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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की 12 अनूठी परंपराएं जो इस पर्व को बनाती हैं खास

Updated: मंगलवार, 1 सितम्बर 2026 (16:23 IST)
Shri Krishna Janmashtami Traditions: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे विश्व में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। सनातन धर्म में इस दिन को एक महान उत्सव के रूप में देखा जाता है। जन्माष्टमी के इस पावन पर्व पर 12 मुख्य परंपराओं और रीति-रिवाजों को निभाने का विशेष प्रचलन है, जो इस उत्सव को बेहद रोचक और भावपूर्ण बनाते हैं:
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1. व्रत एवं उपवास

जन्माष्टमी पर श्रद्धालु दिनभर फलाहारी या निर्जला व्रत रखते हैं। मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और विशेष पूजन-आरती के पश्चात ही यह व्रत खोला जाता है।
 

2. मंदिरों का अलौकिक श्रृंगार

इस पावन अवसर पर सभी श्रीकृष्ण मंदिरों को भव्य रोशनी, झूमरों और प्राकृतिक पुष्पों से सजाया जाता है। भगवान की प्रतिमाओं का नयनाभिराम श्रृंगार कर दर्शनार्थियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं।
 

3. मनमोहक झांकियां

घरों और मंदिरों में कान्हा के जीवन से जुड़ी घटनाओं पर आधारित सुंदर झांकियां सजाई जाती हैं। इनमें कारागार में जन्म, गोकुल गमन, माखन चोरी, माता यशोदा द्वारा ब्रह्मांड दर्शन और गोशाला जैसे दृश्यों को सजीव रूप में दर्शाया जाता है।
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4. झूला झुलाने की परंपरा

जन्मोत्सव के दौरान बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) का सुंदर श्रृंगार करके उन्हें सुसज्जित झूले में विराजमान कराया जाता है। इसके बाद सभी भक्त श्रद्धापूर्वक कान्हा को झूला झुलाते हैं।
 

5. प्रतीक वृक्ष स्थापना

झांकियों में नलकुबेर और मणिग्रीव के प्रतीक स्वरूप दो सुंदर वृक्ष स्थापित किए जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रापवश वृक्ष बने इन दोनों देवपुत्रों का उद्धार बालक कृष्ण ने उन्हें ओखल से बांधने की लीला के दौरान किया था।
 

6. रासलीला व नाटकीय मंचन

विभिन्न स्थानों पर श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं और रासलीला का भव्य आयोजन किया जाता है। छोटे-छोटे बच्चे राधा, कृष्ण और यशोदा के रूप में सजकर माखन चोरी और रासलीला के मनमोहक दृश्यों का मंचन करते हैं।
 

7. दही हांडी प्रतियोगिता

भगवान कृष्ण की माखन चोरी की लीला पर आधारित यह उत्सव विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इसमें युवाओं की टोली (गोविंदा) मानव पिरामिड बनाकर ऊंचाई पर लटकी माखन से भरी मटकी को फोड़ती है।
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8. मध्यरात्रि विशेष पूजन

रात 12 बजे कान्हा के जन्म के समय लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके पश्चात नए वस्त्र, आभूषण, धूप-दीप, चंदन और पुष्प अर्पित कर मंत्रोच्चार, आरती और कीर्तन के साथ उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है।
 

9. 56 भोग एवं महाप्रसाद

जन्माष्टमी पर कान्हा को प्रिय माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और पंचामृत का मुख्य भोग लगाया जाता है। इसके अलावा फल, मेवे, मिठाइयों सहित 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरित किया जाता है।
 

10. खीरा कटाई (गर्भनाल छेदन का प्रतीक)

अनेक क्षेत्रों में जन्माष्टमी पूजन के दौरान डंठल व पत्तियों वाले खीरे को काटना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह परंपरा नवजात शिशु की गर्भनाल काटने और कान्हा के सुरक्षित जन्म का प्रतीक है।
 

11. बधाई व शुभकामना संदेश

जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर लोग एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाइयां देते हैं, मंगल गीत गाते हैं और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।
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12. कृष्ण कथा व भागवत श्रवण

इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जीवन, उनकी लीलाओं और श्रीमद्भागवत गीता के उपदेशों का श्रवण व अध्ययन करते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मकता और भक्ति भाव का संचार होता है।

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