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कौन हैं रिटायर्ड IAS योगेश्वर राम मिश्रा, जो हो सकते हैं राम मंदिर के CEO?
who is IAS Yogeshwar Ram Mishra: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और पारदर्शिता लाने की तैयारी चल रही है। एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट और संस्तुतियों के बाद तिरुपति बालाजी और श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर में भी एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इस पद की दौड़ में कुछ और नाम भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और एक अन्य ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं।
इस रेस में उत्तर प्रदेश के पूर्व सीनियर आईएएस (IAS) अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा का नाम सबसे आगे चल रहा है। आइए जानते हैं कि कौन हैं योगेश्वर राम मिश्रा और क्यों उन्हें इस बेहद जिम्मेदारी भरे पद के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। योगेश्वर राम मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के 2005 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी रहे हैं। वे मूल रूप से प्रयागराज (इलाहाबाद) के रहने वाले हैं। वह प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (UP-PCS) से प्रमोट होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए थे और उन्हें उत्तर प्रदेश शासन में प्रशासनिक कार्यों का लंबा और गहरा अनुभव है। सबसे खास बात यह है कि उन्हें योगी सरकार का विश्वासपात्र अफसर माना जाता है। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी
अयोध्या से पुराना नाता
योगेश्वर राम मिश्रा अयोध्या के मिजाज और वहां की व्यवस्थाओं से भली-भांति वाकिफ हैं। वे जनवरी 2016 से मार्च 2016 के दौरान अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद) के जिलाधिकारी (DM) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वे अपने सेवाकाल में वाराणसी (काशी), बाराबंकी और अयोध्या जैसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील जिलों में बतौर जिलाधिकारी (District Magistrate) तैनात रह चुके हैं। ALSO READ: अखिलेश जी, अयोध्या को रामभक्तों ने संवारा, आप पश्चाताप कर रामलला के दर्शन करिए : योगी आदित्यनाथ
वह विंध्याचल और देवीपाटन मंडल के मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) जैसे बड़े पदों पर भी काम कर चुके हैं और विंध्य कॉरिडोर के कामों को पूरा कराने का श्रेय भी उन्हें जाता है। इसके अलावा वह 'उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग' (UPPSC) में सदस्य (प्रशासनिक) की भूमिका भी निभा चुके हैं। विंध्याचल मंडल के कमिश्नर रहे हैं
क्यों हो रही है इनके नाम की चर्चा?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और आंतरिक प्रबंधन में पारदर्शिता लाना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में योगेश्वर राम मिश्रा का नाम सामने आने के पीछे मुख्य वजह यह है कि उन्हें धार्मिक नगरियों के प्रबंधन का पुराना अनुभव है। वाराणसी और अयोध्या जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में काम करने के कारण वे संतों, स्थानीय परंपराओं और श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को गहराई से समझते हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर घोटाला, करोड़ों की चोरी से लेकर इस्तीफों और गिरफ्तारियों तक की पूरी टाइमलाइन
बेदाग और कड़क छवि
प्रशासनिक हलकों में उनकी छवि एक सुलझे हुए और नियमों के पाबंद अधिकारी की रही है। बड़े प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों को लागू करने में उन्हें माहिर माना जाता है। अयोध्या में पूर्व में डीएम रहने के कारण वहां के स्थानीय प्रशासन, पुलिस और काफी हद तक संत समाज में भी उनकी जान-पहचान और स्वीकार्यता है। हालांकि राम मंदिर के सीईओ के रूप में योगेश्वर राम मिश्रा के अलावा पूर्व आईएएस अवनीश अवस्थी और डॉ. अनिल पाठक जैसे कद्दावर नामों की भी चर्चा है।
क्या है चुनौतियां?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वर्तमान नियमों में 'सीईओ' का कोई पद नहीं है। ऐसे में इस पद को सृजित करने के लिए पहले ट्रस्ट के बायलॉज (नियमों) में संशोधन करना होगा। यदि सरकार और ट्रस्ट किसी प्रशासनिक अधिकारी को कमान सौंपने का अंतिम फैसला लेते हैं, तो योगेश्वर राम मिश्रा अपनी वरिष्ठता और अनुभव के कारण इस पद के लिए सबसे मजबूत और भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकते हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
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