1. धर्म-संसार
  2. धर्म-दर्शन
  3. पौराणिक कथाएं
  4. why are smoking and tobacco consumption equated with eating a cow
Written By WD Feature Desk
Last Modified: शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025 (12:52 IST)

सिगरेट के साथ ही तंबाकू खाना गाय को खाने के समान क्यों, जानिए कथा कहानी

तंबाखू
Tambaku and gay cow: तंबाकू खाना कब से प्रचलन में आया यह एक अलग विषय है परंतु भारत में सिगरेट पीना और तंबाखू खाना आप प्रचलन में है। अक्टूबर 2025 की विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट और NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 21.4% लोग खैनी, गुटखा, पान मसाला या जर्दा का सेवन करते हैं और करीब 10.7% लोग सिगरेट या बीड़ी पीते हैं। तंबाकू का पौधा होता है जो कई तरह की प्रजातियों का रहता है। इसी से तंबाकू बनती है। तंबाकू मुख्य रूप से 'निकोटियाना' (Nicotiana) प्रजाति के पौधों की पत्तियों से बनती है।
 
कार्तिक माह के महत्म्य में यह वर्णन मिलता है कि तंबाखू की उत्पत्ति सुरभी गाय के रक्त से हुई है। कथा के अनुसार जब सत्यभामा ने श्रीकृष्‍ण से पारिजात का वृक्ष स्वर्ग से लाने की जिद की तो भगवान श्रीकृष्‍ण ने इंद्र से इस वृक्ष को देने की मांग की, लेकिन इंद्र से इसे देने से इनकार कर दिया। इसके परिणाम स्वरूप श्रीकृष्‍ण का देवताओं से युद्ध हुआ। देवता हारने लगे तब देवताओं ने एक चाल चली। उन्होंने देव गऊ सुरभी से प्रार्थना की। इस प्रार्थना के चलते गऊ माता सुरभी युद्ध के बीच जाकर खड़ी हो गई। यह देखकर श्रीकृष्‍ण ने युद्ध रोक दिया, अपने धनुष की प्रत्यंचा को उदार दिया और सभी अस्त्र शस्त्र भूमि पर रखकर माता सुरभी के सामने नतमस्तक होकर खड़े हो गए।
 
इसी छल का लाभ लेकर के इंद्रदेव ने भगवान श्रीकृष्‍ण को बंदी बनाने के लिए जाल बिछाया। लेकिन भगावन श्री गरूढ़ यह सब समझ गए और थोड़ा रोष में बोले माता सुरभी से बोले की, माता तेरे लिए तो ठाकुरजी ने जन्म लिया। गय्या चराते हैं और गोवर्धन उठाते हैं और तेरी हर तरह से सेवा करते हैं लेकिन तूने तो इंद्र के छल में सहयोग किया और इंद्र का पक्ष लेकर आ गई। यह बोलते हुए गरूढ़ ने अपने पंख फड़फड़ा जिसके चलते माता सुरभी को थोड़ी बहुत खरोच आए गई और उस खरोच से रक्त बहकर भूमि पर गिर गया। इस रक्त बिंदू से तंबाकू उत्पन्न हुई। इसलिए गोमांस खाने के समान पाप लगता है तंबाकू खाने से। इसलिए सिख समाज के लोग न तो सिगरेट पीते हैं, तंबाखू खाते हैं और न इसकी खेती करते हैं। गुरु गोविंद सिंह जीन ने प्रतिज्ञा ली थी कि... गऊ घात को सब जग से मिटाऊं। सभी जन को गऊ प्रिय बनाऊं।
ये भी पढ़ें
शुक्र का बृहस्पति की धनु राशि में गोचर: 5 राशियों पर होगा बहुत ही शुभ असर