दिमाग की सेहत का रिश्ता दोस्तों से!

लंदन| BBC Hindi| पुनः संशोधित मंगलवार, 22 अप्रैल 2008 (16:41 IST)
ब्रिटेन में एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कुछ नस्लीय समुदायों से संबंधित कुछ ऐसी किशोरियों का मानसिक स्वास्थ्य संस्कृति का घालमेल करने वालों से ज्यादा बेहतर होता है जो अपनी पारिवारिक संस्कृति से जुडी होती हैं।
लंदन के क्वीन मैरी विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने पाया कि पश्चिमी पोशाक पहनने वाली लड़कियों के मुकाबले अपनी पारंपरिक पोशाक पहनने वाली बांग्लादेशी लड़कियों में व्यवहार संबंधित समस्याएँ कम होती हैं।

'एपिडर्मियोलॉजी एंड कम्युनिटी हैल्थ' की पत्रिका में छपी रिपोर्ट में शोधार्थियों की टीम ने कहा है कि संभवतः आपस में गहरे जुड़े परिवार और समुदाय ऐसी परंपराओं को सुरक्षित रखने में मददगार साबित होते हों।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए किशोरावस्था खासतौर पर संवेदनशील होती है। शोधार्थियों का कहना है कि अपनी पहचान, दोस्तों के साथ बँधे रहना और वेशभूषा इसमें भूमिका निभाते हैं।

आश्चर्यजनक परिणाम : इस अध्ययन के लेखकों में एक प्रोफेसर केम भुई ने कहा कि इसके परिणाम 'आश्चर्यजनक' थे। पारंपरिक कपड़े कसी हुई पारिवारिक इकाई को दर्शाते हैं जो उन दबावों के मुकाबले कुछ सुरक्षा देती है जो आजकल के युवा झेलते हैं।
उनके अनुसार यह अध्ययन संकेत देता है कि हमें उन लोगों को समझाने की कोशिश करनी चाहिए जो अपनी परंपराओं से दूर जा रहे हैं और पश्चिमी समाजों में घुल-मिल रहे हैं। क्योंकि वे मानसिक समस्याओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

सिर्फ लड़कियों में : शोधार्थियों ने 11 से 14 साल की उम्र के एक हजार गोरे ब्रिटिश और बांग्लादेशी किशोरों से उनकी संस्कृति, सामाजिक जीवन और स्वास्थ्य के बारे में बात की। इनमें ऐसे सवाल भी शामिल थे जो उनकी भावनात्मक और मानसिक समस्याओं को उजागर कर सकें।
इनमें पारंपरिक और दूसरी संस्कृति के मिले-जुले कपड़े पहनने वाले किशोरों के मुकाबले पारंपरिक कपड़े पहनने वाले बांग्लादेशी किशोरों में स्पष्ट रूप से कम मानसिक समस्या होने के संकेत मिले।

जब इन परिणामों को लिंग के अनुसार विभाजित किया गया तो प्रतीत हुआ कि इसका प्रभाव सिर्फ लड़कियों में ही है। ऐसा प्रभाव गोरे ब्रिटिश किशोरों में भी नहीं पाया गया जिन्होंने अपने और दूसरी संस्कृतियों के मिश्रित कपड़े पहने हुए थे।

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