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हिंदी कविता : कटते जाते ढेर पेड़ क्यों ?

Updated: शुक्रवार, 7 जून 2024 (18:53 IST)
आखिर पर्वत क्या होते हैं,
चट्टानों मिटटी के लौंदे।
कई टोकने रखे गए हों,
तिरछे आड़े,औंधे-औंधे।
 
पेड़ लगे रहते पर्वत पर,
फैली रहती है हरियाली।
दिखते कहीं निकुंज घने से,
कहीं जगह होती है खाली।
कहीं मकोई दिखती फूली,
हंसते दिखते कहीं करोंदे।
 
पेड़ लगे होने से होता,
जल बहाव में बड़ा नियंत्रण।
पेड़ न हों तो जल की धारा,
करती तहस नहस जन जीवन।
कटते जाते ढेर पेड़ क्यों ?
प्रश्न आज फिर मन में कौंधे।
 
पेड़ों की डालों कोटर में,
पंछी अपने नीड़ बनाते।
हंसते-हंसते सारा जीवन,
मस्ती में वे यहीं बिताते।
यहीं कहीं हिंसक पशुओं के,
भी होते हैं बने घरोंदे। 
 
पर्वत पेड़ों की रखवाली,
नहीं रहा क्या धर्म हमारा !
हमने बंगले महल बनाये,
पर्वत जंगल छांटा सारा।
पेड़ बचने की मुहीम में,
सिद्ध हुए सब पंडित, पोंगे।
 
(यहां पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
 
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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