दलितों पर अत्याचार दुर्भाग्यपूर्ण : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली| पुनः संशोधित बुधवार, 20 जुलाई 2016 (14:52 IST)
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नई दिल्ली। में समुदाय के कुछ लोगों की पिटाई की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक है कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी दलितों पर अत्याचार की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने इसे सामाजिक बुराई करार देते हुए इसे समाप्त करने के लिए सभी से मिलकर काम करने का आग्रह किया।
 
राजनाथ ने लोकसभा में कहा कि गुजरात के इस मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और आईपीसी एवं अन्य कानून की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और त्वरित जांच की पहल की जा रही है। प्रत्येक पीड़ित को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई है जिनमें से अब तक 1-1 लाख रुपए प्रदान कर दिए गए हैं।
 
शून्यकाल में कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने इस मुद्दे को उठाया और गुजरात में कानून एवं व्यवस्था विफल होने का आरोप लगाते हुए इसकी जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति गठित करने की मांग की।
 
राजनाथ ने कहा कि दलितों पर अत्याचार की घटना चाहे भाजपा शासित प्रदेश में हो या कांग्रेस शासित प्रदेश या कहीं और हो, निंदनीय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृहराज्य में घटी इस घटना पर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरने के कांग्रेस, वामदल एवं अन्य दलों के प्रयासों के बीच गृहमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि 1991 से 1999 तक गुजरात में दलितों के खिलाफ अपराध के मामले लगातार बढ़े, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी जबकि 2001 के बाद से ऐसे मामलों में कमी दर्ज की गई, जब भाजपा की सरकार थी।
 
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरे देश में साल 2004 में अनुसूचित जाति, जनजाति समेत दलितों के खिलाफ अत्याचार के 32 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए जबकि 2005 में 29 हजार मामले, 2006 में 32 हजार मामले, 2007 में 35 हजार से अधिक मामले, 2008 में 38 हजार से अधिक मामले, 2009 में 34 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए। इस दौरान केंद्र में हमारी सरकार नहीं बल्कि आपकी (कांग्रेस की) सरकार थी।
 
गृहमंत्री ने कहा कि यह एक सामाजिक बुराई है और हमारी सरकार इस बुराई से निपटने को प्रतिबद्ध है। 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने इस दिशा में पहल की है। कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों की टोका-टाकी के बीच राजनाथ ने कहा कि गुजरात में 11 जुलाई को घटी घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और वे इसकी कठोर शब्दों में निंदा करते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जब इसकी जानकारी मिली तब वे इससे काफी दुखी और आहत थे।
 
गुजरात के सोमनाथ जिले में घटी इस घटना में मृत गाय की खाल निकाल रहे दलित समुदाय के लोगों की कुछ दूसरे लोगों ने डंडों, छड़ों से पिटाई कर दी और उनका मोबाइल छीन लिया था।
 
गृहमंत्री ने कहा कि इस मामले में आईपीसी एवं अन्य कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक कर रहे हैं। 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें से 7 न्यायिक हिरासत में हैं और 2 पुलिस हिरासत में। 4 पुलिस अधिकारियों को सेवा में लापरवाही के सिलसिले में निलंबित कर दिया गया है।
 
उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीड़ित को 4-4 लाख रुपए देने की घोषणा की गई है और अभी तक 1-1 लाख रुपए उन्हें प्राप्त हो चुके हैं। अपराध की जांच का कार्य सीआईडी अपराध शाखा को सौंपा गया है। अलग अदालत बनाकर मामले के त्वरित निस्तारण करने की पहल की जा रही है। जांच अधिकारी से 60 दिनों में आरोपपत्र दायर करने को कहा गया है। पीड़ितों का इलाज गुजरात सरकार करा रही है। (भाषा) 
 



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