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Last Updated :नई दिल्ली , गुरुवार, 28 अगस्त 2025 (23:49 IST)

RSS सरकार को यह नहीं बताता कि Donald Trump से कैसे निपटें, मोहन भागवत

Donald Trump
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि संघ सरकार को यह नहीं बताएगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कैसे निपटा जाए और वह उसके (सरकार के) निर्णय का समर्थन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मित्रता पर दबाव नहीं होना चाहिए। भागवत ने 3 दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला के दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए यह टिप्पणी की।
हम सरकार का समर्थन करेंगे
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार आवश्यक है और होना ही चाहिए, क्योंकि यह देशों के बीच संबंधों को भी बनाए रखता है। लेकिन यह दबाव में नहीं होना चाहिए; दोस्ती दबाव में नहीं पनप सकती। उन्होंने कहा कि यह मुक्त होना चाहिए, आपसी सहमति पर आधारित होना चाहिए। हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर होना चाहिए, साथ ही यह समझना चाहिए कि दुनिया परस्पर निर्भरता पर चलती है, और उसी के अनुसार कार्य करना चाहिए। भागवत ने कहा कि हम सरकार को यह नहीं बताते कि ट्रंप से कैसे निपटना है; उन्हें पता है कि क्या करना है और हम उसका समर्थन करेंगे।
आरएसएस के सरसंघचालक की यह टिप्पणी ट्रंप द्वारा रूसी तेल की खरीद पर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क के लागू होने के एक दिन बाद आई है। इस तरह भारत पर कुल 50 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। भागवत ने बुधवार को कहा था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्वेच्छा से होना चाहिए, किसी दबाव में नहीं। उन्होंने भारतीयों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की थी।

हिन्दू-मुस्लिम एक हैं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में इस्लाम का हमेशा एक स्थान रहेगा। उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच आपसी विश्वास बनाए रखने की पुरज़ोर वकालत की।
 
आरएसएस के शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में भागवत ने कहा कि संघ किसी पर भी, धार्मिक आधार पर भी, हमला करने में विश्वास नहीं रखता है और केरल बाढ़ और गुजरात भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान हमेशा सभी की मदद के लिए आगे आया है।
 
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि उनका मानना ​​है कि धर्म व्यक्तिगत पसंद का मामला है और इस मामले में किसी भी तरह का प्रलोभन या ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं होनी चाहिए।
 
भागवत ने पूछा, ‘‘हिंदू और मुसलमान एक ही हैं... इसलिए उनके बीच एकता को लेकर कोई सवाल ही नहीं है; सिर्फ उनकी पूजा पद्धति बदल गई है। हम पहले से ही एक हैं। एकजुट करने वाली बात कहां से आई? बदला ही क्या है? सिर्फ़ पूजा पद्धति बदल गई है; क्या इससे वाकई कोई फ़र्क़ पड़ता है?’’
 
उन्होंने कहा कि इस्लाम पुरातन काल से भारत में रहा है और आज तक कायम है, और भविष्य में भी रहेगा। भागवत ने कहा, ‘‘यह विचार कि इस्लाम नहीं रहेगा, हिंदू दर्शन नहीं है। हिंदू और मुसलमान दोनों को एक-दूसरे पर परस्पर विश्वास रखने की ज़रूरत है।’’ भागवत ने यह भी कहा कि सड़कों और जगहों का नाम ‘आक्रांताओं’ के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए।
 
उन्होंने कहा, ‘‘उनका नाम आक्रांताओं के नाम पर नहीं रखा जाना चाहिए। मैंने यह नहीं कहा कि मुस्लिम नाम नहीं होना चाहिए। एपीजे अब्दुल कलाम, अब्दुल हमीद का नाम वहां होना चाहिए।’’
 
आरएसएस प्रमुख ने देश में जनसांख्यिकीय असंतुलन के प्रमुख कारणों के रूप में धर्मांतरण और अवैध प्रवासन का हवाला दिया और कहा कि सरकार घुसपैठ को रोकने की कोशिश कर रही है और समाज से भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
 
भागवत ने कहा कि नौकरियां अवैध प्रवासियों को नहीं, बल्कि ‘‘हमारे लोगों को मिलनी चाहिए जिनमें मुसलमान भी हैं।’’ भागवत ने कहा कि वह इस तर्क से सहमत हैं कि बांग्लादेश और भारत के लोगों का ‘डीएनए’ एक जैसा है, लेकिन हर देश के अपने नियम-कानून होते हैं और प्रवास के इच्छुक लोगों को इन नियमों का पालन करना चाहिए।
 
भागवत ने उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि आरएसएस हिंसा में शामिल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हिंसा में लिप्त कोई भी संगठन भारत में 75 लाख जगहों तक नहीं पहुंच सकता या इतना समर्थन हासिल नहीं कर सकता। अगर हम ऐसे होते, तो क्या हम ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते? हम कहीं भूमिगत होते।’’ इनपुट भाषा Edited by : Sudhir Sharma