बैंक हड़ताल से पहले अलर्ट पर सरकार: 28-30 सितंबर तक देशव्यापी हड़ताल का खतरा, ATM और बैंकिंग सेवाओं की सुरक्षा पर बड़ा निर्देश
यदि आपका भी बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम, चेक क्लियरिंग या नकदी निकालने की योजना है, तो इसे तुरंत निपटा लें। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल से ठीक पहले केंद्र सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है।
हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाओं के ठप होने और महत्वपूर्ण वित्तीय परिसंपत्तियों (Financial Assets) की सुरक्षा को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से बैंकों और उनसे जुड़ी महत्वपूर्ण संस्थाओं के आसपास सुरक्षा कड़ी करने का अनुरोध किया है। ALSO READ: बैंक कर्मचारियों की 3 दिन की हड़ताल का ऐलान: किन मांगों पर अड़े हैं कर्मचारी, क्या होगा असर?
1. ATM, डेटा सेंटर और काम करने वाले कर्मचारियों को मिलेगी सुरक्षा
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने गृह मंत्रालय को एक आधिकारिक ज्ञापन जारी कर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देने को कहा है।
अतिरिक्त सुरक्षा के कड़े इंतजाम: मुद्रा तिजोरियों (Currency Chests), चेक क्लियरिंग सेंटरों, डेटा सेंटरों, डेटा रिकवरी सेंटरों, ट्रेजरी संचालन, आईटी सेंटरों, साइबर सुरक्षा प्रकोष्ठ (Cyber Security Cells) और ATM के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने का अनुरोध किया गया है।
काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा: हड़ताल में शामिल न होने वाले और काम पर आने वाले बैंक कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने की बात कही गई है।
खुफिया रिपोर्ट साझा करने की मांग: ज्ञापन में गृह मंत्रालय से राज्यों की विशेष खुफिया रिपोर्ट DFS के साथ साझा करने को कहा गया है, ताकि स्थिति की निगरानी और बैंकिंग सेवाओं का संचालन बना रहे।
2. 30 सितंबर का संकट: छमाही क्लोजिंग पर पड़ेगा सीधा असर
यह प्रस्तावित हड़ताल 30 सितंबर को खत्म होगी। 30 सितंबर बैंकों के छमाही वित्तीय लेखा बंद (Half-Yearly Financial Closing) होने का दिन है। हड़ताल के कारण बैंकों के वित्तीय खातों के मिलान (Reconciliation) और रिपोर्टिंग का काम बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे वित्तीय लेनदेन और कॉर्पोरेट बैंकिंग पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। ALSO READ: बैंक हड़ताल से पहले बड़ी राहत! इस रविवार को खुले रहेंगे सभी सरकारी और ग्रामीण बैंक
3. आखिर क्यों हड़ताल पर अड़े हैं बैंक कर्मचारी?
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU), जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं दिखता, हड़ताल वापस नहीं होगी।
यूनियनों की मुख्य मांगें:
5 डे बैंकिंग (5-Day Work Week): हफ्ते में 5 दिन काम की मांग सबसे प्रमुख है।
पेंशन में सुधार: पुरानी पेंशन योजना को लागू करने और पेंशन अपडेशन की मांग।
समान DA फार्मूला: महंगाई भत्ते के लिए एक समान फार्मूला लागू करना।
NPS से OPS का विकल्प: राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प देना।
ध्यान दें: इससे पहले 11 सितंबर की एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल से पूर्व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय मजदूर संघ (BMS) के बीच बैठक हुई थी, जिसमें प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना (Performance-Linked Incentive) को तो रोक दिया गया था, लेकिन 5-डे बैंकिंग पर कोई ठोस फैसला नहीं हो सका।
4. सरकार की अपील और आगे का रास्ता
22 सितंबर को हुई सुलह बैठक में DFS और वित्त मंत्रालय ने UFBU से हड़ताल टालने की अपील की। सरकार ने कहा कि कर्मचारियों से जुड़ी मांगों पर काम चल रहा है और 3 दिन की हड़ताल से आम जनता को भारी परेशानी होगी।
यूनियनों ने संकेत दिया है कि यदि सरकार 5-डे बैंकिंग लागू करने की दिशा में कोई ठोस और सकारात्मक पहल करती है, तो वे हड़ताल के अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

