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धरती के भीतर मिला महासागरों से भी बड़ा छिपा हुआ जल भंडार, वैज्ञानिकों की खोज ने चौंकाया

Updated: बुधवार, 8 जुलाई 2026 (16:44 IST)
वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की सतह से सैकड़ों किलोमीटर नीचे एक विशाल जल भंडार की खोज की है, जो आकार में पृथ्वी के सभी महासागरों के कुल पानी से भी लगभग तीन गुना बड़ा हो सकता है। यह खोज पृथ्वी के भीतर पानी के चक्र और इसकी उत्पत्ति को समझने के नजरिए से एक क्रांतिकारी बदलाव है। हिंदू पुराणों में इस जलराशि का जिक्र मिलता है। इस छिपे हुए महासागर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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यह कहाँ स्थित है?

यह पानी पृथ्वी की सतह पर बहने वाले समंदरों की तरह नहीं है। यह ज़मीन से लगभग 660 किलोमीटर (410 मील) नीचे, पृथ्वी की मेंटल (Mantel) परत के 'ट्रांज़िशन ज़ोन' (Transition Zone) में छिपा हुआ है।
 

यह पानी किस रूप में है?

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पानी तरल (Liquid) रूप में, बर्फ (Ice) के रूप में या भाप (Vapor) के रूप में नहीं है। बल्कि यह 'रिंगवूडाइट' (Ringwoodite) नाम के एक नीले रंग के चट्टानी खनिज के भीतर आणविक स्तर (Molecular Level) पर फंसा हुआ है। रिंगवूडाइट एक स्पंज की तरह काम करता है, जो अपने भीतर पानी को सोखकर रखने की अद्भुत क्षमता रखता है।
 

यह खोज कैसे हुई?

इलिनोइस के नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक स्टीव जैकबसेन और उनकी टीम ने इस बात का पता लगाया। इसके लिए उन्होंने:
 
 

इस खोज का महत्व क्या है?

यह खोज इस पुराने सिद्धांत को मज़बूती देती है कि पृथ्वी पर पानी अंतरिक्ष से धूमकेतुओं (Comets) या उल्कापिंडों के टकराने से नहीं आया, बल्कि यह पृथ्वी के गर्भ से ही धीरे-धीरे सतह पर बाहर निकला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह पानी रिंगवूडाइट चट्टानों के भीतर न फंसा होता और किसी तरह पृथ्वी की सतह पर आ जाए, तो दुनिया के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ भी पानी में डूब जाएंगे और धरती पर सिर्फ समंदर ही नजर आएगा।
 

यह खोज कब हुई थी?

पृथ्वी के नीचे छिपे इस विशाल महासागर (जल भंडार) की खोज मुख्य रूप से वर्ष 2014 में हुई थी। इस खोज से जुड़ी वैज्ञानिक रिपोर्ट 13 जून 2014 को प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका 'साइंस' (Journal Science) में प्रकाशित की गई थी। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के भू-भौतिकविद (Geophysicist) स्टीव जैकबसेन और उनकी टीम ने सालों के शोध और भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद इस साल दुनिया के सामने यह क्रांतिकारी जानकारी रखी थी।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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