'कयामत की घड़ी' का इशारा, दुनिया परमाणु युद्ध के खतरे से सिर्फ 100 सेकंड पीछे

Last Updated: शनिवार, 25 जनवरी 2020 (09:36 IST)
वॉशिंगटन। परमाणु वैज्ञानिकों की संस्थान BAS ने दुनिया पर के खतरे की संभावना का संकेत देने वाली डूम्सडे क्लॉक की सूई को आधी रात 12 बजे के 100 सेकेंड पीछे तक ला दिया है। डूम्स डे क्लॉक को कयामत की घड़ी भी कहा जाता है।
'द बुलेटिन ऑफ़ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स' (बीएएस) ने गुरुवार को दुनिया पर एटमी युद्ध के खतरे की आशंका को बेहद ही खतरनाक स्तर पर बताया है। ऐसा उन्होंने 'डूम्स डे क्लॉक' (कयामत की घड़ी) की गणना पर कहा, जिसमें मध्यरात्रि होने में 2 मिनट से भी कम का अंतर (100 सेकेंड) रह गया है।

1947 से काम कर रही इस घड़ी के इतिहास में अमेरिका और रूस के शीतयुद्ध के दौरान भी इसका कांटा आधी रात से 2 मिनट या उससे ज्यादा दूर रखा गया था। पहली बार डूम्सडे घड़ी का कांटा 2 मिनट के अंदर चला गया है। परमाणु वैज्ञानिकों की एक टीम इस कांटे को आगे पीछे करती है। इसमें 13 नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक भी शामिल हैं। 1947 में इस घड़ी में समय को रात के 12 बजने से 7 मिनट पहले सेट किया गया था।
उल्लेखनीय है कि डूम्स डे क्लॉक एक ऐसी घड़ी है, जो इंसानी गतिविधियों की वजह से दुनिया की तबाही की संभावना को बताती है। इस घड़ी में 12 बजने का मतलब है कि दुनिया का अंत किसी भी समय हो सकता है या फिर दुनिया पर परमाणु हमले की संभावना 100 फीसद है।


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