पाकिस्तानी आतंकी नौका की हकीकत!

पुनः संशोधित मंगलवार, 6 जनवरी 2015 (18:54 IST)
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पाक टेरर बोट मामले में जहां पाकिस्तानी प्रचार तंत्र द्वारा जो सरकारी लीपापोती की जा रही है, उसमें इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि संदिग्‍ध नाव पर आतंकवादी नहीं वरन छोटे मोटे तस्कर या अपराधी सवार थे जो कि मात्र गैरकानूनी काम कर रहे थे। पाकिस्तान का इस मामले पर सरकारी बयान यही है और केन्द्र सरकार की आलोचक कांग्रेस पार्टी को भी पाकिस्तानियों को आतंकवादी बताना रास नहीं आ रहा है क्योंकि सरकार की हर बात का विरोध करना अपना जन्मसिद्ध कर्तव्य माना जा रहा है। जबकि प्रतिरक्षा मंत्री और मंत्रालय का कहना है कि इस मामले में जो भी तथ्‍य हैं, वे पाकिस्तानी दावों और उनके भारतीय समर्थकों के दावों से पूरी तरह से खिलाफ हैं।
ऐसे तर्कों को बढ़ावा देने का काम एक अंग्रेजी अखबार ने किया है जो कि बड़ी दूर की कौड़ियों को लाने का काम कर रहा है। इन लोगों को अपने देश के रक्षामंत्री, सेना और खुफिया एजेंसियों का भरोसा नहीं है, लेकिन वे पाक सरकार के दुष्प्रचार पर आखें मूंदकर भरोसा करने के लिए तैयार हैं।
 
इसलिए जरूरी है कि आप सबसे पहले पूरे तथ्‍य जान लें। 31 दिसंबर की आधी रात के बाद भारतीय कोस्ट गार्ड ने एक संदिग्ध पाकिस्तानी नाव का पीछा किया था। इस नाव से विस्फोटक या अवैध मादक पदार्थ या दोनों ही ले जाए रहे थे। रात में यह नाव गुजरात की समुद्री सीमा से करीब 365 किमी दूर थी। जब इस नाव का पीछा किया जा रहा था तब नाव पर सवार लोगों ने रंगे हाथों पकड़े जाने के डर से नाव को आग लगा दी या ‍‍इसे नाव पर रखे विस्फोटकों की मदद से उड़ा दिया। इस मामले में यह बात साफ होता है कि नाव पर सवार लोगों ने भारत के कोस्ट गार्ड के हाथों पकड़े जाने की बजाय मरना ज्यादा बेहतर समझा। 
 
नाव के समुद्र में डूबने के बाद बताया गया कि इसका नाम कलंदर था। अखबार ने दावा किया कि इस मामले में जो नए प्रमाण उभर रहे हैं, उनके अनुसार नाव पर सवार लोग डीजल स्मगलर्स या शराब के छोटे मोटे तस्कर थे जो कि शराब की नाजायज बिक्री से जुड़े थे नाव में रखे अवैध सामान को ग्वादर पोर्ट से अन्य छोटी मछलीमार छोटी नावों में ले जा रहे थे। यह सामान ये लोग कराची के केटी बंदरगाहर से लेकर आ रहे थे। अखबार लिखता है कि इस बोट का अक्सर ही उपयोग बलूचिस्तान से ड्रग्स लाने के लिए किया जाता था।
 
अखबार का यह विश्लेषण सरकारी दावे को खारिज करता है लेकिन जो तार्किक बाते हैं वे सरकारी दावों के काफी करीब हैं। हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि नाव पर ड्रग स्मगलर हो सकते थे, लेकिन इसके साथ यह भी याद रखा जाना चाहिए कि बीच समुद्र में ड्रग से छुटकारा पाना सबसे ज्यादा आसान भी होता है। कोई भी इसे पानी में फेंककर कह सकता है कि वह तो पूरी तरह से निर्दोष है और और उस पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। ड्रग्स को बचाने के लिए नाव को जलाने की जरूरत नहीं होती है।
 
