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निर्मला सीतारमण ने कहा, सरकार की मुद्रास्फीति पर नजर, नियंत्रण में रहेगी महंगाई

Updated: शनिवार, 6 जुलाई 2019 (18:48 IST)
नई दिल्ली। बजट में पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क और उपकर बढ़ने से महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि सरकार ने पिछले 5 साल लगातार मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखा और आगे भी सरकार इस पर अंकुश बनाए रखेगी।
 
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करते हुए सीतारमण ने पेट्रोल, डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क एवं अवसंरचना उपकर के रूप में प्रति लीटर 2-2 रुपए की वृद्धि की है। माना जा रहा है कि पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।
 
लोकसभा में वर्ष 2019- 20 का बजट पेश करने के बाद शनिवार को यहां बातचीत में वित्तमंत्री ने महंगाई के सवाल पर कहा कि सरकार ने पिछले 5 साल महंगाई को लगातार नियंत्रण में रखा है। इस दौरान थोक महंगाई लगातार नीचे बनी रही और एक बार भी 4 प्रतिशत से ऊपर नहीं गई। जब भी महंगाई की स्थिति बिगड़ी, सरकार ने तुरंत कदम उठाए और इसे नियंत्रण में लाया है।
 
सीतारमण ने महंगाई के सवाल पर कहा कि महंगाई नियंत्रण में रहेगी। सरकार की इस पर बराबर नजर रही है। जब भी हालात बिगड़े हैं, सरकार ने तुरंत कदम उठाए हैं। पिछले 5 सालों के दौरान 2014 में जब नई सरकार बनी तब अरहर दाल के दाम 200 रुपए पर पहुंचे थे, उड़द, मूंग के दाम भी आसमान छू रहे थे। सरकार ने कदम उठाए और दाम नीचे आए।
 
उल्लेखनीय है कि जिन्सों के दामों में स्थिरता लाने के इरादे से सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाया। इसका मकसद जरूरी जिन्सों के दाम में तेजी पर काबू रखना था।
 
वित्तमंत्री ने अर्थशास्त्रियों का हवाला देते हुए कहा कि अर्थशास्त्री तो यह भी मानते हैं कि मुद्रास्फीति का लगातार नीचे रहना भी ठीक नहीं, इसका आर्थिक वृद्धि पर भी असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति का एकदम नीचे या बहुत ऊपर होना ठीक नहीं है। इसे उचित स्तर पर रखा जाना चाहिए। देश में आर्थिक वृद्धि और रोजगार बढ़ाने के वास्ते इसमें संतुलन रखने की जरूरत है।
 
मोदी सरकार के पिछले 5 सालों के कार्यकाल में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जनवरी, फरवरी 2016 के आसपास शून्य से भी नीचे गिर गई थी। मई 2016 के आसपास थोक मुद्रास्फीति का आंकड़ा जहां 6 प्रतिशत से ऊपर अथवा इसके आसपास था वहीं मोदी सरकार के आने के बाद यह 4 प्रतिशत के आसपास अथवा उससे नीचे ही रहा। (भाषा)

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