कश्मीरी पंडितों ने खीर भवानी की पूजा कर घर वापसी की कामना की

सुरेश एस डुग्गर| पुनः संशोधित शनिवार, 19 जून 2021 (00:25 IST)
जम्मू। अंततः ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर प्रशासन ने कश्मीरी पंडितों को माता खीर भवानी की पूजा-अर्चना करने की अनुमति देने का खतरा मोल ले ही लिया। खीर, दूध, फूल चढ़ाकर कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की कामना की। हर साल ज्येष्ठ अष्टमी के दिन माता के मंदिर पहुंचते हैं और माता की आराधना करते हैं। समुदाय के लोगों का मानना है कि इसी दिन माता का जन्म हुआ था और इस दिन को हर कश्मीरी पंडित पूरे श्रद्धा से मनाता है।
कोरोनावायरस (Coronavirus) कोविड-19 प्रोटोकाल के बीच के जिला गांदरबल के में स्थित मां खीर भवानी के दर्शनों को सैकड़ों कश्मीरी पंडित पहुंचे। एक कश्मीरी पंडित परिवार ने बताया कि उन सभी ने कोरोना एसओपी का पालन करते हुए माता खीर भवानी उत्सव मनाया।

यहां देशभर से पहुंचे पंडितों ने मां भवानी से प्रार्थना की है कि वह पूरी दुनिया से इस महामारी का सफाया कर दें। इस वर्ष भी कोविड-19 के कारण गांदरबल स्थित में आने वाले भक्तों की संख्या में गिरावट नजर आई, लेकिन यहां जो सांप्रदायिक सद्भाव देखने को मिला है, वह अद्वितीय है। मां भवानी के दरबार में घाटी में रहने व देश के दूसरे राज्यों में रहने वाले काफी कश्मीरी पंडित पहुंचे हैं।

चूंकि कोरोना काल है, इसलिए अधिकांश पंडितों ने अपने अपने घरों मे ही रहकर माता की आराधना की या फिर नजदीक के मंदिर पहुंचकर माता की पूजा की। कश्मीरी पंडित महिलाओं ने दूध, खीर, फल-फूल से थाल सजाए और उनको कुंड में प्रवाहित कर कश्मीरी पंडितों की सुख-शांति के लिए कामना की। वहीं कश्मीरी पंडितों ने माता खीर भवानी से दुआ मांगी कि शीघ्र उनकी कश्मीर वापसी हो। यह लोग अपनी मिट्टी व अपनी संस्कृति से फिर जुड़ सकें।

ऑल इंडिया यूथ कश्मीरी समाज के कार्यकर्ता संजय रैना ने कहा कि इस बार अधिकांश कश्मीरी घाटी के तुलमुला में स्थित माता खीर भवानी के दर्शनों के लिए नहीं जा पाए हैं। पिछले दो साल से सरकारी यात्रा नहीं हो पा रही है। लिहाजा अधिकांश कश्मीरी पंडित घरों में या आसपास के मंदिरों में पहुंचकर माता की आराधना कर रहे हैं, लेकिन हर कश्मीरी पंडित के दिल में यह बात आज भी है कि वे अपने घर घाटी वापस जाना चाहते हैं। ऐसा होने पर कश्मीरी पंडित तुलमुला में मां के दरबार में पहुंचकर आसानी से हाजिरी दे पाएंगे।
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शादी लाल पंडित ने बताया कि जगटी में कश्मीरी पंडित यहां पर बने मंदिर परिसर में पहुंचे और हवन-यज्ञ किया व खुशहाली के लिए माता से प्रार्थना की। वहीं वीरेंद्र रैना ने जानीपुरा में माता खीर भवानी मंदिर के दर्शन कर हर कश्मीरी पंडित की खुशहाली मांगी।
जानकारी के लिए खीर भवानी मंदिर श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर तुलमुला गांव में स्थित है। ये मंदिर मां खीर भवानी को समर्पित है। यह मंदिर कश्मीर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। मां दुर्गा को समर्पित इस मंदिर का निर्माण एक बहती हुई धारा पर किया गया है। इस मंदिर के चारों ओर चिनार के पेड़ और नदियों की धाराएं हैं, जो इस जगह की सुंदरता में चार चांद लगाते हुए नज़र आते हैं। ये मंदिर कश्मीर के हिन्दू समुदाय की आस्था को बखूबी दर्शाता है।



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