यूरोप में सड़कों पर संग्राम, फ्रांस में बवाल, आगजनी-लूटपाट के बाद 1,200 से ज्यादा गिरफ्तार, 60 पुलिसकर्मी घायल
फ्रांस में बढ़ती महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं की बिगड़ती स्थिति और सरकारी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी। शनिवार को पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच जमकर झड़पें हुईं। हालात बिगड़ने के बाद पुलिस ने 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया।
हिंसा के दौरान कई दुकानों और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आगजनी, लूटपाट और सार्वजनिक संपत्तियों पर हमले करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है।
महंगाई और सरकारी सेवाओं को लेकर सड़कों पर उतरे लोग
फ्रांस में प्रदर्शन बढ़ती जीवन-यापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं की खराब होती स्थिति के विरोध में आयोजित किए गए थे। इन प्रदर्शनों को उन छात्रों का भी समर्थन मिला, जो स्कूलों की परिस्थितियों और पुलिस की कथित अत्यधिक सख्ती के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
हालांकि, शांतिपूर्ण विरोध के बीच कई जगह हालात हिंसक हो गए। पेरिस और दूसरे शहरों में पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
दुकानों में लूटपाट, गाड़ियों में लगाई आग
हिंसा के दौरान नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर तोड़फोड़ की। कारों को आग के हवाले कर दिया गया और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। कई सार्वजनिक इमारतों में भी आग लगाई गई।
लिमोज शहर के टाउन हॉल में लगी आग से इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, आग के कारण इमारत की छत का एक हिस्सा ढह गया। कई अन्य सार्वजनिक इमारतें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी हिंसा की चपेट में आए।
राष्ट्रपति मैक्रों ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि आगजनी, लूटपाट और सार्वजनिक इमारतों पर हमले करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया है।
60 सुरक्षाकर्मी घायल
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, हिंसा के दौरान 60 सुरक्षाकर्मी घायल हुए। इनमें से दो को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाना पड़ा। लगातार बढ़ती हिंसा ने फ्रांस में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सरकार के सामने एक ओर महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों की नाराजगी दूर करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर हिंसक घटनाओं पर नियंत्रण और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी हो गया है।

