नरक चतुर्दशी पर इस मुहूर्त में करें हनुमान पूजा, सभी संकट हो जाएंगे दूर, नरक के भय से मिलेगी मुक्ति
Hanuman Janmotsav 2026: नरक चतुर्दशी, जिसे रूप चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, सनातन परंपरा में अत्यंत विशिष्ट स्थान रखती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि पर भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक असुर का संहार करके लोक को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसके साथ ही, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हनुमान जयंती (महोत्सव) के रूप में भी पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं नरक चतुर्दशी पर किस मुहूर्त में करें हनुमान पूजा...
हनुमान पूजा: 07 नवंबर शनिवार, 2026 को
हनुमान पूजा मुहूर्त: रात्रि 11:39 से देर रात्रि 12:31 तक।
नरक चतुर्दशी (काली चौदस): 07 नवंबर शनिवार, 2026 को
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 07 नवंबर, 2026 को सुबह 10:47 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 08 नवंबर, 2026 को सुबह 11:27 बजे
समस्त कष्टों का निवारण
श्री हनुमान जी की साधना करने से जीवन के समस्त दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्ति मिलती है, साथ ही अकाल मृत्यु और यमलोक का भय समाप्त होता है। हनुमान जी की कृपा से साधक के जीवन में आ रहे बड़े से बड़े संकट, भय, और मानसिक संताप दूर हो जाते हैं।
ग्रह दोषों से मुक्ति
यदि आपकी कुंडली में शनि की ढैया, साढ़ेसाती या राहु-केतु का अशुभ प्रभाव चल रहा है, तो इस तिथि पर की गई पूजा विशेष फलदायी सिद्ध होती है।
यम-भय और अकाल मृत्यु से सुरक्षा
पौराणिक विधान के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन श्री हनुमान जी की शरण ग्रहण करने से यमदेव का भय मिटता है और साधक को नरक के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
पूजन विधि
अभ्यंग स्नान व शुद्धि
सूर्योदय से पूर्व उबटन और तिल के तेल का प्रयोग करके स्नान करें, जो रूप चौदस का मूल विधान है।
पूजा का संकल्प
संध्या समय स्वच्छ एवं शुभ वस्त्र (लाल या पीले रंग के) धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा स्थान पर बैठें।
चौकी स्थापना
एक काष्ठ (लकड़ी) की चौकी पर नया लाल वस्त्र बिछाएं। उस पर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पास में ही भगवान श्री राम का चित्र अवश्य रखें, क्योंकि राम जी के बिना हनुमान जी का पूजन अधूरा माना जाता है।
दीपक एवं ज्योति प्रज्वलन
हनुमान जी के समक्ष चमेली के तेल या शुद्ध देसी गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
श्रृंगार व अर्पण
भगवान को लाल सिंदूर, चमेली का तेल, गंध, अक्षत और लाल कनेर या गुलाब के पुष्प अर्पित करें।
नैवेद्य (भोग)
हनुमान जी को अति प्रिय बूंदी के लड्डू, गुड़-चना या देसी घी से बना चूरमा अर्पित करें।
पाठ एवं मंत्र जाप
- हनुमान चालीसा का 7, 11 या 21 बार पाठ करें।
- बजरंग बाण और संकटमोचन हनुमानाष्टक का भक्तिभाव से गायन करें।
दक्षिण भारत के कुछ राज्यों के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी नरक चतुर्दशी को हनुमानजी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन का खास महत्व माना गया है। कहते हैं कि चैत्र पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में प्रातः 6:03 बजे हनुमानजी का जन्म एक गुफा में हुआ था। मतलब यह कि चैत्र माह में उनका जन्म हुआ था।
चैत्र पूर्णिमा या कार्तिक चतुर्दशी कब हुआ था हनुमान जी का जन्म
दरअसल, यह दोनों ही तिथियां हनुमान जी के जीवन में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन दोनों का महत्व अलग-अलग है: अधिकतर मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में हुआ था। यह तिथि उनके अवतरण दिवस के रूप में पूजी जाती है।
वहीं कार्तिक चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) इस दिन को उनका दूसरा जन्मोत्सव या विजय अभिनंदन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। कुछ दक्षिण भारतीय मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म इसी तिथि को हुआ था, जबकि एक अन्य कथा के अनुसार, माता सीता ने इसी दिन उन्हें अमरता का वरदान दिया था।
आरती व क्षमा प्रार्थना
अंत में आरती की बत्ती या कपूर से आरती उतारें और पूजा में हुई किसी भी अनजाने भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें।

