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'सुनती हो' कहां हो

-चम्पा वैद

हिन्दी लिट्रेचर
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दिन में कुछ समय ऐसा आता है
जहाँ अकेलापन खाने की कोशिश करता है
मैं टकटकी लगाए देखती हूं
ठंडी आहें भरती हूं
खून की धड़कन बढ़ जाती है
साथी का साथ
कुछ कहता सुनता अच्छा लगता है
'सुनती हो' कहां हो।