बिशन सिंह बेदी : प्रोफाइल

बिशन सिंह बेदी पूर्व भारतीय हैं। वह खासतौर पर धीमे बाएं-हाथ के गेंदबाज थे। उन्होंने 1966 से 1979 तक टेस्ट क्रिकेट खेला। वह भारत के पूर्व प्रसिद्ध स्पिन चौकड़ी का हिस्सा थे। उन्होंने कुल 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट लिए। वह 22 टेस्ट मैचों में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। बेदी एक रंगीन पटका पहनते थे। उन्होंने खुलेतौर पर अपने विचार क्रिकेट से जुड़े मुद्दों पर व्यक्त किए। 
क्रिकेट करियर 
 
घरेलू क्रिकेट में, बेदी 15 साल की उम्र से उत्तर पंजाब के लिए खेलते थे। वह 1968-69 और 1974-75 के रंजी ट्रॉफी सीजन के लिए दिल्ली चले गए। जहां उन्होंने रिकॉर्ड 64 विकेट झटके। बेदी बहुत समय तक इंग्लिश काउंटी क्रिकेट की नॉर्थम्पटोनशायर के लिए भी खेले। उन्होंने 1560 विकेट के साथ अपना फर्स्टक्लास करियर खत्म किया। यह आंकड़ा किसी भी अन्य भारतीय खिलाड़ी से अधिक है। 
 
उनकी बॉलिंग को प्रभावी, यहां तक की खूबसूरत, चतुराईभरी और कलात्मक कहा गया। वह गेंद को फ्लाइट कराने और स्पिन की लगभग सभी खूबियों में सिद्धहस्त रहे। उनकी बॉलिंग एक्शन इतनी आरामभरी और संतुलित थी कि वह पूरे दिन रिदम और कंट्रोल के साथ गेंदबाजी कर सकते थे। उनके नाम के साथ बहुत सी काफी सफल टेस्ट सीरिज दर्ज हैं। बिशन सिंह बेदी ने  कहा है कि वह उन्होंने हमेशा अपने कपड़े धोए हैं। उनके हिसाब से यह कंधों के लिए सबसे बढ़िया एक्ससाइज है। 
 
सबसे उम्दा प्रदर्शन 
 
उनका सबसे बढ़िया बॉलिंग का प्रदर्शन 1969-70 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कलकत्ता में था। जहां उन्होंने 98 गेंद में 7 विकेट लिए थे। उनका सबसे बेहतरीन मैच फीगर 1978-79 में पर्थ में था जहां 194 रनों पर उन्होंने 10 विकेट लिए। यह भी ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध था। 
 
उनकी बल्लेबाजी काफी कमजोर थी परंतु नॉर्थम्पटनशायर और हैम्प्शायर के बीच एक मैच में बाउंड्री जमाकर उन्होंने मैच जिताया था। उनका बल्लेबाजी का अधिकतम स्कोर 50 रन नॉट आउट है। टेस्ट में उनकी अकेला अर्धशतक 1976 में कानपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ था।  
 
कप्तानी 
 
बेदी को 1976 में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया। वह मंसूर अली खान पटौदी के बाद कप्तान बने थे। उनकी कप्तानी में पहली बार टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के विरूद्ध 1976 में पोर्ट-ऑफ-स्पेन में जीता गया था। इसके बाद, भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भी टेस्ट सीरिज 2-0 से जीती।  भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत में ही, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और पाकिस्तान के खिलाफ सीरिज हार गया। इन हार के बाद, कप्तानी बिशनसिंह बेदी से छीनकर, सुनील गावस्कर को दे दी गई। 
 
रिकॉर्ड 
 
लांस गिब्स के बाद, बेदी ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके नाम हर टेस्ट मैच के हिसाब से सबसे अधिक मैडेन ओवर खेलने का रिकॉर्ड है। उन्होंने 4.2 मैडेन ओवर हर विकेट डाला है। विस्डन क्रिकेटर्स अल्मानेक ने 2008 में, बिशन सिंह बेदी को सबसे अच्छे पांच क्रिकेटरों में शामिल किया जो कभी भी विस्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर नहीं चुने गए। 
 
विवाद 
 
कप्तान के तौर पर, बेदी कुछ विवादों का भी हिस्सा रहे। 1976 में, वेस्टइंडीजे के खिलाफ एक मैच में, वेस्टइंडीज के खिलाफ रन चेस करते समय वेस्टइंडीज ने चार घातक तेज गेंदबाजों से गेंदबाजी कराई। बेदी ने इस पर आपत्ति जताई और दो खिलाड़ियों के चोट लगने के बाद रिटायर हो जाने पर बेदी ने पारी जल्दी घोषित कर दी। 
 
1976-77 में इंग्लैंड के भारत के दौर पर, बेदी ने जॉन लेवर पर वैसलीन लगाकर बॉल को पॉलिश करने का आरोप लगाया। लेवर अपने माथे पर पसीने को आंखों में जाने से रोकने के लिए वैसलीन लगाते थे। लेवर पर बाद में इन आरोपों से गलत करार दिया गया। 
 
1978 में, बेदी ऐसे पहले कप्तान बने जिसने मैच पूरा हुए बिना ही हार मान ली। पाकिस्तान के विरूध एक दिवसीय मैच में 8 विकेट बचे होने पर, भारत को 14 गेंदों में 23 रन बनाने थे। बेदी ने क्रीज पर से बल्लेबाज बुला लिए क्योंकि वह बॉलर सरफराज नवाज की 4 बाउंसरों का विरोध कर रहे थे। इन बाउंसरों में से एक को भी वाइड करार नहीं दिए जाने पर बेदी नाराज थे। 



और भी पढ़ें :