राजस्थान में पर्यटन के साथ बढ़ रही हैं सेक्स गतिविधियां

Last Updated: शनिवार, 8 नवंबर 2014 (10:46 IST)
जयपुर। महिला आयोग ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में के साथ साथ सेक्स गतिविधियां भी बढ़ रही है और जैसलमेर एवं पुष्कर में विदेशी सैलानियों को लड़कियां परोसी जाती हैं। बड़े-बड़े होटलों ने भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इस तरह की गतिविधियों को अपने होटलों में भी बढ़ावा दिया है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष लाड कुमारी जैन ने कहा कि अनेक ऐसे समुदाय हैं, जो बालिकाओं और महिलाओं को जबरदस्ती इस काम में धकेलते हैं। सालों से इन समुदायों ने इसे अपनी आमदनी का जरिया बना रखा है।
 
उन्होंने कहा कि प्रदेश में टेक्सटाइल, मार्बल व्यवसाय, अवैध खनन तथा बढते औद्योगिकीकरण के साथ वेश्यावृति पनप रही है। जैसलमेर, बाडमेर, जोधपुर, करौली, धौलपुर, भरतपुर, अलवर में वेश्यावृति की स्थिति जगजाहिर है।
 
जैन ने कहा कि आयोग की टीम के इस वर्ष जुलाई से अक्टूबर के बीच निर्धारित जिलों के रेड लाइट क्षेत्र में किए गये दौरे में यह स्थिति सामने आई है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
 
आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि रेड लाइट क्षेत्र में इन परिवारों से राज्य महिला आयोग की टीम भी रूबरू हुई। बातचीत के आधार पर स्वयं मां-बाप ने बताया कि 3-4 महीने का एडवांस पैसा हमें दे दिया जाता है। बच्चियां मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, जबलपुर, गुडगांव के अलावा खाड़ी देशों में भेजी जा रही हैं।
 
जैन ने उच्चतम न्यायालय की समिति के वेश्यावृत्ति को वैध बनाने से संबंधित प्रस्ताव पर राष्ट्रीय रायशुमारी से पहले सभी राज्यों के महिला आयोग अध्यक्ष, सदस्यों तथा इस मुद्दे से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं सिविल सोसाइटी संगठन को बुलाकर खुली चर्चा करवाए जाने की मांग की है। 
 
उन्होंने कहा कि यह बहुत ही गंभीर, संवेदनशील तथा महिलाओं के संवैधानिक एवं मानवाधिकार से जुड़ा मामला है क्योंकि सदियों पुरानी अनैतिक परम्परा को कानूनी करार देना चाहते हैं। इससे महिलाओं का उत्पीड़न विशेषकर यौन-उत्पीड़न बढ़ेगा।
 
राजस्थान राज्य महिला आयोग ने रेड लाइट क्षेत्र के दौरे के दौरान सामने आए मामलों एवं प्राप्त जानकारियों के आधार पर पाया कि इन क्षेत्रों में पीने का पानी, बिजली, सड़क, सफाई, स्वास्थ्य सेवाएं एवं सुविधाएं, प्राथमिक शिक्षण संस्थाएं, आंगनबाड़ी केन्द्र, राशनकार्ड, जमीन के पट्टे आदि न के बराबर हैं। 
 
जैन ने कहा कि इन क्षेत्रों की महिलाओं का कहना है कि हमारे साथ भेदभाव होता है। हम लोग इस धन्धे से निकलना भी चाहते हैं लेकिन हमारे हाथ की चीजें कोई लेना नहीं चाहता है।
 
आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि वेश्यावृति को वैध ठहराये जाने के खतरे एवं नुकसान ज्यादा होंगे, जो देश को नैतिक पतन की ओर ले जायेंगे। वैध ठहराया जाना विशाल जनसमुदाय के हित में नहीं होकर चन्द लोगों के हित में जरूर हो सकता है, जिन्होंने इसे करोड़ों का व्यवसाय बना लिया।
 
उन्होंने कहा कि वैध बनाये जाने से आये दिन नाबालिग लड़कियों के अपहरण, बलात्कार, शादी के नाम पर खरीद-फरोख्त, यौन-शोषण आदि को खुली छूट मिल जाएगी। (भाषा)



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