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गुलजार : रात के हाथों पर चांद की मिश्री

रविवार,अगस्त 18, 2019
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गुलमोहर, तुम्हारे इस तरह जाने के बाद भी शांत और स्थिर कुछ नहीं हुआ। सब बेचैन हैं, पीपल, नीम, आम और जर्जर चंदन सब खामोश ...
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औरत, महिला, स्त्री, नारी, खवातीन या वामा। पुकारने के लिए कई शब्द हैं, लेकिन महसूसने के लिए? कुछ भी नहीं, एक रिक्तता, ...
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जरात में घर-घर लोग पतंगबाजी का मजा लेते हैं। इस दिन पूरा परिवार घर की छत पर जमा हो जाता है। यदि आसमान से नीचे देखा जा ...
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दोस्ती एक ऐसा आकाश है जिसमें प्यार का चंद्र मुस्कुराता है, रिश्तों की गर्माहट का सूर्य जगमगाता है और खुशियों के नटखट ...
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इंदौर। इंदूर ने अपने नाम को सार्थक करते हुए हिंदी साहित्य जगत के दिव्यमान नक्षत्र 'डॉ. प्रभाकर माचवे जन्मशती' समारोह ...
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एक नन्हा सा दीप। नाजुक सी बाती। उसका शीतल सौम्य उजास। झिलमिलाती रोशनियों के बीच इस कोमल दीप का सौन्दर्य बरबस ही मन मोह ...
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कोर्ट फैसले के बाद मैं और मेरे जैसे बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं फिर तुम मरी कैसे? तुम्हें मारा किसने? फिल्म पर भरोसा ...
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इस बार मुझे मत जलाइए : रावण

गुरुवार,सितम्बर 28, 2017
मेरी मृत्यु को नौ लाख वर्ष हो गए हैं। इतनी सुदीर्घ अवधि पश्चात भी लग रहा है जैसे मेरा निर्वाण अभी कल ही की बात है, ...
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इस मोहक मनभावन त्योहार पर इस बार बांधें कुछ ऐसी राखियों को जो हर भाई-बहन के जीवन जीने का अंदाज बदल दें.... यह राखी ...
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'काश होती मैं एक चिड़िया...! जैसे उड़ आई बाबुल के आंगन से फिर उड़ जाती... ...और बैठ जाती माटी की अनगढ़ लाल मुंडेर ...
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एक बार फिर से जगत जननी मां दुर्गा के लिए कुछ लिखूं ऐसा दिल किया। क्यूंकि जब जब नवरात्रियां आती है, चिंतन-मनन, ध्यान, ...
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अम्माजी आतीं, चोंच में दाने समेटतीं और चूजों को दाना खिलातीं, उसे चोंच में भरकर पानी ले जाते भी हमने यह चोंचलेबाजी ...
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वसंत के आगमन पर वृक्षों की पत्तियां, इस मौसम के अभिवादन के लिए जमीन पर बिछ जाती हैं। वहीं टेसू के फूल भी खिलने लगते ...
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बच्चों का आपस में जो रिश्ता होता है, वह चाहे जैसा भी हो, लेकिन उन रिश्तों में कभी नकारात्मकता नहीं होती। वे जब एक-दूसरे ...
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जिन चीज़ों के लिए महीनों का इंतज़ार किया जाता था, अब वे सभी चीजें दैनिक जि़ंदगी का हिस्सा बनकर रह गईं हैं। उत्सुकता को ...
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बारिश की हल्की फुहारों से मौसम का आगाज़। बारिश का मौसम कभी रोमांस, प्रेमी युगल की दूरियों के एहसास से जुड़ा होता है, तो ...
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अरविंद वह तुम ही थे जिसमें अचानक युवा वर्ग की दिलचस्पी बढ़ी थी। अच्छा लगता था जब तुम अन्ना के कान में कुछ फुसफुसाने आते ...
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हम अनंतकाल से परंपरास्वरूप दीपोत्सव को मना रहे हैं। प्रतीकस्वरूप दीपमालाएं प्रज्वलित कर बाह्य जगत के तमस को मिटाने की ...
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दीये की पाती ज्योति के नाम

गुरुवार,अक्टूबर 9, 2014
प्रिय ज्योति, रिश्ते कभी टूटते नहीं हैं, जो रिश्ते टूट जाते हैं वो रिश्ते, रिश्ते नहीं है। इस पावन ज्योति पर्व से अपना ...
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