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चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी
Ayodhya Ram Mandir theft: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में एक बड़ा और अभूतपूर्व मोड़ आया है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि राम मंदिर से जुड़े इस चोरी के मामले में पकड़े गए आरोपियों की पैरवी अयोध्या का कोई भी वकील नहीं करेगा।
इस बीच, राम मंदिर चढ़ावा मामले में अयोध्या की अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। बार एसोसिएशन के इस कड़े रुख के बाद आरोपियों को कानूनी प्रतिनिधित्व मिलना मुश्किल हो गया है। आरोपियों की रिमांड अवधि आज खत्म हो रही है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर के 'दानपात्र' (चढ़ावे) से नकदी चोरी होने का एक मामला सामने आया था। मंदिर परिसर की सुरक्षा और पवित्रता के लिहाज से इसे बेहद गंभीर चूक माना गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस मामले में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया और उनके पास से चोरी की गई राशि भी बरामद करने का दावा किया। उल्लेखनीय है कि रविवार को आरोपियों के घरों पर भी छापे की कार्रवाई हुई है।
बार एसोसिएशन का कड़ा फैसला
आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अयोध्या बार एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में वकीलों ने इस कृत्य की घोर निंदा की और सामूहिक रूप से एक बड़ा प्रस्ताव पारित किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय आम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है। इसलिए, अयोध्या का कोई भी अधिवक्ता अदालत में आरोपियों की जमानत या पैरवी के लिए खड़ा नहीं होगा। वकीलों का कहना है कि यह केवल एक साधारण चोरी का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था पर आघात है। ऐसे तत्वों को कानूनी मदद देना उनके नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामले की जांच कहां तक पहुंची?
इस गंभीर मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है। अब तक की कार्रवाई इस प्रकार है। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियों ने कथित गबन की रकम से जुड़ी लगभग 79.85 रुपए लाख की राशि बरामद की है। पुलिस आरोपियों के घरों पर छापेमारी कर वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। साथ ही, दान गणना केंद्र से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन पड़ताल जारी है। इस बीच आरोपियों की रिमांड अवधि सोमवार को खत्म हो रही है।
आरोपियों के पास अब क्या विकल्प हैं?
स्थानीय वकीलों के इस बहिष्कार के बाद आरोपियों के सामने कानूनी संकट खड़ा हो गया है। भारतीय संविधान के अनुसार, हर आरोपी को कानूनी सहायता पाने का अधिकार है। ऐसी स्थिति में आरोपियों के पास निम्नलिखित विकल्प बचते हैं। आरोपी पक्ष को अपनी पैरवी के लिए अन्य जिलों (जैसे लखनऊ, सुल्तानपुर या बस्ती) से निजी वकील बुलाने पड़ सकते हैं। यदि कोई भी वकील केस नहीं लेता है, तो अदालत नियमानुसार आरोपियों को अपनी बात रखने के लिए 'एमीकस क्यूरी' (अदालत का मित्र) या सरकारी विधिक सेवा प्राधिकरण से वकील मुहैया करा सकती है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala
