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Mohan Bhagwat : Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करूंगा, छात्रों के प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी न बताएं, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, चीन और पाकिस्तान को लेकर क्या कहा

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने देश की युवा पीढ़ी का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि वह Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करेंगे। उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों को राष्ट्रविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। युवाओं की बात को दबाने के बजाय उनके साथ संवाद के जरिए उनकी चिंताओं को समझने की जरूरत है।
मुंबई में इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर करीब 2,000 Gen Z और Gen Alpha सदस्यों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने और सत्ता से सवाल पूछने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि संवाद के लिए दोनों पक्षों के बीच अपनापन और आपसी सम्मान जरूरी है।

‘Gen Z आंदोलन करे तो उसे राष्ट्रविरोधी न कहें’

 
भागवत ने कहा कि अगर Gen Z किसी आंदोलन या विरोध में शामिल होता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह राष्ट्रविरोधी है। उन्होंने युवाओं को देश की अगली पीढ़ी बताते हुए कहा कि उनकी चिंताओं को समझने और उनके नजरिए को जानने के लिए सार्थक संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तुलना में ज्यादा ईमानदार है। Gen Z और Gen Alpha में देश के प्रति ईमानदारी, राष्ट्रभक्ति और सेवा की भावना होनी चाहिए।
 

‘मैं Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करूंगा’

 
हालिया प्रदर्शनों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि उन्हें घटनाक्रम के पीछे की पूरी जानकारी नहीं है। आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल की खबरों के बीच उन्होंने कहा कि सत्यापित जानकारी के बिना किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।
 
उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किसी एक पक्ष पर भरोसा करना होगा तो वह Gen Z पर भरोसा करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर ही बातचीत हो रही है और आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्वों की मौजूदगी की खबरें भी सामने आई हैं। ऐसे में प्रामाणिक जानकारी के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
 

‘Gen Z को प्रदर्शन न करने के लिए कभी नहीं कहूंगा’

 
RSS प्रमुख ने कहा कि प्रदर्शन लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है और अपनी वास्तविक शिकायतों को सामने रखने के लिए विरोध भी संवाद का एक माध्यम है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र चर्चा के बाद सहमति बनाने का तरीका है और शिक्षा व्यवस्था में कई सुधारों की जरूरत है। भागवत ने कहा कि उनकी पीढ़ी सत्ता से सवाल नहीं करती थी, लेकिन Gen Z और Gen Alpha प्राधिकरण से सवाल करते हैं और तर्कपूर्ण जवाब चाहते हैं।
 
उन्होंने कहा, “मैं कभी नहीं कहूंगा कि Gen Z को प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।” हालांकि, लोकतंत्र में विरोध का एक उचित तरीका होना चाहिए। अगर युवा आवाज उठा रहे हैं तो इसे सिर्फ विरोध के तौर पर नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की मांग के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

शिक्षा को व्यावसायिक कारोबार नहीं बनाया जाना चाहिए

भागवत ने अपने संबोधन में शिक्षा व्यवस्था पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यावसायिक कारोबार नहीं है और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में समाज की भी भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का आर्थिक बोझ काफी ज्यादा है। व्यवस्था की नियमित समीक्षा, सतर्कता और शिक्षकों के प्रशिक्षण की जरूरत है। शिक्षा देना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है।
 
भागवत ने शिक्षा के लिए राष्ट्रीय बजट का 6 फीसदी आवंटन करने की लंबे समय से चली आ रही मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल सरकार नहीं चलाती, बल्कि संगठन और समाज भी शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हैं। शिक्षा और सीखने के लिए समाज में जिम्मेदारी की भावना पैदा करने की जरूरत है।

सोशल मीडिया की समस्या सिर्फ कानून से हल नहीं होगी

 
RSS प्रमुख ने सोशल मीडिया और गलत सूचनाओं के प्रसार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सिर्फ कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव जरूरी है। उन्होंने लाखों फॉलोअर्स वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने और किसी भी जानकारी को विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित करने की अपील की।
 
भागवत ने कहा कि किसी चीज पर प्रतिबंध लगाने के बाद भी उसमें बचने के रास्ते निकल सकते हैं, इसलिए सिर्फ बैन को समाधान नहीं माना जा सकता। उन्होंने हिंसक कंटेंट को सोशल मीडिया पर ज्यादा लाइक मिलने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि अगर Gen Z हिंसा का समर्थन नहीं करता तो फिर हिंसक सामग्री को ज्यादा लाइक्स क्यों मिलते हैं, इस पर विचार और विश्लेषण किया जाना चाहिए।

पाकिस्तान और चीन को लेकर भी बोले भागवत

 
राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि संकट के समय नागरिकों को सरकार के फैसलों के साथ खड़ा रहना चाहिए, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण भी बनाए रखना जरूरी है। पाकिस्तान और चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान भारत का दृष्टिकोण मतभेदों को पीछे रखकर स्थिति से निपटना रहा है। उन्होंने कहा कि स्थायी नफरत किसी समस्या का समाधान नहीं है। भागवत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान के सभी लोग दिल से भारत के दुश्मन हैं और न ही सभी भारतीय एक जैसे हैं। उन्होंने जोर दिया कि अंततः मानवता को एक होना चाहिए।
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