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Hanuman jayanti: तमिलनाडु में कब मनाएंगे हनुमान जयंती, जानिए महत्व

Written By WD Feature Desk
Updated: गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 (16:16 IST)
Hanuman jayanti 2025: उत्तर भारत में चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाते हैं लेकिन तमिलनाडु में मार्गशीर्ष अमावस्या के समय मनायी जाती है जिसे हनुमथ जयन्थी कहते हैं। अधिकांशतः मार्गशीर्ष अमावस्या और मूल नक्षत्र साथ में आते हैं। यह माना जाता है कि भगवान हनुमथ का जन्म मार्गशीर्ष अमावस्या पर, मूल नक्षत्र में हुआ था। ग्रेगोरियन कैलेण्डर में तमिल हनुमथ जयन्ती जनवरी अथवा दिसम्बर के माह में आती है। साल 2025 में तमिलनाडु में हनुमान जयंती 19 दिसंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। तमिल कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष मास चल रहा है जबकि उत्तर भारतीय कैलेंडर के अनुसार पौष मास चल रहा है। 
 
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 19 दिसंबर 2025 को सुबह 04:59 बजे।
अमावस्या तिथि समाप्त: 20 दिसंबर 2025 को सुबह 07:12 बजे।
 
तमिलनाडु में हनुमान जयंती का महत्व:-
तमिलनाडु में इस उत्सव का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। तमिलनाडु के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों, जैसे नमक्कल अंजनेयर मंदिर और नंगनल्लूर आंजनेयर मंदिर में इस दिन भव्य आयोजन होते हैं।
 
1. मार्गाझी और मूलम नक्षत्र: तमिल मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को मूलम नक्षत्र में हुआ था। इसलिए यहाँ चैत्र पूर्णिमा (जो उत्तर भारत में प्रचलित है) के बजाय इस दिन को विशेष माना जाता है।
 
2. संकटमोचन स्वरूप: इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट, रोग और शत्रुओं का नाश होता है। भक्त उन्हें साहस और मानसिक शक्ति का प्रतीक मानते हैं।
 
3. विशेष भोग (वड़ाई माला): तमिलनाडु में हनुमान जी को 'वड़ाई' (दाल के बड़े) की माला चढ़ाने की विशेष परंपरा है। माना जाता है कि इससे राहु के दोष शांत होते हैं। इसके अलावा उन्हें 'वेनाई काप्पू' (मक्खन का लेप) भी लगाया जाता है।
 
4. शनि और राहु से मुक्ति: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, हनुमान जी की उपासना करने से शनि की साढ़ेसाती और राहु-केतु के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
 
हनुमान जयंती:
1. चैत्र शुक्ल पूर्णिमा
2. कार्तिक कृष्‍ण चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी)
3. मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी से अमावस्या तक। (तमिल कैलेंडर अनुसार)
4. ज्येष्ठ माह की दशमी  (तेलगु कैलेंडर अनुसार)
 
भक्तगण अपनी स्थानीय मान्यताओं एवं कैलेण्डर के आधार पर वर्ष में भिन्न-भिन्न समय पर हनुमान जयंती मानते हैं। कन्नड़ में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को और आंध्र, तेलंगाना या तेलुगु में हनुमान जन्म उत्सव ज्येष्ठ माह की दशमी को मनाया जाता है। कुछ लोग मानते हैं कि नरक चतुर्दश के दिन उनका जन्म हुआ था। हालांकि उत्तर भारतीय राज्यों में चैत्र पूर्णिमा की हनुमत जयंती सर्वाधिक लोकप्रिय है। 
 
आन्ध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में, हनुमान जयन्ती 41 दिनों तक मनायी जाती है, जो चैत्र पूर्णिमा से प्रारम्भ होती है तथा वैशाख माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दसवें दिन समाप्त होती है। आन्ध्र प्रदेश में भक्त चैत्र पूर्णिमा पर 41 दिनों की दीक्षा आरम्भ करते हैं तथा हनुमान जयन्ती के दिन इसका समापन करते हैं। कई लोग इसे श्री हनुमानजी के जन्म के रूप में मनाते हैं। हालांकि यह भी कहते हैं कि आंध्र, तेलंगाना या तेलुगु जैसे दक्षिणी क्षेत्रों में, हनुमान जयंती उस दिन के उपलक्ष्य में मनाई जाती है जब भगवान हनुमानजी भगवान राम से मिले थे। कुछ लोग मानते हैं कि इस दिन हनुमानजी ने सूर्य को फल समझकर निकल लिया था।
 
प्रत्येक जयंती समय का महत्व अलग अलग है। हनुमान जी अपने भक्तों के लिए वे प्रेरणा, सुरक्षा, आदर्श और मार्गदर्शक होने के साथ-साथ एक सुलभ देवता भी हैं। वे भक्ति, शक्ति, विनम्रता, बुद्धि और सहजता जैसे अनगिनत गुणों के सागर हैं। यही कारण है कि वे सभी के प्रिय और पूजनीय हैं, और उन्हें सदैव "सबके प्रिय" के रूप में जाना जाता है। प्रभु श्रीराम के परम भक्त पवनपुत्र हनुमान का जन्मोत्सव उनके भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
 

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