Hanuman Chalisa

बागियों और भीतरघात के डर से भाजपा परेशान, आधी रात को संघ की शरण में पहुंचे शिवराज

Updated: गुरुवार, 22 नवंबर 2018 (13:01 IST)
भोपाल। मध्यप्रदेश में दिलचस्प हो चुके चुनावी मुकाबले में चौथी बार सरकार बनाने के लिए अब भाजपा सरकार पूरी तरह संघ की शरण में जा पहुंची। इस बार के चुनाव में पार्टी को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर पार्टी का बूथ स्तर का कार्यकर्ता पार्टी में अपनी उपेक्षा के चलते नाराज चल रहा है तो दूसरी ओर पार्टी को पिछले तीन चुनावों में इस बार सबसे बड़ी संख्या में बागियों का सामना करना पड़ रहा है।

पूरे देश में भाजपा में मध्यप्रदेश की पहचान पार्टी के एक मजबूत कैडर बैस पार्टी के रूप में होती है। प्रदेश में मजबूत भाजपा के संगठन को रोल मॉडल की तरह देश के अन्य राज्यों में पेश किया जाता है लेकिन इस बार के चुनाव में पार्टी के यही बूथ स्तर के कैडर का अब तक का उदासीन रवैया पार्टी को बेचैन कर रहा है। भाजपा को पहले ही इस बात की भनक थी कि इस बार कांग्रेस से ज्यादा चुनौती उसको अपनी ही पार्टी से मिलेगी।

इसलिए चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने भोपाल सहित हर संभाग में अपने कैडर को दोबारा रिचार्ज करने के लिए कार्यकर्ता महाकुंभ और कार्यकर्ता सम्मेलन जैसे आयोजन किए, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और पीएम मोदी ने कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में सक्रिय करने की हरसंभव कोशिश की लेकिन अब जब वोटिंग में कुछ ही वक्त शेष बचा है तब पार्टी के कार्यकर्ताओं का सक्रिय न होना पार्टी के बड़े नेताओं में घबराहट पैदा कर रहा है।
ऐसी स्थिति में पार्टी एक बार फिर संघ की शरण में है। बुधवार रात करीब 12.30 बजे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल स्थित संघ के कार्यालय समिधा पहुंचे जहां उनकी संघ के बड़े नेताओं के साथ चर्चा हुई। सूत्र बताते हैं कि संघ लगातार भाजपा को ये फीडबैक दे रहा है कि पार्टी का बूथ कार्यकर्ता अब भी पार्टी से नाराज है। संघ ने पार्टी संगठन के कामकाज को लेकर भी जो रिपोर्ट दी है वो भी ठीक नहीं है।

चुनाव में पार्टी संगठन ने टिकट बंटवारे के बाद बागी होकर चुनाव मैदान में कूदने वाले नेताओं को मनाने की तो कोशिश की लेकिन संघ उम्मीदवारी की चाहत रखने वाले जो भले नेता बागी नहीं हुए उनकी तरफ पार्टी ने कोई ध्यान नहीं दिया। पार्टी संगठन ने अपने इन कर्मठ कार्यकर्ताओं को न तो पार्टी का काम करने और जनता से संपर्क के लिए न तो जिम्मा सौंपा न ही स्थानीय स्तर के पार्टी के बड़े नेताओं ने इन्हें सम्मान दिया।

अब चुनाव के वक्त इन कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता ने पार्टी के नेताओं के माथे पर पसीना ला दिया है। ऐसे हालत में पार्टी अब पूरी तरह संघ की शरण में आ गई है। देर रात संघ कार्यालय की संघ के नेताओं से बातचीत के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुहास भगत से पूरे प्रदेश में संगठन के बारे में चर्चा की।

बताया जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बागियों और बूथ के कार्यकर्ताओं को यहीं तरीके से हैंडल न करने पर पार्टी के प्रदेश संगठन से नाराजगी जाहिर की है। ऐसे में अब जब वोटिंग होने में पांच दिन से कम समय बचा है तो पार्टी पूरी तरह संघ के भरोसे है। वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में हिंदू-मुस्लिम की सियासत की एंट्री के बीच अब संघ ने भी मोर्चा संभाल लिया है, बूथ पर संघ के कार्यकर्ता सक्रिय नजर आने लगे हैं।
लेखक के बारे में
विशेष प्रतिनिधि
राजनीतिक, सामाजिक एवं समसामयिक मुद्दों पर देश के अलग-अलग हिस्सों से वेबदुनिया के विशेष प्रतिनिधियों की टीम प्रकाशन के लिए कंटेंट प्रेषित करती है। .... और पढ़ें

Show comments

अमीर बनने से पहले बूढ़ा हो जाएगा भारत! 2050 तक हर 5 में 1 भारतीय होगा 60 साल से ज्यादा उम्र का

राहुल गांधी ने कुत्तों पर जो कहा... क्या हम उस पर बात कर सकते हैं?

IRCTC की नई वेबसाइट हुई लाइव, टिकट बुकिंग से पहले करना होगा ये जरूरी काम, जानें पूरा तरीका

भारत में बढ़ रहा EV का क्रेज, खरीदने से पहले जानें इलेक्ट्रिक वाहनों के 4 प्रकार और इनके फायदे

सिर्फ कीमत नहीं, कार खरीदते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?

सभी देखें

मैं आज दर्द, डेटा और दौलत की बात करुंगा, चक्रव्यूह में फंसे हैं देश के छात्र, रील नशा है, छात्रों की गूंज में बोले राहुल गांधी

रांची छात्र आंदोलन: दूसरे दौर भी नहीं निकला बातचीत का कोई नतीजा, MLA जयराम महतो ने किया अनशन का ऐलान

मृतक राजा रघुवंशी के दोनों भाइयों को उठाकर पुलिस ने भेजा जेल, ढाबे पर कर रहे थे ये काम, पुलिस जांच में जुटी

प्रयागराज में राहुल गांधी की गूंज, छात्रों के बीच खोला रोजगार के '5 बंद दरवाजों' का सच

जापान के बाद 162 KMPH की रफ्तार से चीन की ओर बढ़ा टाइफून डॉल्फिन, चीन में अलर्ट, बंदरगाह, स्कूल बंद, उड़ानें रद्द

अगला लेख