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तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

Updated: शनिवार, 8 अगस्त 2026 (14:20 IST)
Three Party Mecca Summit: मध्यपूर्व में चल रहे तनावों के बीच, तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक ऐसे सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार उनमें से किसी भी देश पर हमले को तीनों सहयोगी देशों पर हमला माना जाएगा।
 
फ़ारस की खाड़ी वाले क्षेत्र में बढ़ते हुए तनाव के बीच, परमाणु हथियार वाले देश पाकिस्तान, नाटो के सदस्य तुर्की और सऊदी अरब के बीच इस आकस्मिक सैन्य सैमझौते से नाटो के यूरोपीय देश भी चकित हैं। इन तीनों देशों के बयानों के अनुसार, सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने सऊदी शहर मक्का में एक बैठक के दौरान इस "मक्का प्रतिरक्षा समझौते" को अंतिम रूप दिया। ALSO READ: ईरान से युद्ध पर अमेरिका 37.5 अरब डॉलर फूंक चुका, 67 अरब डॉलर और चाहिए

समझौते का उद्देश्य़

समझौते का उद्देश्य पारस्परिक सुरक्षा हितों को मज़बूत करना और अपनी प्रतिरोध क्षमता बढ़ाना बताया गया है। इस समझौते के अधीन, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमले को तीनों सहयोगी देशों पर हमला माना जाएगा। बयानों के अनुसार, यह समझौता तीनों हस्तारक्षरकर्ता देशों के साझे सुरक्षा हितों को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
 
बयानों में इस बात पर बल दिया जा रहा है कि इस गठजोड़ का मुख्य उद्देश्य "किसी भी हमले के खिलाफ मिलकर उसे रोकने की अपनी साझी क्षमता" को मज़बूत करना है। किंतु, समझौते की शर्तों या हमले की स्थिति में आपसी मदद के तौर-तरीके के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। ALSO READ: ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की HIT लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से ही समझौता है

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच, सितंबर 2025 से ही पारस्परिक रक्षा का एक समझौता लागू है; पाकिस्तानी सैनिक और उसके कई लड़ाकू विमान पहले से ही सऊदी अरब में तैनात हैं। 
 
जर्मन प्रेस एजेंसी (dpa) ने पाकिस्तानी सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि यह नया समझौता मुख्य रूप से तुर्की द्वारा सऊदी अरब और पाकिस्तान को तकनीकी ज्ञान के हस्तांतरण, गोपनीय जानकारी के आदान-प्रदान और सऊदी अरब में हवाई प्रतिरक्षा की क्षमताएं विकसित करने पर केंद्रित है। इसके अलावा, तुर्की के रक्षा उद्योग में सऊदी अरब की ओर से निवेश की भी संभावना है।

पाकिस्तान और सऊदी अरब पर असर

मक्का में तीनों देशों तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब का शिखर सम्मेलन एक ऐसे समय में हुआ है, जब पड़ोस में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को सुलझाने के प्रयास चल रहे हैं।
 
पाकिस्तान बिचौलिाया बन कर दोनों पक्षों को अपनी बातचीत फिर से शुरू करने के लिए मनाने में लगा है। सऊदी सेना और वहां के सरकारी सूत्रों की ओर से यह संकेत मिला बताय़ा जा रहा है कि ईरान-अमेरिका टकराव—और मध्यपूर्व सहित पूरी दुनिया पर पड़ रहा उसका असर— ठीक इस समय मक्का में यह त्रिपक्षीय समझौता होने का एक मुख्य कारण है। ALSO READ: ईरान से युद्ध के कारण अमेरिका में अस्त्र-शस्त्र की तंगी

सऊदी अरब की मुख्य परेशानी

सऊदी अरब की ओर से बताया गया कि यमन के हूथी मिलिशिया के हमलों में सऊदी अरब के कुछ लोग घायल हुए हैं। मीडिया की ओर से लगातार आ रही खबरों से पता चला है कि इराकी मिलिशिया तथा यमनी हूथी लड़ाके मिलकर सऊदी अरब पर नए हमले करने की तैयारी कर रहे थे; इन दोनों गुटों को ईरान का सहयोगी माना जाता है। 
 
जर्मन प्रेस एजेंसी (dpa) का पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहना है कि मक्का में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए इस समझौते का इरादा ईरान के खिलाफ कोई खास रोक-टोक लगाना नहीं है। इन सूत्रों ने जर्मन प्रेस एजेंसी से यह भी कहा कि यह त्रिपक्षीय समझौता तभी रंग लाएगा, जब अमेरिका इस क्षेत्र से हट जाएगा और सऊदी अरब को इज़राइल की तरफ से तनाव बढ़ने का खतरा महसूस नहीं होगा।
 
सऊदी अरब के पास तेल ओर पैसा तो अकूत है, पर उसे लड़ना-भिड़ना और अपना बचाव स्वयं करना नहीं आता। 1982 के एक समझौते के अधीन, लड़ने-भिड़ने के लिए वहां इस समय लगभग 2600 पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि सितंबर 2025 में हुए एक नए द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते के बाद, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाकर लगभग 8000 कर दी है। साथ ही वहां कई लड़ाकू विमान, ड्रोन और एक हवाई रक्षा प्रणाली भी तैनात की है। मक्का में हुए समझौते से वास्तव में तु्र्की के तानाशाह राष्ट्रपति एर्दोआन को सबसे अधिक राजनीतिक लाभ मिलेगा। वे लंबे समय से इस्लामी जगत का खलीफा बनने का सपना देख रहे हैं।
लेखक के बारे में
राम यादव
राम यादव डायचे वेले हिन्दी (जर्मनी) के पूर्व प्रमुख हैं। देश-विदेश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम पर इनकी अच्छी पकड़ है। आधी सदी से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। .... और पढ़ें

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