Indore Water Case: BJP पार्षद का खुलासा, 3 साल से कर रहे थे शिकायत, रिपोर्ट में मिले खतरनाक बैक्टीरिया
रिपोर्ट में मिले खतरनाक बैक्टीरिया, अब हैजा फैलने का डर, हाईकोर्ट में याचिका दायर
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से लोगों की मौत के मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। खुलासा हुआ है कि पिछले तीन साल से लोग खराब पानी की शिकायत कर रहे थे। लेकिन किसी ने नहीं सुनी। अब इंदौर प्रशासन पर ये गंभीर आरोप लग रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ घटना के बाद विभाग ने पानी के सैंपल लिए थे, उनकी जांच रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार पानी पीने योग्य नहीं था। पानी में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद अब हैजा फैलने का डर भी सताने लगा है।
नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव ने इस बारे में बताया कि पानी के लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट आ चुकी है। पानी दूषित पाया गया। वह पीने योग्य नहीं था। हालांकि पानी की कुछ और रिपोर्ट आनी बाकी है।
पार्षद कमल वाघेला ने लगाए आरोप : घटना के तुल पकडने के बाद अब भागीरथपुरा क्षेत्र के पार्षद कमल बाघेला ने प्रशासन और सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने साफ कहा कि यह पूरी तरह सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। कमल बाघेला ने बताया कि उन्होंने दूषित पानी की समस्या को लेकर 3 साल पहले ही शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय भी इलाके में लोगों को गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा था। उन्होंने बताया कि नर्मदा का पानी गटर में, और गटर का पानी नर्मदा में मिल रहा था। बाद में 60 प्रतिशत इलाके में नर्मदा की नई लाइन से ये ठीक हुआ, लेकिन अब भी करीब 40 प्रतिशत काम बाकी है।
प्रशासन की लापरवाही : पार्षद कमल वाघेला ने बताया कि यह पूरी तरह सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। मैंने कई बार कहा और शिकायत की। लेकिन कहीं टेंडर नहीं हुए तो कहीं वर्क ऑर्डर नहीं हुए। अब भी मैं साफ कह रहा हूं कि 40 प्रतिशत काम बाकी है, जिसे किया जाना चाहिए। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। बीजेपी पार्षद ने कहा कि सिर्फ मौखिक ही नहीं, बल्कि करीब 6 महीने पहले उन्होंने लिखित में भी संबंधित विभागों को शिकायत दी थी। शिकायत में साफ तौर पर चेतावनी दी गई थी कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है।
पानी में मिले जानलेवा बैक्टीरिया : घटना के बाद लिए गए पानी के सेंपल की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में सामने आया कि जो पानी भागीरथपुरा में सप्लाय हुआ, उसमें हानिकारक बैक्टीरिया था। इसका खुलासा मेडिकल कॉलेज की प्रारंभिक रिपोर्ट में हुआ है। यह पानी पीने योग्य नहीं था, लेकिन बीते एक माह से सप्लाई हो रहा था। उसे पीकर लोग बीमार हुए और 14 लोग अब तक इस मामले में जान गंवा चुके हैं। अभी भी पानी में बैक्टीरिया है या नहीं, इसके लिए लगातार 80 से 100 सैंपल नगर निगम बस्ती से जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। आशंका है कि मरीजों को हैजा भी हो सकता है।
हाईकोर्ट में दो याचिका दायर : भागीरथपुरा पानी कांड मामले में अब हाई कोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर न्यायालय ने सुनवाई करते हुए कुछ अहम निर्देश दिए हैं। पहली जनहित याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी द्वारा दायर की गई, वहीं दूसरी याचिका कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने दाखिल की थी। इन याचिकाओं में दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही पीड़ितों के निःशुल्क इलाज और उन्हें उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग उठाई गई है।
15 लोगों की मौत, 30 गंभीर : बता दें कि भागीरथपुरा में जहरीले पानी से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अस्पतालों में 200 से ज्यादा मरीज अब भी भर्ती हैं, जिनमें 30 की हालत गंभीर बताई जा रही है। वहीं, पांच हजार से ज्यादा मरीजों की जांच स्वास्थ्य विभाग कर चुका है। बता दें कि यह नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का क्षेत्र है।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल