'सुनती हो' कहां हो -चम्पा वैद Written By: WD google-news FILE दिन में कुछ समय ऐसा आता हैजहाँ अकेलापन खाने की कोशिश करता हैमैं टकटकी लगाए देखती हूंठंडी आहें भरती हूं खून की धड़कन बढ़ जाती हैसाथी का साथकुछ कहता सुनता अच्छा लगता है'सुनती हो' कहां हो। हमारे साथ WhatsApp पर जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें हमारे साथ Telegram पर जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें