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इंदौर में पब पर सख्ती हुई तो फ्लैट्स और फार्म हाउस बने 'सीक्रेट पार्टी ज़ोन', सोशल मीडिया से तय हो रही एंट्री
'मिनी मुंबई' कहे जाने वाले इंदौर का नाइटलाइफ़ कल्चर अब पब और क्लबों की चौखट से बाहर निकलकर शहर के शांत रहवासी इलाकों और बायपास के फार्म हाउसों में शिफ्ट हो रहा है। शहर में पबों पर पुलिस की लगातार बढ़ती कड़ाई, समय सीमा (नाइट कर्फ्यू और डेडलाइन) और आबकारी विभाग की मुस्तैदी के बाद अब युवाओं ने एन्जॉयमेंट का एक नया और खतरनाक रास्ता ढूंढ निकाला है— 'सीक्रेट हाउस पार्टी'।
पॉश कॉलोनियों के फ्लैट्स, विला और बायपास की टाउनशिप्स में वीकेंड पर सजने वाली ये महफिलें न सिर्फ कानून को ठेंगा दिखा रही हैं, बल्कि शहर की सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं।
सोशल मीडिया फिल्टर और कोडवर्ड का खेल: कैसे होती है एंट्री?
यह पूरा नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से और 'अंडरग्राउंड' रहकर काम करता है। इन पार्टियों का कोई पोस्टर या ओपन इनविटेशन नहीं होता।
क्लोज फ्रेंड्स ग्रुप: इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और वॉट्सऐप पर बने कुछ बेहद चुनिंदा और 'वेरिफाइड' ग्रुप्स के जरिए इन पार्टियों का मैसेज सर्कुलेट किया जाता है। इसके बाद लड़के और लड़कियां इनमें शामिल होते हैं।
लास्ट मोमेंट लोकेशन: पार्टी की सही लोकेशन (गूगल मैप लिंक) शाम को इवेंट शुरू होने के महज 2 घंटे पहले सिर्फ उन्हीं लोगों से शेयर की जाती है, जो एडवांस पेमेंट कर चुके होते हैं या जिनके पास 'रेफरेंस कोड' होता है।
कमर्शियल मॉडयूल: इन सीक्रेट पार्टियों का पूरा कमर्शियल सिंडिकेट चल रहा है। 'कपल्स और गर्ल्स के लिए फ्री या डिस्काउंटेड एंट्री' और 'सिंगल बॉयज के लिए 1500 से 2500 रुपये तक की एंट्री फीस' वसूली जाती है। इस रकम में अनलिमिटेड शराब और डीजे का लालच दिया जाता है।
ऑनलाइन रेंटल ऐप्स बने 'सेफ हेवन' : जांच में यह बात सामने आई है कि इन पार्टियों के लिए आयोजक सीधे तौर पर कोई जगह नहीं खरीदते। इसके लिए ऑनलाइन प्रॉपर्टी और होम-स्टे रेंटल ऐप्स (जैसे Airbnb या अन्य विला बुकिंग प्लेटफॉर्म) का सहारा लिया जाता है। वीकेंड के नाम पर बायपास, रालामंडल, महू या कनाड़िया रोड की तरफ बने बड़े विला और फार्म हाउस 10 से 15 हजार रुपये प्रतिदिन के किराए पर बुक किए जाते हैं।
आबकारी और सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां : बिना किसी वैध 'वन-डे लिकर लाइसेंस' के इन पार्टियों में बड़े पैमाने पर विदेशी और महंगी शराब परोसी जा रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि व्यावसायिक पबों की तरह यहां न तो कोई सिक्योरिटी गार्ड होता है, न सीसीटीवी कैमरे और न ही फायर फाइटिंग के इंतजाम। बंद कमरों या कवर्ड फार्म हाउस में देर रात तक लाउड म्यूजिक के बीच नशे की हालत में होने वाले आपसी विवाद किसी भी दिन बड़ी वारदात का कारण बन सकते हैं।
रहवासियों की बढ़ी धड़कनें, RWAs ने जताई चिंता : शहर के पॉश इलाकों (जैसे विजय नगर, साकेत, महालक्ष्मी नगर और बायपास की टाउनशिप्स) के रहवासी संघ (RWA) इस ट्रेंड से खासे परेशान हैं। रहवासियों का कहना है, "शनिवार-रविवार की रात अचानक हमारी कॉलोनियों में अज्ञात गाड़ियों की कतारें लग जाती हैं। देर रात तक बेस-हेवी लाउड म्यूजिक बजता है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों का सोना मुहाल हो जाता है। विरोध करने पर ये असामाजिक तत्व विवाद पर उतारू हो जाते हैं।"
पुलिस और प्रशासन का रुख: "मकान मालिक भी होंगे जिम्मेदार"
हाल ही में शहर के कुछ इलाकों में हुई औचक कड़ाइयों और छापों के बाद इंदौर पुलिस और आबकारी विभाग अब इन 'अंडरग्राउंड' इवेंट्स को लेकर अलर्ट मोड पर है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी अवैध पार्टियों की टोह लेने के लिए सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को सक्रिय किया गया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि बिना परमिशन और बिना कमर्शियल लाइसेंस के रहवासी इलाकों में ऐसी पार्टियां आयोजित करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आबकारी अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, बिना वेरिफिकेशन के ऐसे तत्वों को मकान या फार्म हाउस किराए पर देने वाले मालिकों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
पॉश कॉलोनियों के फ्लैट्स, विला और बायपास की टाउनशिप्स में वीकेंड पर सजने वाली ये महफिलें न सिर्फ कानून को ठेंगा दिखा रही हैं, बल्कि शहर की सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं।
सोशल मीडिया फिल्टर और कोडवर्ड का खेल: कैसे होती है एंट्री?
