मप्र में भाजपा, कांग्रेस बढ़ी, बसपा घटी
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इस प्रकार से जहां पांच वर्षों में कुल मतदाताओं की संख्या में एक करोड़ तीन लाख 64790 यानी 28.58 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, वहीं वोट डालने वालों की तादाद 77 लाख 22 हजार 430 यानी तीस फीसदी ज्यादा रही।
यदि पार्टियों को मिले वोटों पर नजर डाली जाए तो पाएंगे कि वर्ष 2008 में सत्तारुढ़ भाजपा को कुल मतों के 37.64 प्रतिशत यानी 94 लाख 93641 वोट मिले थे, जबकि इस चुनाव में उसे पिछले चुनाव की तुलना में 60 फीसदी ज्यादा यानी एक करोड़ 51 लाख 89894 मत प्राप्त हुए, जो इस बार के कुल मतों का 44.67 प्रतिशत है। भाजपा को कुल मतों के हिसाब से 7.23 प्रतिशत का लाभ हुआ है और उसकी सीटें भी पिछली बार की 143 की तुलना में 22 बढ़कर 165 हो गईं।
कुल मतों के हिसाब से देखा जाए तो उसे 36.38 प्रतिशत वोट मिले, जो पिछले चुनाव की तुलना में 3.99 फीसदी ज्यादा है। कांग्रेस को इस बार 58 सीटें मिलीं हैं। राज्य में तीसरी प्रभावशाली बहुजन समाज पार्टी का वोट प्रतिशत और वोट दोनों ही घटे हैं। बसपा को वर्ष 2008 के चुनाव में 22 लाख 62119 वोट मिले थे लेकिन इस चुनाव में उसके एक लाख 34160 वोट घट गए और उसे 21 लाख 27959 वोट प्राप्त हुए।
प्राप्त वोटों के हिसाब से बसपा को 5.93 प्रतिशत और कुल मतों के हिसाब से 2.68 प्रतिशत का नुकसान हुआ। बसपा को पिछले चुनाव में 8.97 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि इस बार उसे 6.29 प्रतिशत मत हासिल हुए है। बसपा की सीटें भी सात से घटकर चार रह गई हैं।
इस वर्ष चुनावों मे पहली बार मतदाताओं को उम्मीदवारों के साथ उपरोक्त में कोई नहीं (नोटा) का विकल्प दिया गया था। मध्यप्रदेश में करीब 1.99 प्रतिशत यानी छह लाख 43144 सीटों पर लोगों ने नोटा का इस्तेमाल करके तमाम उम्मीदवारों के समीकरण प्रभावित किए। लगभग दो दर्जन सीटों पर नोटा को मिले वोट हार-जीत के अंतर से अधिक रहे। (वार्ता)
