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कागजों पर ‘घोस्ट हॉस्पिटल’, डॉक्‍टरों को मिलीं नौकरियां, ट्रांसफर भी हो रहे, ये कांड हुआ सबसे स्‍वच्‍छ इंदौर में

Updated: सोमवार, 7 सितम्बर 2026 (15:15 IST)
इंदौर अपनी स्‍वच्‍छता के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां करप्‍शन के दाग भी बहुत गहरे हैं। दरअसल, इंदौर के खजराना इलाके में प्रस्तावित 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल की इमारत सरकारी मंजूरी के 6 साल बाद भी अस्तित्व में नहीं आ सकी है, लेकिन इस अस्पताल के लिए स्वीकृत 87 पदों पर नियुक्तियां और कर्मचारियों के तबादले होते रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कई लोग महज कागजों पर जारी इस परियोजना को ‘घोस्ट हॉस्पिटल’ जैसे नामों से संबोधित करते हुए प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब अस्पताल का भवन ही अस्तित्व में नहीं है, तो उसके नाम पर तबादले आखिर किस आधार पर किए जा रहे हैं?

इंदौर के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग ने सोमवार को बताया कि खजराना और आस-पास के क्षेत्रों में करीब पांच लाख की आबादी को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 100 बिस्तरों वाले नये सिविल अस्पताल की कवायद 2019 में शुरू की गई थी और 2020 में इसके निर्माण को मंजूरी दी गई थी।

यह मंजूरी मिलते ही चिकित्सकों, नर्स, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट आदि के कुल 87 पद तय सरकारी प्रक्रिया के तहत अस्पताल के लिए स्वीकृत किए गए थे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव हसानी ने कहा, 'खजराना सिविल अस्पताल के लिए हमें जमीन का आवंटन कर दिया गया है, लेकिन अब तक हमें जमीन का कब्जा नहीं मिला है जिससे यह जमीन निर्माण एजेंसी के सुपुर्द नहीं की जा सकी है'

डॉ हसानी ने कहा कि अस्पताल का निर्माण समय पर नहीं हो सका, इसलिए अस्पताल के लिए स्वीकृत स्टाफ का उपयोग शहर के 85 मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिकों और अन्य चिकित्सा संस्थानों में किया जा रहा है।

खजराना, इंदौर के मुस्लिम बहुल इलाकों में शामिल है। खजराना और इसके आस-पास के क्षेत्रों की आबादी लगातार बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि खजराना में बड़े सरकारी अस्पताल का अभाव है और मरीजों को उपचार के लिए महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) और अन्य शासकीय अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि खजराना में सिविल अस्पताल के लिए आवंटित करीब पांच एकड़ जमीन पर फिलहाल सिर्फ मलबा और कचरा दिखाई देता है। यह ऐसा अस्पताल है जिसके बारे में कागजों में तो सब कुछ दिखाई देता है, लेकिन जमीन पर कुछ भी नजर नहीं आता। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खजराना सिविल अस्पताल की परियोजना रद्द नहीं हुई है और जमीन का कब्जा मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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