कोरोना के कहर से मुक्त हो रही है भारतीय अर्थव्यवस्था, 10 बातें जो दे रही हैं सकारात्मक संकेत...

नृपेंद्र गुप्ता| Last Updated: शनिवार, 10 अक्टूबर 2020 (13:53 IST)
नई दिल्ली। भारत में के नए मामले तेजी से कम हो रहे हैं वहीं कोरोना से ठीक हो रहे लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्‍था भी कोरोना के कहर से मुक्त होती दिखाई रही है। हालांकि अभी यह जंग खत्म नहीं हुई है और लड़ाई लंबी चलेगी... 10 बातें जो दे रही है सफलता के संकेत...
GDP में सुधार के संकेत : रिजर्व बैंक के प्रमुख शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि तीसरी तिमाही से ही सुधार देखने को मिल सकता है। लोग एक बार फिर इन्वेस्ट कर रहे हैं। कृषि, प्रॉपर्टी, मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग, बिजली, फाइनेंस सेक्टरों में लोगों की हलचल बढ़ती दिखाई दे रही है। बीमा के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
बेहतर मानसून : कोरोना संकट के बीच बेहतर मानसून ने लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी है। बेहतर बारिश से किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद है। अगर किसानों के पास पैसा आएगा तो वह बाजार खरीदी के लिए आएगा। इस साल रिकॉर्ड 30 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है। व्यापारियों का भी मानना है कि जब पैसा बाजार में आएगा तो सभी की स्थिति पर इसका सकारात्मक असर होगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार : आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि हाल में आए आर्थिक आंकड़ों से अच्छे संकेत मिल रहे हैं। वैश्‍विक अर्थव्यवस्था में रिकवरी के मजबूत संकेत मिल रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल बिक्री में कई देशों में रिकवरी दिखी है। अर्थव्यवस्था में सुधार से रोजगार भी बढ़ेगा।
बाजारों का खुलना : कोरोना लॉकडाउन के बाद देशभर में बाजार अब खुल गए हैं। बाजार खुलने से लोग अब खरीदी करने भी आ रहे हैं। हालांकि लोग अभी वही सामान खरीद रहे हैं जो बेहद जरूरी है। लेकिन बाजार में पैसा आने से स्थिति में सुधार देखा जा रहा है। अर्थव्यवस्था पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ता दिखाई दे रहा है।

मांग और उत्पादन का बढ़ना : जैसे-जैसे लोग घरों से निकल रहे हैं। बाजार में वस्तुओं की मांग भी बढ़ रही है। आयात और निर्यात भी बढ़ने लगा है। मांग बढ़ने से उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। ई-वे बिल बढ़ रहे हैं और बिजली खपत बेहतर हुई है। ट्रांसपोर्टेशन बढ़ने से टोल संग्रह भी बढ़ा है। कुल मिलाकर स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है।

प्रवासी मजदूर : कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा 32.49 लाख मजदूर उत्तर प्रदेश और 15 लाख मजदूर बिहार लौट गए। इन लोगों का मानना था कि अब घर से ही कुछ नया करेंगे। इसमें उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। लॉकडाउन खत्म होने के साथ ही ये प्रवासी मजदूर भी अब काम पर लौटने लगे हैं। इससे कंपनियों का प्रोडक्शन बढ़ने लगा हैं।

सरकारी मदद : कोरोना लॉकडाउन में जब व्यापार-व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया था तब सरकार ने आर्थिक पैकेज जारी कर लोगों की आर्थिक मदद की। किसानों, रेहड़ी वालों, छोटे व्यापारियों को इसका बड़ा फायदा मिला और वे एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े हो सके। साथ ही लोगों को बैंक लोन की किश्तों में राहत देने का भी फैसला किया। लाखों लोगों ने मोरेटोरियम का फायदा उठाया।
घरेलू खपत आधारित अर्थव्यवस्था : भारत एक घरेलू खपत आधारित अर्थव्यवस्था है। यहां जितना उत्पादन है, उतनी ही खपत है। जैसे-जैसे मांग बढ़ेगी, उत्पादन भी बढ़ेगी और इससे अर्थव्यवस्‍था भी जल्द ही पटरी पर लौट आएगी।

प्रॉपर्टी के प्रति बढ़ा रुझान : कोरोना काल में प्रॉपर्टी सेक्टर लोगों की चिंता का सबब बना हुआ था। जैसे ही लॉकडाउन खत्म हुआ लोगों का रुझान बढ़ गया। इस क्वार्टर में आवास की बिक्री 34 प्रतिशत बढ़ी है। लोग अपार्टमेंट में बने-बनाए मकान खरीद रहे हैं। रिजर्व बैंक भी बैंकों को होम लोन देने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
महंगाई : रिकॉर्ड उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इससे फल, सब्जी और अनाज जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम नियंत्रित रहेंगे। अगर महंगाई नहीं बढ़ती है तो लोगों ज्यादा सामान खरीदेंगे या फिर निवेश करेंगे। इससे आर्थिक विकास भी पटरी पर लौटेगा।



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