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लोको पायलट ने समोसे के लिए रोकी ट्रेन, विभाग ने दावे को बताया बेबुनियाद, पीआरओ ने बताया क्‍या है वीडियो की सचाई

Updated: सोमवार, 7 सितम्बर 2026 (15:02 IST)
इंदौर और महू के बीच चलने वाली ट्रेन के लोको पायलट द्वारा समोसे खरीदने के लिए ट्रेन को रोकने का हाल ही में वीडियो सामने आया था। इस वीडियो को वायरल कर के यह कहा जा रहा था कि इंदौर और महू के बीच चलने वाली एक ट्रेन को रोककर लोको पायलट समोसे खरीदता है। इससे करीब 10 मिनट तक ट्रेन में लोगों को इंतजार करना पडता है।

वीडियो सामने आने के बाद रेलवे विभाग ने इस बारे प्रेसनोट जारी कर अपनी तरफ से इस वीडियो को बेबुनियाद और भ्रामक तरीके से प्रसारित करना बताया है।

क्‍या कहा रेलवे पीआरओ ने : रेलवे के अनुसार वीडियो में दिखाई दे रही गाड़ी कोई यात्री ट्रेन नहीं, बल्कि एक मालगाड़ी थी जो राऊ यार्ड में पूर्व निर्धारित इंजीनियरिंग कार्य के कारण ‘होम सिग्नल’ पर खड़ी थी। रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया, ‘‘वीडियो की पड़ताल कराई गई है जिसमें पता चला कि संबंधित मालगाड़ी को आगे ट्रैक पर जारी इंजीनियरिंग कार्य के कारण सिग्नल नहीं मिला था और इस वजह से उसे राऊ के ‘होम सिग्नल’ पर रोका गया था।

दावा पूरी तरह बेबुनियाद और गलत : कुमार ने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति ट्रेन का कार्यरत सहायक लोको पायलट नहीं, बल्कि एक स्पेयर (आरक्षित) सहायक लोको पायलट था। कुमार ने कहा, ‘‘यह दावा पूरी तरह बेबुनियाद और गलत है कि लोको पायलट ने समोसे खरीदने के लिए ट्रेन रोकी थी।’’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वीडियो को ‘डीईएमयू’ (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) यात्री ट्रेन से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, जबकि संबंधित घटना मालगाड़ी से जुड़ी थी।

क्‍या दावा किया था वीडियो में : वीडियो में दावा किया जा रहा था कि पटरियों के किनारे स्थित एक जलपान की दुकान के पास ट्रेन खड़ी कर के इस ट्रेन का लोको पायलट समोसे खरीदने जाता दिखाई दे रहा है। दावा था कि लोको पायलट नाश्‍ते के लिए समोस खरीदने के लिए ट्रेन को करीब 10 मिनट तक रोकता है। इस बीच ट्रेन के यात्री परेशान होते रहते हैं। इतना ही नहीं, लोग वीडियो की मदद से दावा कर रहे थे कि ऐसा रोजाना होता है।

पड़ताल में वीडियो की सचाई सामने आई : जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया, ‘‘वीडियो की पड़ताल कराई गई है जिसमें पता चला कि संबंधित मालगाड़ी को आगे ट्रैक पर जारी इंजीनियरिंग कार्य के कारण सिग्नल नहीं मिला था और इस वजह से उसे राऊ के ‘होम सिग्नल’ पर रोका गया था। वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति ट्रेन का कार्यरत सहायक लोको पायलट नहीं, बल्कि एक स्पेयर (आरक्षित) सहायक लोको पायलट था। उन्‍होंने बताया कि वीडियो गलत तरीके से प्रसारित किया गया है और जानकारी भ्रामक है। इसके बाद भी अगर किसी तरह की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 

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