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ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

Donald Trump
Iran assassination plot: गत 7 और 8 जुलाई को तुर्किये की राजधानी अंकारा में जब अमेरिका और यूरोप के "उत्तर अटलांटिक संधि संगठन" नाटो (NATO) का शिखर सम्मेलन चल रहा था, तब एक ऐसी महा भयावह घटना होते बाल-बाल रह गई, जो अन्यथा तीसरे विश्वयुद्ध का बिगुल बजा देती।
 
ईरान उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की हत्या की ताक में था। भौगोलिक दूरी की दृष्टि से वे ईरान के जितने निकट उस समय थे, उतने शायद फिर कभी नहीं होते।
 
इसराइली टेलीविज़न चैनल 13 की एक रिपोर्ट में, सीनियर सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ट्रंप की हत्या की कोशिश के संकेत मिलने पर, इसराइल द्वारा इसकी गोपनीय जानकारी तुरंत अमेरिका को दे दी गई। जानकारी में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी का यह उद्धरण भी शामिल था: "यह हमारा मौका है, इससे बेहतर कोई मौका नहीं मिलेगा।" यह कथन साफ़ तौर पर ट्रंप के तुर्की में होने से संबंधित था।

मोसाद ने अमेरिका को सजग किया

चैनल 13 की बताई रिपोर्ट के अनुसार, इस जानकारी में शामिल पश्चिमी गुप्तचर सेवाओं की पहचान इसराइल की गुप्तचर एजेंसी मोसाद के तौर पर हुई है। समझा जाता है कि ईरान के किसी संभावित षड़यंत्र का शिकार बनने से बचने के लिए ही ट्रंप ने अंकारा से अमेरिका वापस जाने के लिए अपना विमान अकस्मात बदल दिया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा— ट्रंप अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के समापन के बाद— क़तर से मिले अपने निजी नए विमान के बदले अपने पुराने सरकारी "एयर फ़ोर्स वन" से स्वदेश लौटे। ALSO READ: अमेरिका और ईरान युद्ध दोबारा भड़का तो क्या होगा?
 
न्यूयॉर्क टाइम्स ने जिन स्रोतों का उल्लेख किया है, उनसे पता चलता है कि यह आकस्मिक निर्णय अमेरिकी "सीक्रेट सर्विस" की तरफ़ से सावधानी के तौर पर मिले एक खास "सुरक्षा परामर्श" के बाद लिया गया था; शुरू में इसे किसी खास ख़तरे से नहीं जोड़ा गया था।
 
लेकिन, बाद की रिपोर्टों ने इस निर्णय को "ईरानी षड़यंत्र" के बारे में मिली गुप्तचर जानकारियों से जोड़ा। यह भी कहा गया कि क़तर से ट्रंप को जो विमान उपहार में मिला है, उसमें अभी उनके मूल आधिकारिक विमान "एयर फ़ोर्स वन" जैसी सभी आवश्यक सुरक्षा सुविधाएं और क्षमताएं नहीं हैं।

अंकारा से उड़ान को अजीब बताया गया

कहा जा रहा है कि ट्रंप अपने पुराने विमान में बहुत जल्दी से चढ़ गए, इससे पहले कि उनके साथ के पत्रकार उन्हें सीढ़ियां चढ़ते हुए देख पाते या उनके फ़ोटो ले पाते। उन्होंने जो उतावली दिखाई, वह स्थापित परिपाटी से अलग थी।
 
इसराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने अमेरिकी टेलीविज़न चैनल "फॉक्स न्यूज़" को दिए एक इंटरव्यू में इन रिपोर्टों की पुष्टि की और कहा, "इसराइली गुप्तचर सेवा ने ट्रंप और उनके प्रसाशन को एक बहुत ख़ास हत्या की कोशिश के बारे में जानकारी दी थी, जिसे ईरानियों ने राष्ट्रपति के खिलाफ रची थी।"  ALSO READ: ईरान से युद्ध के कारण अमेरिका में अस्त्र-शस्त्र की तंगी

ट्रंप ने कहा, "मैं थोड़ा भाग्यवान रहा हूं"

ट्रंप ने नाटो के शिखर सम्मेलन में भी इस सारे प्रकरण का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए कहा था: "वे (ईरानी) US लीडर को, मुझे, ख़त्म करना चाहते हैं। मैं हर लिस्ट में हूं। मैं उनकी हर एक लिस्ट में हूं, और अब तक मुझे लगता है कि मैं थोड़ा भाग्यवान रहा हूं, लेकिन शायद यह ज़्यादा दिन नहीं चलेगा, क्योंकि ऐसा ही होता है।"
 
