इंदौर में सफाई के साइड इफेक्ट, शहर के ढाई लाख कुत्तों पर भोजन का संकट, भूख के मारे 1 हजार लोगों को काट रहे रोज
इंदौर सफाई में नंबर वन है, इसी वजह से पूरे देश में इंदौर का नाम है। लेकिन इस सफाई के साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे हैं। दरअसल, इंदौर में कुत्तों के काटने से रोज 1000 से ज्यादा मामले आ रहे हैं। लाल अस्पताल समेत शहर के अन्य अस्पतालों में लगी लाइनें इंदौर में कुत्तों का आतंक की कहानी बता रहा रही है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं कुत्तों के सबसे अधिक शिकार बन रहे हैं। प्रशासन भी अब लगातार बढ़ रहे मामलों से परेशान है और इन्हें कम करने के लिए योजना बना रहा है।
दरअसल, सफाई की वजह से शहर के करीब ढाई लाख आवारा कुत्तों के लिए भोजन का संकट सामने आ रहा है। कुत्तों को भोजन नहीं मिल पा रहा है। भोजन का यह संकट जानवरों के हिंसक बनर रहा है। बता दें कि शहर में आवारा कुत्तों के लोगों को काटने की बढ़ती घटनाओं के बीच स्थानीय प्रशासन इन जानवरों की नसबंदी के अब तक के सबसे बड़े अभियान की तैयारी में जुटा है।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि प्रशासन ने तय किया है कि शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए छह महीने का विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि उनकी तादाद को नियंत्रित किया जा सके।
भूख के मारे हो चिड़चिड़े : नगर निगम में पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव ने बताया कि शहर में आमतौर पर हर रोज 30 से 35 आवारा कुत्तों की नसबंदी होती है। हमने इस संख्या को बढ़ाकर 90 पर पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए मानव संसाधन और अन्य सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। यादव ने माना कि भूख के कारण शहर के आवारा कुत्ते चिड़चिड़े हो रहे हैं।
अब खाना नहीं मिलता : उन्होंने कहा कि कुछ बरसों पहले शहर में कचरा यहां-वहां पड़ा रहता था और बड़ी कचरा पेटियां भी रखी होती थीं। आवारा कुत्ते इनमें अपना भोजन ढूंढ़ लेते थे, लेकिन अब शहर में कचरा पेटियां नहीं हैं और नगर निगम की गाड़ियों से हर घर और प्रतिष्ठान से कचरा जमा किया जाता है। इससे आवारा कुत्तों को आसानी से भोजन नहीं मिल पा रहा है।
एबीसी कार्यक्रम के प्रभारी ने कहा कि आवारा कुत्तों को भोजन की तलाश में अपना इलाका छोड़कर दूसरे इलाकों में जाना पड़ता है जिससे अन्य कुत्तों के साथ उनके हिंसक संघर्ष होते हैं और कई बार इससे तनावग्रस्त होकर भूखे कुत्ते आम लोगों को काट लेते हैं। यादव ने कहा कि कोविड-19 के प्रकोप के चलते हुई तालाबंदी के दौरान स्थानीय प्रशासन ने आवारा कुत्तों के लिए भोजन का इंतजाम किया था, लेकिन अब शहर में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
फीडर कार्ड बांटे हैं : उन्होंने कहा कि हमने आवारा कुत्तों को भोजन बांटने के लिए कुछ गैर सरकारी संगठनों और पशुप्रेमियों को अधिकृत करते हुए उन्हें फीडर कार्ड बांटे हैं ताकि इन जानवरों को खाना मिलता रहे और भूख के कारण उनमें चिड़चिड़ाहट कम हो। यादव ने मोटा अनुमान जताया कि नगर निगम सीमा में करीब ढाई लाख आवारा कुत्ते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ : पशुओं के हितों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले संगठन पीपुल फॉर एनिमल्स की इंदौर इकाई की अध्यक्ष प्रियांशु जैन ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में आवारा कुत्तों के लिए भोजन और पीने के पानी का संकट पैदा हो गया है जो गर्मियों के मौसम में बढ़ जाता है। शहर में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने का काम आसान नहीं है। कई लोग पशुप्रेमियों से इस बात को लेकर झगड़ा करते हैं कि उनके घर के सामने आवारा कुत्तों को खाना क्यों खिलाया जा रहा है?
जैन ने कहा कि उनके संगठन ने नगर निगम को सुझाव दिया है कि शहर के 50 चिह्नित स्थानों पर आवारा कुत्तों के लिए भोजन और पानी का नियमित इंतजाम किया जाए ताकि भूख-प्यास से जूझते इन जानवरों की चिड़चिड़ाहट को कम किया जा सके।
कुत्तों के साथ बुरा बर्ताव करते हैं लोग : उन्होंने बताया कि कई लोग आवारा कुत्तों को जान-बूझकर चोट पहुंचाते हैं और उन्हें जान से भी मार देते हैं। यह सब देखकर भी कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। हम शहर में आवारा कुत्तों के साथ लोगों के हिंसक बर्ताव को लेकर अब तक करीब 160 प्राथमिकी दर्ज करा चुके हैं।
Edited By: Navin Rangiyal