अंतिम में सलमान खान से शर्टलेस फाइट को लेकर क्या तैयारी की, वेबदुनिया को Exclusive Interview में बताया आयुष शर्मा ने

अंतिम फिल्म को लेकर जब मेरी और सलमान की बात हुई थी तब मुझे मालूम था मुझे यह रोल करना है क्योंकि राहुल्या का कैरेक्टर मुझे बहुत अच्छा लगा था। मराठी फिल्म 'मुलशी पैटर्न' और 'अंतिम' में यह अंतर आया कि इसमें पुलिस वाले का रोल बढ़ा दिया गया। मैंने यूं ही सलमान से पूछ लिया कि पुलिस वाले का रोल कौन कर रहा है? वह बोले, मैं कर रहा हूं। मुझे लगा सलमान, इतने बड़े स्टार हैं मेरे साथ कोई फिल्म क्यों करेंगे? मैंने सलमान से फिर पूछा, नहीं भाई! सच में बताइए कौन कर रहा है। उन्होंने कहा, मैं कर रहा हूं। मुझे पुलिस वाले का यह जो नया रोल जो लिखा गया है बहुत पसंद आया है। यह फिल्म तुम मेरे साथ करने वाले हो। मैं खुश हो गया कि दूसरी फिल्म में ही इतने बड़े स्टार के साथ काम करने का मौका मिल गया है। अब तो फिल्म चल ही जाएगी। मैं घर जाकर खुशी-खुशी सो गया। अगले दिन जब उठा तब मैं टेंशन में डूबा हुआ था। मुझे लगा था इतने बड़े स्टार के सामने मुझे खड़े होकर एक्टिंग करना है। कैसे करूंगा यह सब?

यह कहना है आयुष शर्मा का जो अंतिम में एक नेगेटिव शेड वाले किरदार में नजर आए हैं। हाल ही में फिल्म रिलीज हुई है और आयुष की एक्टिंग की सभी सराहना कर रहे हैं।

सलमान से शर्टलेस होकर लड़ना
मुझे बहुत टेंशन था। एक तो वैसे सलमान इतने बड़े स्टार, ऊपर से उनके सामने मुझे लड़ाई करनी थी और वह भी शर्टलेस होकर। मैं दुबला-पतला लड़का हूं। 'लवयात्री' के समय में ही मेरा वजन 60 किलो का था। उसके बाद इस फिल्म के लिए मैंने फिजिकली बहुत मेहनत की। 76 किलो का होने के लिए मैंने खूब खाया। 'अंतिम' बनाने की प्लानिंग तीन साल से चल रही थी। मैं कहीं भी घूमने जाता तो ध्यान रखता कि ऐसी होटल में रूकूं जहां जिम हो और मेरे डाइट के हिसाब से खाना भी मिले। अब मैं के सामने शर्टलेस होकर खड़ा हूं और फाइट कर रहा हूं तो लोगों को भरोसा होना चाहिए कि यह लड़का सलमान खान को मार सकता है।

सलमान के साथ एक्टिंग
मैंने कभी भी यह सोचा भी था कि एक दिन सलमान खान के सामने खड़ा होकर एक्टिंग करूंगा। यह बहुत बड़ी बात है मेरे लिए। कूछ साल पहले की बात है मेरे शहर मंडी में फिल्म 'युवराज' के प्रमोशन के लिए सलमान खान आए थे। उस समय हम सभी लोग उनको देखने के लिए पहुंचे। एक्टर और फैंस के बीच बैरिकेड्स लगाया जाता है। बैरिकेड्स के उस पार वह खड़े थे। सलमान भाई पहले ऐसे हीरो थे जिन्हें मैंने साक्षात देखा था। अब मैं उनके साथ शूट कर रहा था। मैंने अपने आप को यह बात सोच कर मनाया कि क्या कभी सलमान खान ने सोचा था कि मंडी का एक लड़का जो बैरिकेड्स के उस पार खड़ा है वह एक दिन मेरे सामने एक्टिंग करेगा।

