फर्जी Corona टीकाकरण मामले में केंद्र ने मांगी पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट, ममता बनर्जी नाराज

Last Updated: बुधवार, 30 जून 2021 (22:32 IST)
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कोलकाता/ नई दिल्ली। केंद्र द्वारा फर्जी कोरोनावायरस (Coronavirus) टीकाकरण शिविर के आयोजन पर से रिपोर्ट तलब करने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार का इससे कोई सबंध नहीं है और कहा कि कहीं उन शिविरों का आयोजन करने में भाजपा का हाथ तो नहीं।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल को बदनाम करने के लिए भाजपा नीत कुछ एजेंसियों का इस्तेमाल राई का पहाड़ बनाने के लिए कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से कोलकाता के कुछ इलाकों में गैर कानूनी तरीके से कोविड-19 टीकाकरण शिविर आयोजित करने के मामले की जांच कर अगले दो दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी द्वारा मामले पर ध्यान आकर्षित कराए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव कृष्ण द्विवेदी को 29 जून को पत्र लिखकर मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री ने कहा, संदिग्ध टीकाकरण शिविर लगाने का एक मामला है।पश्चिम बंगाल सरकार का उनसे कोई संबंध नहीं है। हमने शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की।

कई लोगों को कोलकाता में संदिग्ध टीकाकरण शिविर आयोजित करने और फर्जी टीके की खुराक देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है जिनमें खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी बताने वाला सरगना भी शामिल है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा उनकी सरकार को भेजे पत्र का हवाला देते हुए बनर्जी ने दावा किया कि इस तरह का पत्र तब नहीं भेजा गया जब गुजरात में भाजपा के कार्यालय में टीके की खुराक दी गई।

उन्होंने कहा, गुजरात में टीके की खुराक भाजपा के कार्यालय में दी गई। उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कितने पत्र भेजे गए? कितनी जांच की गई? जब राज्य अच्छा कर रहा है तो वे उसमें रोड़े अटका रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष का भी पदभार संभाल रहीं बनर्जी ने कोलकाता में भाजपा के भी शामिल होने की आशंका जताई। उन्होंने कहा, क्या सबूत हैं कि इसके पीछे भाजपा नहीं है?

भाजपा, तृणमूल कांग्रेस (नेताओं) की तस्वीर रखती है। भाजपा ने फर्जी टीकाकरण शिविर के मुख्य आरोपी देवंजन देब के साथ तृणमूल नेताओं की तस्वीर साझा की थी। ममता बनर्जी ने कहा कि तस्वीरों के आधार पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वे संपादित हो सकते हैं और ऐसी तस्वीरों का इस्तेमाल अपना धंधा चलाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी तस्वीरें हो सकती हैं, जिनमें भाजपा और अन्य पार्टियों के नेता देवंजन देब के साथ दिख रहे हों।

बनर्जी ने कहा, निश्चित रूप से एक दिन वे सामने आएंगे। जो भी इन गतिविधियों के पीछे है, चाहे उसका जुड़ाव किसी भी राजनीतिक व्यक्ति से हो, उससे सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों को फर्जी टीका लगाना आतंकवादी घटना से भी अधिक खराब है।

बनर्जी ने कहा, फर्जी टीकाकरण शिविर में जो टीके लगाए गए वे एंटीबायोटिक थे, न कि कोविड टीके। हम उम्मीद करते हैं कि जिन्हें ये टीके लगे हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। स्वास्थ्य विभाग उनकी सेहत पर नजर रखे हुए है और जब डॉक्टर अनुमति देंगे तब उन्हें टीके लगाए जाएंगे। यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पर राज्य में हस्तक्षेप करने का भी आरोप लगाया। बनर्जी ने जानना चाहा कि केंद्र सरकार ने तब क्या कदम उठाया जब हिंसा के फर्जी वीडियो सामने आए। आरोप है कि पश्चिम बंगाल में पिछले महीने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हिंसा हुई और कई वीडियो साझा किए गए जिनमें कहीं और हुई हिंसा की तस्वीरें थीं और उसे राज्य का बताया गया।
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बनर्जी ने कहा, अगर कोई आपके भाजपा नेता के खिलाफ ट्वीट करता है, तब आप (केंद्र सरकार) प्राथमिकी दर्ज कर और गिरफ्तारी कर कार्रवाई करते हैं। अन्य मामलों में शायद ही कुछ होता है। भूषण द्वारा लिखे गए पत्र में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेन्दु अधिकारी के 25 जून को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को लिखे गए उस पत्र का संदर्भ दिया गया है जिसमें अनधिकृत लोगों द्वारा टीकाकरण शिविर लगाए जाने को लेकर ध्यान आकर्षित कराया गया था।
भूषण ने पत्र में कहा कि कोलकाता नगर निगम के कुछ इलाकों में खासतौर पर कस्बा इलाके में लगाए गए टीके में किसी भी लाभार्थी को कोविन के जरिए टीकाकरण प्रमाण पत्र नहीं मिला जिससे इन शिविरों के वास्तविक होने पर आशंका पैदा हो गई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा, दिशानिर्देशों के मुताबिक कोविड-19 के सभी टीकाकरण सत्र कोविन पोर्टल के जरिए आयोजित किए जाने चाहिए और सभी टीकाकरण के रिकॉर्ड भी इस पोर्टल पर दर्ज किए जाने चाहिए। टीका लगाने के बाद उसकी जानकारी कोविन पोर्टल में सफलतापूर्वक दर्ज होने पर टीकाकरण प्रमाण पत्र डिजिटल और भौतिक माध्यम से लाभार्थी को दिया जाना चाहिए। शुभेंदु अधिकारी ने पत्र में टीकाकरण में फर्जीवाड़े की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की थी।
इस बीच, ममता बनर्जी ने कोलकाता के जादवपुर इलाके में चुनाव बाद हिंसा की जांच करने के लिए आई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की समिति के दौरान मंगलवार को केंद्रीय बलों द्वारा महिलाओं पर किए गए हमले की निंदा की। उन्होंने कहा, जादवपुर में क्या हुआ? क्यों केंद्रीय बलों ने वहां महिलाओं की पिटाई की? वहां कुछ नहीं हुआ। संस्थाओं के प्रति मेरा सम्मान है लेकिन उन्हें भाजपा सदस्य की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए।(भाषा)



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