Ghalib Mirza ghalib Gazal | रहिये अब ऐसी जगह चलकर
ग़ालिब की ग़ज़ल
WD
WDहम सुख़न कोई न हो और हम ज़ुबाँ कोई न हो
बेदर-ओ-दीवार सा इक घर बनाना चाहिए
कोई हमसाया न हो और पासबाँ कोई न हो
पड़िए गर बीमार, तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाइए, तो नौहाख़्वाँ कोई न हो

