मध्य प्रदेश में BJP ने 41 जिला पंचायत अध्यक्ष पर जीत का किया दावा, कांग्रेस ने 10 को बताया अपना

Author विकास सिंह| पुनः संशोधित शुक्रवार, 29 जुलाई 2022 (17:38 IST)
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भोपाल। में हाईवोल्टेज सियासी ड्रामे के बीच हुए में भाजपा को बड़ी जीत हासिल हुई है। 51 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा ने 41 जिलों में अध्यक्ष बनाने का दावा किया है तो कांग्रेस ने 10 जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत का दावा किया है।


भाजपा ने 41 जीते अध्यक्षों को अपना बताया- 51 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा ने 41 जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत का दावा किया है। भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि पंचायत चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के एक दर्जन से अधिक दावेदार निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए।
भाजपा के दिग्गजों का दबदबा-जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेताओं के रिश्तेदार और उनके कट्टर समर्थक चुनाव जीते। सागर में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के भाई हीरा सिंह राजपूत, बड़वानी में कैबिनेट मंत्री प्रेम सिंह पटेल के बेटे बलवंत पटेल, टीकमगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की बहू उमिता सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीती। इसके साथ ही ग्वालियर ‌में उद्यानिकी मंत्री भारत सिंह कुशवाह की समर्थक दुर्गेश कुंवर सिंह जाटव और दतिया में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की समर्थक इंदिरा धीरू दांगी निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई है। वहीं भाजपा की दुर्गा विजय पाटीदार मन्दसौर जिला पंचायत अध्यक्ष पर, प्रभा मिश्रा शहडोल निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई है।
कांग्रेस ने 10 सीट पर जीत का किया दावा-वहीं कांग्रेस ने प्रदेश में 10 जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत का दावा किया। कांग्रेस ने छिंदवाड़ा, होशंगाबाद, डिंडोरी, देवास, झाबुआ, सिंगरौली, राजगढ़, अनूपपुर, बालाघाट और दमोह में जीत का दावा किया। वहीं कांग्रेस ने दावा किया कि बड़वानी में निर्दलीय प्रत्याशी कांग्रेस के समर्थन से चुनाव जीता है। वहीं कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि उमरिया और धार में कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों को चुनाव में
बराबर वोट मिले लेकिन ड्रॉ में कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव हार गए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट कर जीते हुए कांग्रेस के सभी जिला पंचायत अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को बधाई देते हुए कहा कि हमारे जो प्रत्याशी सत्ता के दुरुपयोग और छल से हरा दिए गए, उन्हें भी यह याद रखना चाहिए की जनता ने तो उन्हें ही चुना था, लेकिन अलोकतांत्रिक तरीके से उन्हें हराया गया है। इन चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य प्रदेश की जनता हर स्तर पर बदलाव के लिए तैयार है। 14 महीने बाद प्रदेश की जनता बड़ा बदलाव करने वाली है। उसके लिए कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता को अभी से कमर कस लेनी चाहिए।



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