समझनी होगी भारत मां की वेदना

- नजमू नवी खान 'नाज'
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पृथ्वी के धरातल पर तमाम देश हैं, मगर भारत देश को ही हम 'माता' के नाम से पुकारते हैं। माता जो केवल अपने बच्चों के भले के बारे में ही सोचती है, जिसका जीवन अपने बच्चे के इर्द-गिर्द ही सीमित रहता है, जो अपने बच्चों पर सर्वस्व न्योछावर करने के लिए सदैव तत्पर रहती है।

भारत मां जिसने हमें सब कुछ दिया है आज वह दर्द से कराह रही है। उसके बच्चे उसको धर्म, भाषा, क्षेत्रीयता के नाम पर बांटने में लगे हैं। भारत एक ऐसा देश है जिसको ईश्वर का वरदान प्राप्त है। यहां पर सारी ऋतुएं (गर्मी, सर्दी, वर्षा, वसंत), विविध फसलें (रबी, खरीफ, जायद), धरातलीय विभिन्नताएं (मैदानी, पहाड़ी, समुद्र, नदियां, मरुस्थल) पाई जाती हैं।

कहने का आशय यह है कि ईश्वर ने हमारे वतन को सारी नेमतों से नवाजा है। मां (भारत माता) जिसने कभी भी अपने बच्चों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव अपने सारे संसाधनों के वितरण में नहीं किया, सभी को एक समान और खुले दिल से प्यार दिया, आज उसके बेटों ने ही उसका दिल छलनी कर दिया है। वे आपस में रक्तपात कर रहे हैं। मां की बेटियां अपने ही घर में सुरक्षित नहीं हैं।




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