राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पूछताछ में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मानी गलती
Ayodhya Ram Mandir donation theft case: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए दान चोरी मामले की जांच को यूपी पुलिस और एसआईटी (SIT) ने तेज कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के बयान दर्ज किए गए हैं, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि दान चोरी की बात सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में उनसे देरी हुई। दूसरी ओर, पुलिस अब चंपत राय समेत ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्यों की वित्तीय संपत्तियों और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है।
पुलिस और एसआईटी के सामने दिए अपने बयान में पूर्व महासचिव चंपत राय ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। चंपत राय ने बताया कि ट्रस्ट को जून के पहले हफ्ते में ही इस बात की भनक लग गई थी कि मंदिर के दान में हेराफेरी और चोरी हो रही है। जानकारी मिलते ही ट्रस्ट के लोगों ने आंतरिक स्तर पर कार्रवाई की थी और भारी मात्रा में कैश भी बरामद किया था।
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चंपत राय ने जांचकर्ताओं से कहा कि मैंने खुद एसआईटी को इस मामले की शिकायत दी थी, जिसके आधार पर केस दर्ज हुआ। लेकिन हां, यह मेरी गलती है कि मैंने आधिकारिक तौर पर पुलिस शिकायत दर्ज करने में देरी की। हम अपने स्तर पर आंतरिक जांच करने में लगे हुए थे। उल्लेखनीय है कि इस मामले में 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें सोमवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
5 जून का फुटेज और कैश रिकवरी का सच
चंपत राय ने पूछताछ में 5 जून की उस घटना का भी जिक्र किया, जब ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट को पहले ही इसकी जानकारी मिल गई थी और छापेमारी के दौरान अविनाश शुक्ला के घर से भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया था। हालांकि, जांच अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे मामले को संभालने में चंपत राय एक अच्छे प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) साबित नहीं हुए और उनकी ओर से गंभीर लापरवाही बरती गई।
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तीखे सवालों पर साधी चुप्पी
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान जब जांचकर्ताओं ने चंपत राय से कुछ कड़े और तकनीकी सवाल पूछे, तो वे उनका स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए और कई मौकों पर चुप्पी साध गए। इस बीच, पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के कई वरिष्ठ सदस्यों की फाइनेंशियल डिटेल्स (वित्तीय विवरण) खंगालना शुरू कर दी है। इन सभी नेताओं और पदाधिकारियों के बैंक खातों, लेन-देन और संपत्तियों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस मामले के तार किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।
70 से अधिक लोगों को नोटिस जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मचारियों और संदिग्ध गतिविधियों से संबंध रखने वाले लगभग 70 लोगों को नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों और इसके पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।
Edited by: Vrijendar Singh Jhala
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