मदर्स डे पर छोटी सी कविता : ईश्वरी माटी से गढ़ी मां


-बबीता कड़ाकिया

ईश्वरी माटी से गढ़ी मां
आपके कहे अनुसार मां को
चार पंक्तियों में समेट कर लाई हूं,
चारों दिशा, चारों धाम,
जन्नत की सैर कर आई हूं ,
ईश्वरीय अनुपम मिट्टी से गढ़ी
कायनात की अनोखी कृति मेरी ‘मां’
उसके चरणों तले, स्नेह से पगी हुई
हर पल जिए जा रही हूं ‘मैं’...

 

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