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करवा चौथ पर छलनी से चांद और पति को क्यों देखती हैं महिलाएं? जानें इस परंपरा का रहस्य

Karva chauth chand
क्या आप जानते हैं कि करवा चौथ के इस पावन अवसर पर छलनी से चांद को देखने के बाद पति को क्यों देखा जाता है। इस परंपरा के पीछे क्या कारण छुपा है? आज हम आपको बताने जा रहे हैं छलनी के पीछे इस राज के बारे में, जो शायद अब तक किसी को भी नहीं पता है। इस बार करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार के दिन मनाया जाएगा।
 

1. पौराणिक कथा (वीरवती की कहानी)

पौराणिक कथा के अनुसार, वीरवती नाम की एक पतिव्रता स्त्री ने करवा चौथ का व्रत रखा था। भूख-प्यास से उसकी हालत बिगड़ती देख उसके भाइयों ने दूर पहाड़ी पर एक दीपक जलाया और छलनी के पीछे रखकर वीरवती से कहा कि चांद निकल आया है। वीरवती ने छलनी से दीपक को चांद मानकर अर्घ्य दे दिया और व्रत तोड़ लिया। गलत तरीके से व्रत तोड़ने के कारण उसके पति की मृत्यु हो गई। जब उसे अपनी भूल का अहसास हुआ, तो उसने दोबारा माता करवा की पूजा की और फिर सच्चा चांद देखकर व्रत खोला, जिससे उसके पति को पुनर्जीवन मिला। इसीलिए छलनी से चांद को खुद देखकर पूरी तरह आश्वस्त हुआ जाता है कि यह असली चंद्रमा ही है।
 

2. बुरी नजर से रक्षा (सुरक्षा का प्रतीक)

ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार, छलनी के सैकड़ों छेदों से जब चांद को देखा जाता है, तो उससे निकलने वाली किरणें छनकर आती हैं। यह माना जाता है कि छलनी से अपने पति को देखने पर पत्नी के मन का प्रेम और सकारात्मकता ही पति तक पहुंचती है और किसी भी तरह की बुरी नजर, नकारात्मक ऊर्जा या दोष दूर रहता है।
 

3. चंद्रमा और मन का संबंध

शास्त्रों में चंद्रमा को मन और शीतलता का कारक माना गया है। छलनी से पहले चंद्रमा के दर्शन कर उसकी शुभ ऊर्जा को आत्मसात किया जाता है, फिर उसी छलनी से पति को देखकर यह प्रार्थना की जाती है कि उनका संबंध चंद्रमा की तरह सुंदर, शीतल और अटूट बना रहे।
 
इसलिए छलनी के जरिए बहुत ही बारीकी से चंद्रमा को देखकर व्रत खोला जाता है। वहीं छलनी से चांद को देखने के बाद पति को देखने से उसकी उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुखी रहता है।
 
 
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