यह पूरा नेटवर्क बेहद शातिर तरीके से और 'अंडरग्राउंड' रहकर काम करता है। इन पार्टियों का कोई पोस्टर या ओपन इनविटेशन नहीं होता।
लास्ट मोमेंट लोकेशन: पार्टी की सही लोकेशन (गूगल मैप लिंक) शाम को इवेंट शुरू होने के महज 2 घंटे पहले सिर्फ उन्हीं लोगों से शेयर की जाती है, जो एडवांस पेमेंट कर चुके होते हैं या जिनके पास 'रेफरेंस कोड' होता है।
कमर्शियल मॉडयूल: इन सीक्रेट पार्टियों का पूरा कमर्शियल सिंडिकेट चल रहा है। 'कपल्स और गर्ल्स के लिए फ्री या डिस्काउंटेड एंट्री' और 'सिंगल बॉयज के लिए 1500 से 2500 रुपये तक की एंट्री फीस' वसूली जाती है। इस रकम में अनलिमिटेड शराब और डीजे का लालच दिया जाता है।
ऑनलाइन रेंटल ऐप्स बने 'सेफ हेवन' : जांच में यह बात सामने आई है कि इन पार्टियों के लिए आयोजक सीधे तौर पर कोई जगह नहीं खरीदते। इसके लिए ऑनलाइन प्रॉपर्टी और होम-स्टे रेंटल ऐप्स (जैसे Airbnb या अन्य विला बुकिंग प्लेटफॉर्म) का सहारा लिया जाता है। वीकेंड के नाम पर बायपास, रालामंडल, महू या कनाड़िया रोड की तरफ बने बड़े विला और फार्म हाउस 10 से 15 हजार रुपये प्रतिदिन के किराए पर बुक किए जाते हैं।
आबकारी और सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां : बिना किसी वैध 'वन-डे लिकर लाइसेंस' के इन पार्टियों में बड़े पैमाने पर विदेशी और महंगी शराब परोसी जा रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि व्यावसायिक पबों की तरह यहां न तो कोई सिक्योरिटी गार्ड होता है, न सीसीटीवी कैमरे और न ही फायर फाइटिंग के इंतजाम। बंद कमरों या कवर्ड फार्म हाउस में देर रात तक लाउड म्यूजिक के बीच नशे की हालत में होने वाले आपसी विवाद किसी भी दिन बड़ी वारदात का कारण बन सकते हैं।
पुलिस और प्रशासन का रुख: "मकान मालिक भी होंगे जिम्मेदार"
हाल ही में शहर के कुछ इलाकों में हुई औचक कड़ाइयों और छापों के बाद इंदौर पुलिस और आबकारी विभाग अब इन 'अंडरग्राउंड' इवेंट्स को लेकर अलर्ट मोड पर है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी अवैध पार्टियों की टोह लेने के लिए सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को सक्रिय किया गया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि बिना परमिशन और बिना कमर्शियल लाइसेंस के रहवासी इलाकों में ऐसी पार्टियां आयोजित करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आबकारी अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, बिना वेरिफिकेशन के ऐसे तत्वों को मकान या फार्म हाउस किराए पर देने वाले मालिकों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
