेन-जी से हैं सिचुएशनशिप बेचिंग ये सब शब्द आप जानते होंगे। आप कितना विश्वास करती है प्यार पर?
हर पीढ़ी का अपना प्यार करने का तरीका अलग होता है। इसके फायदे भी होते हैं। कुछ नुकसान भी होते हैं। जहां तक मेरी बात करेंगे तो मैं ओल्ड स्कूल ऑफ रोमांस में विश्वास करती हूं। शादी में विश्वास है। मुझे कमिटमेंट - वादों में विश्वास है। मुझे दोस्ती में विश्वास है। मुझे दोस्ती जो प्यार में बदल जाती है, उस पर भी विश्वास है। जहां तक बात है ऐसे कुछ शब्दों की तो उसके बारे में मैं कुछ कह नहीं सकती क्योंकि कुछ भी कह कर मैं सामने वाले को अपमानित महसूस नहीं करवाना चाहती हूं।
लेकिन यह सब आएंगे और जाएंगे। आखिर में आप वही करते हैं जो आपका दिल कहता है। इस दुनिया में कोई भी ऐसा शख्स नहीं है जिसे प्यार करना पसंद ना हो। आप कहीं भी कितना भी काम करके आ जाए, कुछ भी करके आ जाए। अंत में आपको घर लौटना होता है। अब यह घर आप अपने आप में ढूंढते हैं या किसी शख्स में ढूंढते हैं। यह हरेक की अपनी खुद की मर्जी होनी चाहिए।

