अपने गुरु का हत्यारा अकबर 'महान'

Author रामसिंह शेखावत|
हिन्दुस्तानी परंपरा में गुरु को ईश्वर के समकक्ष माना गया है। बैरम खां न सिर्फ का संरक्षक था, बल्कि उसका गुरु भी था और उसने मुगल साम्राज्य को भारत में फैलाने में अहम भूमिका निभाई थी। मगर उसका हश्र क्या हुआ? 'हत्यारा महान बन गया' की दूसरी कड़ी में जानते हैं किस तरह अकबर ने बैरम खां को मरवा दिया....
 
कर्मनासा और गंगा के संगम पर दोनों नदियों के बीच चौसा में हुमायूं मुगल छावनी डाले पड़ा था। सामने थी शेरशाह सूरी की फौजें। आमने-सामने पड़े कई महीने बीत गए, लेकिन युद्ध की पहली किसी ओर से नहीं हुई थी। संख्‍या में मुगल फौजें अधिक थीं। इधर शेरशाह सूरी बरसात का इंतजार कर रहा था।
 
24 जून से बारिश प्रारंभ हो गई। 25 जून तक दोनों नदियां उफान पर थीं और मुगल सुरक्षित स्थानों की ओर सरकने लगे थे। इसी दिन शेरशाह ने अपनी फौजों को युद्ध के लिए सज्जित किया, लेकिन मुगलों ने देखा शेरशाह दक्षिण की ओर सेना सहित रवाना हो गया है। सुनने में आया कि महारथ चेरों नामक किसी वनवासी हिन्दू राजा पर हमला करने जा रहा है।
 
तीन माह से युद्ध के तनाव से ग्रस्त मुगल सेना ने संतोष की सांस ली व चैन की नींद सो गए। लेकिन आधी रात के बाद शेरशाह ने पलटकर मुगल छावनी पर तीन ओर से धावा बोल दिया। दो ओर से घुड़सवारों ने साथ उसका पुत्र जलाल खां व सेनापति खवास खां मुगल लश्कर पर हमला बोल रहे थे और मध्य भाग में स्वयं शेरशाह सूरी अपनी गजसेना और पैदलों के साथ मुगलों को रौंदता बढ़ रहा था। 
 
हल्ला सुन हुमायूं जाग पड़ा और बिना जिरह बख्तर पहने घोड़े की नंगी पीठ पर सवार हो युद्धस्थल की ओर बढ़ गया। देखा तो मुगलों में भगदड़ मची हुई थी। घोड़ों पर काठी कसने का और कवच बांधने का भी समय नहीं था। जान बचाने का एक ही मार्ग था, हाथ में तलवार ले बिना कपड़े पहने भाग चलो। हुमायूं के रोके सैनिक नहीं रुके। तब वह अपने खेमे की ओर बढ़ा, जहां उसकी बेगमें थीं, लेकिन खेमे के चारों ओर अफगान सैनिक छा गए थे।
 
 
अब हुमायूं भी जान बचाने नदी की ओर भागा। उस ओर से भी पैदल आ गए थे। हुमायूं के अंगरक्षकों ने तलवारें चलाते मार्ग बनाना शुरू किया और एक-एक कर स्वयं भी गिरते चले गए। इन्हीं में था सोलह साल का युवक बैरम खां, जो अपने बरछे और तलवार के जौहर दिखाता हुमायूं के घोड़े के आगे-आगे चल रहा था। जैसे-तैसे हुमायूं नदी किनारे पहुंचा।
इस तरह बैरम खां ने बचाई हुमायूं और अकबर की जान... पढ़ें अगले पेज पर....


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