इस बीच, ईरान के एक अख़बार "हमशहरी" ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिश मेर्त्स सहित पश्चिमी देशों के कई शीर्ष नेताओं से बदला लेने की धमकी दी है। कुछ जर्मन नेता इस धमकी पर चिंता जताते हुए ईरानी राजनयिक प्रतिनिधियों को देश से बाहर निकाल देने की मांग कर रहे हैं। इस मांग में सत्तरूढ़ गंठबंधन की तीनों पार्टियों सहित, सरकार की अन्यथा मुखर आलोचक, पर्यावरणवादी ग्रीन पार्टी भी शामिल है।

मुल्ला शासन की कट्टरपंथी विचारधारा और आतंक

जर्मनी के सत्तरूढ़ गबंधन की मुख्य पार्टी "क्रिश्चन डेमोक्रैटिक यूनियन" के एक नेता रोडेरिश कीज़वेटर ने अख़बार "हांडेल्सब्लाट" से कहा, "मेरा मानना है कि यह आतंकी शासन काफी समय से पश्चिम में—और विशेषकर जर्मनी में—लक्ष्यबद्ध हत्याओं और आतंकी हमलों की योजना बना रहा है और उनकी तैयारी कर रहा है।...यह मुल्ला शासन देश और विदेश, दोनों जगहों पर कट्टरपंथी विचारधारा और आतंक के ज़रिए खुद को मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।...यह और भी हैरानी की बात है कि हमने ईरानी "राजनयिकों" को बहुत पहले ही देश से बाहर नहीं निकाल दिया, बल्कि इसके बजाय तुष्टीकरण का रास्ता चुना।"
 
ईरान में काफ़ी अधिक बिक्री वाले "हमशहरी" नाम के इस दैनिक ने एक ग्राफ़िक छापा है, जिसमें जर्मनी के चांसलर मेर्त्स समेत कई पश्चिमी नेताओं से बदला लेने की बात कही गई है। अख़बार ने अपने लेख को शीर्षक दिया है: "उन लोगों की सूची, जिन्हें ईरानी लोगों के बदले का सामना करना होगा।"
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13 शीर्ष पश्चिमी नेता ईरान के निशाने पर

इस सूची में 13 शीर्ष पश्चिमी नेताओं के नाम हैं, जिन्हें अब ईरान के सर्वोच्च मज़हबी और राजनीतिक नेता रहे अली खामेनेई की मौत का "हर्जाना" भुगतना पड़ सकता है। जर्मन चांसलर के अलावा, इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों, इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी और ब्रिटेन के निवर्तमान प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नाम शामिल हैं।
 
"इस तरह की कोई सूची लगभग निश्चित रूप से मुल्ला शासन की मंज़ूरी— या सीधे निर्देश के बिना नहीं बन सकती"— कहना है जर्मनी की ग्रीन पार्टी के संसदीय दल के उपप्रमुख कोंस्तातिन फॉन नोज़ का। वे मानते हैं कि जान से मारने की ये धमकियाँ दूसरे देशों से जुड़े मामलों की तुलना में तनाव का एक नया स्तर दिखाती हैं।

प्रतिशोध की मांग मोजतबा खामेनेई कर रहे हैं

यह सारी बयानबाज़ी तब शुरू हुई, जब अयातोल्ला खामेनेई के घायल बेटे, मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने की कसम खाई। कहा जा रहा है कि यह बात उन्होंने अपने पिता के अंतिम संस्कार के दौरान जारी एक बयान में कही है। इसके अलावा, ईरानी गुप्तचर सूत्रों ने भी अमेरिकी नेतृत्व के विरुद्ध ठोस और नए ख़तरों की ओर ख़ास तौर पर इशारा किया है।
 
पर, प्रतिशोध की आग से धधक रहे ईरान के धर्मांध सत्ताधारी यह सोचने में असमर्थ हैं कि यदि इन सभी 13 देशों के सर्वोच्च नेता एकजुट हो गए, तो उनकी सम्मिलित सैन्य शक्ति ईरान का वही हाल कर सकती है, जो अमेरिका ने अकेल ही 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर दो परमाणु बम गिराकर जापान का कर दिया था।
लेखक के बारे में
राम यादव
राम यादव डायचे वेले हिन्दी (जर्मनी) के पूर्व प्रमुख हैं। देश-विदेश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम पर इनकी अच्छी पकड़ है। आधी सदी से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। .... और पढ़ें