लेकिन, अगर पाकिस्तान का सरकारी तंत्र दावा करता है कि ये लोग ड्रग तस्कर थे तो इसका यह अर्थ भी निकलता है कि पाकिस्तानी अधिकारी समुद्र में ड्रग ‍माफिया के बारे में पूरी तरह से जानते थे और उन्हें अज्ञात कारणों से समुद्र में सक्रिय बने रहने की भी छूट दी गई थी। आखिर ऐसा क्यों किया गया था? क्या ये ड्रग तस्कर सरकार के लिए किसी तरह से उपयोगी नहीं थे? इसके साथ ही शराब और डीजल की स्मगलिंग की बात कही जा रही है। गुजरात में शराब पर रोक है, लेकिन जो लोग गुजरात और देश के अन्य भागों में शराब चाहते हैं, उन्हें आसानी से शराब मिल सकती है। इसलिए तस्करी से गुजरात में शराब लाए जाने का तर्क उचित नहीं लगता है। इसके अलावा, समुद्र में शराब की क्रेट्‍स से छुटकारा पाना कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं होती है।
 
इसी तरह गुजरात में तस्करी के जरिए डीजल लाने की कोशिश करना भी हास्यास्पद बात है। क्या कहीं और से डीजल लाकर गुजरात में इसे बेचना लाभदायक हो सकता है? भारत और पाकिस्तान में डीजल के दामों में काफी अंतर है? इसी मामले में देख लीजिए। अहमदाबाद गुजरात में डीजल 56.26 रुपए प्रति लीटर है, लेकिन इसकी तुलना में यह पाकिस्तान में 86.23 रुपए प्रति लीटर है। भारतीय रुपए की तुलना में पाकिस्तानी रुपया बहुत सस्ता है और एक डॉलर की तुलना में यह 100.80 रुपए है जबकि आज भारतीय रुपया डॉलर की तुलना में 63.33 रुपए है। इसका सीधा सा अर्थ है कि भारतीय मुद्रा की कीमत पाकिस्तान के रुपए की तुलना में 1.59 पाक रुपए है।
 
अब अगर गुजरात और पाकिस्तान में डीजल की कीमतों का आकलन करें। गुजरात में डीजल की कीमत 56.26 रुपया है तो पाकिस्तान में यह 89.45 रुपए है। पाक के स्थानीय डीजल मूल्यों का आकलन पर अंतर मात्र 3.22 रुपए होगा। ऐसी स्थिति में मात्र तीन रुपए के अंतर के लिए पाकिस्तानी मछुआरे क्यों अपने जीवन को जोखिम में डालेंगे? यह तस्करी यूपीए के समय में डीजल पर बहुत अधिक सब्सिडी मिलने से थोड़ी बहुत तर्कसंगत भी होती, लेकिन एनडीए के राज्य में डीजल मूल्य लागतों से भी अधिक मूल्य पर बेचा जा रहा है और इस पर एडीशनल एक्साइज भी लगती है। इसलिए डीजल की तस्करी करने पर कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। 
 
इसी तरह से अगर ड्रग्स ले जाने वाली नाव कोस्ट गार्ड के हाथ नहीं पकड़ी जाती है तो इसे समुद्र में डूब जाना स्वाभाविक है। इसलिए यह कहना गलत नहीं है कि नाव द्वारा शराब और डीजल ले जाने की बात उचित नहीं लगती है क्योंकि स्मलिंग का सिद्धांत हमें किसी भी निष्कर्ष की ओर आगे नहीं ले जा पाता है। इसलिए समय की जरूरत है कि हम कोस्ट गार्ड के विवरण पर विश्वास करें। पर क्या जब भी ऐसी कोई बात होती है कि तो इन तथाकथित बुद्धिजीवियों का ज्ञान घास चरने चला जाता है और वे अपने देश के जिम्मेदार लोगों की बजाय दुष्प्रचार फैलाने वाले लोगों की बातों पर अंधा भरोसा करना ज्यादा उचित समझते हैं।



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