शेयर बाजार 2010 : घोटालों का झटका

भाषा| पुनः संशोधित शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010 (19:03 IST)
छोटी और मझोली वाली कंपनियों के शेयरों पर लाभ कई बार लोगों को चौंका देते हैं पर साल 2010 ऐसा इन कंपनियों के लिए कुछ निराशाजनक साबित हुआ। मझोले आकार की कंपनियों के शेयर कुछ कंपनियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के लिए बाजार से छेड़छाड़ की खबर से प्रभावित रहे।

31 दिसंबर 2009 से लेकर 16 दिसंबर 2010 के बीच किए गए विश्लेषण से यह पता चलता है कि मझोले आकार की कंपनियों और छोटी कंपनियों के शेयरों का सूचकांक क्रमश: 12.65 और 9.88 फीसदी चढ़ा। वहीं आलोच्य अवधि में बंबई शेयर बाजार के में 13.74 फीसदी की तेजी दर्ज की गयी।
नवंबर महीने तक मझोले आकार और छोटी कंपनियों के शेयरों में मजबूत वृद्धि देखी गयी। 11 नवंबर को दोनों शेयर उच्च स्तर पर रहे, लेकिन क्षेत्र में घोटाले की खबर से साल के अंत तक स्थिति बदल गई। 11 नवंबर से लेकर 16 दिसंबर के बीच मझोले और छोटी कंपनियों का शेयरों में क्रमश: 12.32 फीसदी और 19.20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इन शेयरों को पूरे साल जो लाभ हुआ, इस नुकसान से लाभ पर असर पड़ा।
जियोजीत बीएनपी परिबास के रिसर्च प्रमुख एलेक्स मैथ्यूज ने कहा कि नवंबर तक छोटी कंपनियों और मझोली कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया। लेकिन कुछ घोटालों तथा शेयरों में धोखाधड़ी की खबर से निवेशकों ने नुकसान से बचने के लिए मुनाफावसूली की।

मूल्य के हिसाब से छोटी कंपनियों का बाजार पूँजीकरण आलोच्य अवधि में 29302.73 करोड़ रुपए बढ़कर 3.26 लाख करोड़ रुपए रहा जो 31 दिसंबर 2009 को 2.96 लाख करोड़ रुपए था।
इसी प्रकार, मझोली कंपनियों का बाजार पूँजीकरण 1.19 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 16 दिसंबर 2010 तक 10.57 लाख करोड़ रुपए रहा जो पिछले साल 31 दिसंबर को 9.39 लाख करोड़ रुपए था। वहीं सेंसेक्स में शामिल कंपनियों का बाजार पूँजीकरण 3.64 लाख करोड़ बढ़कर 30.11 लाख करोड़ रहा। पिछले वर्ष 31 दिसंबर को यह 26.47 लाख करोड़ था।

विशेषज्ञों का मानना है कि मझोले और छोटे शेयर टच्छा रिटर्न दे रहे थे लेकिन कुछ कंपनियों के शेयरों के मूल्य में धोखाधड़ी की खबर से पूरे क्षेत्र पर असर पड़ा।
यूनिकोन फिनांशल सर्विसेज के सीईओ गजेंद्र नागपाल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कई छोटी और मझोली कंपनियों का शेयर मूल्य गिरा है। इसका कारण नियामकों द्वारा कथित आईबी रिपोर्ट के आधार पर शेयर बाजार परिचालन पर कार्रवाई किए जाने की आशंका है। इसका पूरे क्षेत्र पर असर पड़ा है।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, ऋण के बदले रिश्वत, शेयर मूल्य में धोखाधड़ी जैसे घोटालों के सामने आने से भी बाजार धारणा पर विपरीत असर पड़ा है। कीमत धोखाधड़ी की खबर से रुचि सोया, केएस ऑयल्स, आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर, करूतुरी ग्लोबल जैसी छोटी कंपनियाँ काफी प्रभावित हुई।
इसके अलावा 2जी लाइसेंस मामले में तथ्यों को छिपाने को लेकर कैग रिपोर्ट में वीडियोकान और यूनिटेक के नाम आने से इन कंपनियों के शेयर भाव में गिरावट देखी गई।

पिछले साल जहाँ छोटी कंपनियों के शेयरों ने 115 फीसदी का रिटर्न दिया था वहीं मझोले कंपनियों का शेयरों ने 100 फीसदी का रिटर्न दिया था। वहीं 30 शेयरों वाले बंबई शेयर बाजार के सेंसेक्स में 75.3 फीसदी का लाभ दर्ज किया गया था। बहरहाल, ऐसी उम्मीद है कि नया साल छोटे एवं मझोले कंपनियों के शेयरों के लिए बेहतर वर्ष साबित होंगे और फिर से निवेशकों का ध्यान आकर्षित करेंगे। (भाषा)




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