कैसे हुई ओशो की मौत, जहर से या...

Last Updated: गुरुवार, 19 जनवरी 2017 (16:48 IST)
कैसे हुई ओशो की मृत्यु? यह सवाल आज भी महत्वपूर्ण है। ओशो रजनीश को अमेरिका की सरकार ने जहर दिया था या कि उनके ही संन्यासियों ने विरासत के लिये या किसी अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत मार दिया था? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है, लेकिन हम आपको बताएंगे जलता हुआ सच...
ओशो जैसी चेतना का जन्म सैकड़ों वर्षों के बाद होता है। बुद्ध के बाद ओशो ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने चेतना के गौरीशंकर को छू लिया है। पूरे ढाई हजार वर्षों बाद कोई ऐसा व्यक्ति हुआ, जिसे बुद्ध के समकक्ष रखा जा सकता है, लेकिन फिर भी ओशो में बुद्ध से कुछ अलग ही था। ओशो में ओशोपन था, जो उन्हें दुनिया के तमाम बुद्ध पुरुषों से अलग करता है। मनुष्य जाति के चित्त में यह बात न जाने कैसे बैठ गई कि जब भी कोई बुद्ध चेतना आए तो सो जाना या फिर उसे पत्थर मारकर जंगल में ही रहने के लिए मजबूर कर देना। प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के साथ भी यही हुआ। भगवान महावीर को भी पत्थर मारे जाते थे। बुद्ध के सामने पागल हाथी छोड़े गए। ईसा मसीह को सूली पर लटका दिया गया।
 
सुकरात को जहर क्यों दिया गया? क्योंकि वह विश्वास की जगह संदेह सिखाता था। स्वाभाविक है कि कोई आपकी नींद तोड़ेगा तो आपको गुस्सा आएगा ही। ओशो भी सोए हुए मनुष्य की नींद तोड़ने ही आए थे, लेकिन इस बार भी हम चूक गए। थेलीसियम जहर देकर समयपूर्व ही उनके शरीर को मार दिया गया।
 
क्यों मार दिया ओशो को? क्योंकि ओशो ने अमेरिका में जाकर ईसाइयत के पाखंड को उजागर किया, धर्म और साम्यवाद के शोषण को उजागर किया। क्योंकि उन्होंने आपको झकझोरा। आपकी राजनीति के प्रति, आपके धर्म के प्रति और आपके तमाम तरह के पाखंड के प्रति आपको जगाने का प्रयास किया। क्योंकि ओशो कहते हैं कि पंडित, पुरोहित, मुल्ला, फादर और राजनेता यह सभी मानव और मानवता के शोषक और हत्यारे हैं। मानवता के इन हत्यारों के प्रति जल्द ही जाग्रत होना जरूरी है, अन्यथा ये मूढ़ सामूहिक आत्महत्या के लिए मजबूर कर देंगे। ओशो कहते हैं कि मनुष्य को धर्म और राजनीति ने मार डाला है आज हमें हिंदू, मुसलमान, ईसाई और अन्य कोई नजर आते हैं, लेकिन मनुष्य नहीं। कुछ लोगों को हिम्मत करना होगी अपने 'आदमी' होने की वरना मानवता महाविनाश के दलदल में धंसती जाएगी। घोषणा कर दें की मैं सिर्फ 'आदमी' हूं...फकत आदमी।
 
ओशो की विश्वस्त और विवादास्पद शिष्या रह चुकीं आनंद शीला (शीला पटेल) ने अपनी किताब 'डोंट किल हिम' में ओशो की संदिग्ध मृत्यु को लेकर कई सवाल उठाए थे। (उन्हें 1984 में रजनीशपुरम के बायोटेरर अटैक का दोषी ठहराया गया था और अमेरिका की एक संघीय जेल में उन्होंने 20 साल की सजा काटी थी)। हालांकि शीला का खुद का व्यक्तित्व की संदिग्ध रहा है। अमेरिका की सॉलिसिटर और महान लेखिका सू एपलटन के एक किताब लिखी थी जिका नाम है' दिया अमृत और पाया जहर'...तो क्या ओशो को जहर देकर मार दिया था। मार था तो किसने...जानिये इस सच को...
 
ओशो की का पहला रहस्य....
 

 

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