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Last Updated : शनिवार, 30 अगस्त 2025 (18:41 IST)

डोनाल्ड ट्रंप को मिलेगी चुनौती, बदलेगी दुनिया की राजनीति

Prime Minister Narendra Modi China visit
Prime Minister Narendra Modi China visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर सबसे ज्यादा 50 फीसदी टैरिफ लागू करना और भारत की चीन तथा रूस जैसे अमेरिका विरोधी देशों से बढ़ती निकटता दुनिया की राजनीति का रुख बदल सकती है। माना जा रहा है यह दोस्ती एक नई विश्व व्यवस्था की शुरुआत है। दरअसल, हाल ही में अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ प्रमुख सामानों पर 50 फीसदी का भारी भरकम टैरिफ लगा दिया है। इसका सीधा असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ रहा है।
 
अपने ही घर में घिरे ट्रंप : भारत इसे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिए बड़ा झटका मान रहा है। वहीं, भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत अमेरिका के दबाव के आगे झुकेगा नहीं। हालांकि ट्रंप इस मुद्दे पर अपने ही देश में घिरते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ ने दावा किया है ट्रंप के कदम से ब्रिक्स मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका का भारत को यह बताना कि भारत को क्या करना है, ऐसा है जैसे कोई चूहा हाथी को मुक्का मार रहा हो।
 
इतना ही नहीं, अमेरिका की एक संघीय अदालत ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास लगभग सभी देशों पर भारी-भरकम शुल्क लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ट्रंप को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने और लगभग सभी देशों पर आयात कर लगाने की कानूनी अनुमति नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत नहीं होता कि राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का असीमित अधिकार देने का संसद का कोई इरादा है।
 
दूसरी ओर, अमेरिकी यहूदियों के एक समर्थक समूह अमेरिका ज्यूइश कमेटी (एजेसी) ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों पर निशाना साधा और कहा कि रूस-यूक्रेन संकट के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है। समूह ने अमेरिका-भारत संबंधों को बेहतर बनाने का आह्वान किया। एजेसी ने नवारो की टिप्पणी को अपमानजनक आरोप करार दिया है, जिसमें नवारो ने रूस-यूक्रेन संकट को 'मोदी का युद्ध' करार देते हुए कहा था कि शांति का मार्ग आंशिक रूप से नई दिल्ली से होकर जाता है। 
 
ट्रंप को मिलेगी ब्रिक्स से चुनौती : एक तरफ जहां अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स जैसे मंचों पर चीन और रूस के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत कर रहा है। हालांकि रूस और भारत के रिश्ते काफी पुराने हैं। रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना हो या चीन के साथ सीमा विवाद के बावजूद आर्थिक संबंधों को बनाए रखना हो, भारत एक जटिल संतुलन साध रहा है। यह भी सही है कि भारत किसी एक गुट का हिस्सा बनने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि चीन से संबंध बनाते समय भारत को काफी सतर्कता से आगे बढ़ना होगा क्योंकि कई मौकों पर वह भारत के साथ दगा कर चुका है। 
अमेरिका का दोगलापन : अमेरिका एक तरफ भारत पर सबसे ज्यादा टैरिफ थोपता है, वहीं वह यह भी कहता है कि भारत को चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करनी चाहिए और रूस से दूर रहना चाहिए। संभवत: 50 फीसदी टैरिफ उसी दबाव का एक हिस्सा है। इस बयान में अमेरिका का दोमुंहापन भी झलकता है। ट्रंप दोस्ती की आड़ में भारत के साथ दगाबाजी ही कर रहे हैं। जब अमेरिका भारत चिर-शत्रु पाकिस्तान पर कम टैरिफ लगाता है तो भारत को भी अपना फायदा देखने का पूरा हक है। हालांकि भारत ने स्पष्ट भी कर दिया है कि वह अपने फैसले खुद लेगा, भले ही उससे अमेरिका के साथ संबंधों में तनाव आता है तो आए।
 
ताजा घटनाक्रम को देखकर लग रहा है कि दुनिया अब एकध्रुवीय अमेरिका केंद्रित व्यवस्था से हटकर बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत, चीन और रूस मिलकर इस नए केंद्र के महत्वपूर्ण स्तंभ बन रहे हैं। भारत, जो कभी शीत युद्ध के दौरान तटस्थ था, आज एक शक्तिशाली और स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। यह अमेरिका के लिए एक चुनौती है और चीन तथा रूस के लिए एक मौका। यह देखना निश्चित ही दिलचस्प होगा कि यह नया गठजोड़ कैसे आकार लेता है। इस मामले में एक बात तय है कि अमेरिकी खेमे में इस नए गठबंधन को लेकर काफी खलबली मची हुई है। कोई आश्चर्य नहीं कि निकट भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी फैसलों पर पछतावा हो। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
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