खास चेहरे जो इस बरस सुर्खियों में रहे

भाषा|
नई दिल्ली। इस बरस दुनियाभर में कुछ लोग ऐसे रहे, जिन्होंने जाने अनजाने खूब सुर्खियाँ बटोरीं। कुछ की किस्मत ने उनके नाम शोहरत की रौशनी भर दी तो कुछ ने खुद ही अपने नाम पर बदनामी की कालिख पोती। कुछ अपनी जाँबाजी के लिए मशहूर हुए तो कुछ ने किसी और के नाम की मलाई खाई।

इस साल के कुछ मशहूर चेहरों में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, मुंबई आतंकवादी हमलों के एकमात्र जीवित आतंकवादी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब, आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ों के दौरान मारे गए जाँबाज पुलिसकर्मी, दो रिएलिटी-शो जीतने वाले आशुतोष कौशिक, वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश पर जूता फेंकने वाले इराकी पत्रकार मुंतजर अल जैदी और ओलिम्पिक में भारत को पहचान दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा और विजेंदर कुमाका नाम लिया जा सकता है।

भारत के कैनवास पर देखें तो एक अरब से अधिक की आबादी वाले इस देश में कुछ चेहरे बाकी सबसे हटकर नजर आए। मोहाली के जिरकपुर में जन्मेअभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलिम्पिक खेलों की निशानेबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश को पहली बार किसी व्यक्तिगत स्पर्धा में सोना लाकर दिया। इसी तरह मुक्केबाजी में विजेंदर कुमार ने काँस्य पदक जीतकर देशभर में अपनी धाक जमाई। इन दोनों ने देश में खेलों की दशा और दिशा को एक नया मोड़ दिया।
इस वर्ष युवाओं को एक और चेहरा बेहद अपना सा लगा। यह है सहारनपुर का आशुतोष कौशिक जो टेलीविजन के एक के बाद एक दो लोकप्रिय रिएलिटी शो जीतकर धन और शोहरत की बुलंदी पर जा पहुँचा। बेहद साधारण पृष्ठभूमि के आशुतोष ने एमटीवी का रोडीज जीतने के बाद बिग ॉस भी जीता और इस कहावत को एकदम सच साबित कर दिया कि उपर वाला जब देता है तो छप्पर फाड़कर देता है।
नवंबर के अंत में मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले में देश ने अपने जाँबाज सुरक्षाकर्मी गँवाए। हेमंत करकरे, अशोक काम्टे, विजय सालस्कर और मेजर संदीप उन्निकृष्णन कुछ ऐसे चेहरे थे जो चाहते तो खुद को बचा सकते थे लेकिन उन्होंने अपने फर्ज को अपनी जिंदगी से ऊपर माना और अपनी जिंदगी देश के नाम लिख गए। वक्त का मरहम हमले के नक्श भले ही धुँधले कर दे लेकिन इन जाँबाज अफसरों के चेहरे सदियों तक शहादत की रौशनी में जगमगाते रहेंगे।
इसी क्रम में दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा के इंस्पेक्टर मोहनचन्द्र शर्मा को कौन भूल सकता है। उनके शौर्य और हिम्मत के लिए आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें सदा सलाम करती रहेंगी। इसी वर्ष शौर्य के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित शर्मा ने दिल्ली के बटला हाउस में आतंकवादियों से लड़ते हुए जान दी।
यूँ तो बीता साल भी बाकी तमाम सालों की तरह एक एक दिन करके गुजर गया लेकिन इस दौरान बराक ओबामा के तौर पर दुनिया का सबसे ताकतवर चेहरा सामने आया जो आने वाले बरसों में अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में दुनिया की पेशानी पर एक ई तहरीर लिखने का माद्दा रखता है। व्हाइट हाउस के पहले अश्वेत राष्ट्रपति ओबामा जनवरी में अपना कार्यभार संभालेंगे।
इस वर्ष आसिफ जरदारी का चेहरा भी दुनिया के सबसे चर्चित चेहरों में शुमार हो गया। जरदारी हालाँकि बेगम बेनजीर भुट्टो के शौहर होने के नाते मशहूर लोगों में तो थे लेकिन पिछले साल के आखरी हफ्ते में बेगम बेनजीर की हत्या ने मियाँ जरदारी को पाकिस्तान की हुकूमत के खुशगवार दरीचों का रास्ता दिखा दिया।
इराक के समाचार चैनल अल बगदादिया के 29 वर्षीय संवाददाता मुंतजर अल जैदी को 14 दिसंबर की सुबह तक कोई जानता तक नहीं था लेकिन 15 दिसंबर के सारे अखबार उसके कारनामे से भरे पड़े थे। हर चैनल पर जैदी का नाम लिया जा रहा था और वह रातोंरात दुनियाभर में मशहूर हो चुका था। जैदी ने एक संवाददाता सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश पर अपने दोनों जूते फेंककर दे मारे। बुश ने तो झुककर जूतों का वार बचा लिया लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने जैदी के हाथ और पसलियां तोड़ डालीं।
इस वर्ष के एक और चर्चित चेहरे नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कुमार दहल प्रचंड के नाम के पहले अक्षर का मतलब भले ही फूल हो लेकिन उनके प्रचंड वेग ने नेपाल की राजशाही के वटवृक्ष को जड़ समेत उखाड़ फेंका। कम्युनिस्ट क्रांतिकारी कुशल राजनीतिज्ञ और पूर्व विद्रोही नेता की भूमिका निभाने वाले प्रचंड को इस वर्ष 15 अगस्त को प्रजातांत्रिक नेपाल का प्रधानमंत्री बनाया गया।
इस वर्ष के बदनाम चेहरों में मोहम्मद अजमल आमिर कसाब का नाम लिया जा सकता है। यह मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद जीवित पकड़ा गया एकमात्र आतंकवादी है। खुद को पाकिस्तानी बताने वाले इस आतंकवादी ने अपने जुनून के हाथों अपनी मानवीयता और जमीर को बेच डाला और बदले में बदनामी की ढेर सी कालिख अपने नाम पर पोत दी।
लाखों-करोड़ों चेहरों की भीड़ में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले इन तमाम चेहरों के नाम धीरे-धीरे वक्त की गर्त में धुँधले होते जाएँगे लेकिन इतिहास के पन्नों पर इनके कारनामे हमेशा दर्ज रहेंगे।



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