राजनीति में रूचि नहीं है
राजनीति मेरे लिए मुमकिन नहीं है। मैं 17 साल का था तभी मुंबई आ गया। हालांकि लोग कई बार पूछते भी हैं कि आपके पिताजी का राजनीति में बड़ा नाम है। आपके दादा जी ने तो टेलीकॉम इंडस्ट्री में तहलका मचा कर रख दिया था। आप क्या करोगे? मुझे तो राजनीति में कोई रूचि है नहीं और मैं लोगों की जाकर सेवा क्या करूंगा जब मुझे उस मामले में कोई समझ ही नहीं है। मैं बहुत कम उम्र में यहां आ गया था। अर्पिता से जब तक शादी भी नहीं हुई थी। ऐसे में अगर सब लोग मुझे कहते हैं कि अंतिम फिल्म में सलमान खान के सामने खड़े होकर काम करने का कोई प्रेशर था तो मैं बोलूंगा कि इससे कहीं गुना ज्यादा प्रेशर मैं अपने शहर मंडी में झेल चुका हूं। क्योंकि हर कोई मुझे सुखराम जी का पोता या फिर शर्मा जी का बेटा इस नाम से पुकारते हैं।

न धर्मेन्द्र की तरह गुड लुकिंग न अमिताभ की तरह लंबे हो
जब मैंने एक्टर बनने का फैसला किया तो मेरे पिता ने पहले सीधे मना कर दिया। फिर बाद में मुझे बहुत समझाया कि देखो ना तो तुम अमिताभ बच्चन की तरह लंबे हो और न धर्मेंद्र की तरह गुड लुकिंग हो और तुम्हारे हाथ में तो वजन है ही नहीं। तुम तो एक्टिंग तो छोड़ दो। जब एक्टर बनने की जिद मैंने नहीं छोड़ी तो मुझे कहा कि 8:30 बजे जो प्राइम टाइम आता है, उसका कोई सीरियल क्यों नहीं कर लेते हो। हमें भी शांति होती रहेगी कि तुम टीवी पर कुछ न कुछ कर रहे हो और तुम्हें भी शांति होगी कि तुम एक्टर हो। मजे की बात यह है कि हमारे घर में हर सीरियल देखा जाता है, हर सीरियल का ट्रैक भी रखा जाता है कि कौन सा शुरू है। कौन सा खत्म होने वाला है। मेरे घर की किसी पार्टी में कोई टेलीविजन स्टार आ जाए तो मेरे पापा बहुत खुश हो जाते हैं। एक बार शब्बीर अहलूवालिया और कांची कौल को मेरे पापा ने घर की पार्टी में देख लिया। उन्होंने मुझसे एक ही सवाल पूछा शब्बीर अहलूवालिया और कांची तुम्हारे दोस्त हैं? अब मैं मेरे पापा को क्या जवाब देता?

ने कहा आयुष को क्यूरियस चाइल्ड
मैं चिंता में रहता था। थोड़ा परेशान रहता था। उसी फेज की वजह से उन्होंने मुझे ऐसा कहा होगा। मेरी पहली और दूसरी फिल्म में तीन साल का अंतर है। कोरोना भी आ गया, लॉक डाउन भी लग गया। लोगों के सामने आते आते इतना समय लग गया। मुझे टेंशन यह हो रहा था कि कहीं लोग यह ना सोचने लगे कि मैं अपने आपको रीलॉन्च कर रहा हूं। जबकि यह तो मेरी दूसरी फिल्म है। दो फिल्मों के बीच में इतना अंतर क्यों हुआ है। यह सभी लोग जानते थे। लेकिन सोशल मीडिया खोलकर देखिए। आपको समझ में आ जाता है कि लोग क्या बोलना चाह रहे हैं और किस तरीके का नैरेक्टिव सेट करना चाह रहे हैं। मुझे उस चीज का बहुत डर था। मैं उस टेंशन से गुजरता था और उसी दौरान में कई सवाल महेश मांजरेकर से पूछता था। शायद इसी वजह से यह नाम मिल गया।



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