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महाभारत के मात्र 3 किस्से से जानिए हनुमानजी की अपार शक्ति

गुरुवार,अप्रैल 2, 2020
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एकादशी की तरह की वर्ष में 24 प्रदोष होते हैं। एकादशी या प्रदोष दोनों में से कोई सा भी एक व्रत रखना चाहिए। जो भी प्रदोष जिस वार को आता है उसका विशेष फल होता है। इस बार रविवार को प्रदोष आ रहा है। जानिए रविवार को प्रदोष का व्रत रखने के 5 फायदे।
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रामभक्त हनुमानजी सर्वशक्तिमान और सर्वमान्य और सर्वज्ञ है। शोधानुसार प्रभु श्रीराम का जन्म 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था, जबकि हनुमनाजी का जन्म कहां हुआ था यह स्पष्ट नहीं है। कपिस्‍थल या किष्किंधा में उनके जन्म होने की बात कही जाती है।
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गुहराज निषाद ने अपनी नाव में प्रभु श्रीराम को गंगा के उस पार उतारा था। आज गुहराज निषाद के वंशज और उनके समाज के लोग उनकी पूजा अर्चन करते हैं। चैत्र शुक्ल पंचमी को उनकी जयंती है। गुहराज निषाद ने पहले प्रभु श्रीराम के चरण धोए और फिर उन्होंने अपनी नाम ...
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भगवान श्रीराम से रामनवमी पर आशीर्वाद मांगें कि हे परमात्मा, मेरे शरीर, मन और बुद्धि की रक्षा करना। साथ ही इस मंत्र का पाठ करें-
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पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस-19 से लड़ रहा है। इतने भयानक समय में भी हम अपने-अपने ईष्ट का स्मरण कर रहे हैं। डॉक्टर के पास इस वायरस का स्थायी इलाज नहीं है।
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माह में 2 एकादशियां होती हैं अर्थात आपको माह में बस 2 बार और वर्ष के 365 दिनों में मात्र 24 बार ही नियमपूर्वक एकादशी व्रत रखना है। हालांकि प्रत्येक तीसरे वर्ष अधिकमास होने से 2 एकादशियां जुड़कर ये कुल 26 होती हैं।
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दुर्गा नवमी पर माता को खास तरह के भोग अर्पित करके उनकी पूजा आरती करें और हो सके तो हवन करें। माता प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगी। यहां माता दुर्गा को अर्पित किए जाने वाले भोग के नाम। नवरात्रि के मौके पर उन्हें प्रतिदिन इसका भोग लगाने से हर ...
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भारत में कोरोना वायरस की महामारी के चलते कई जगहों पर कर्फ्यू है तो संपूर्ण भारत में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है। सभी मंदिरों को बंद कर दिया गया है। ऐसे में इस बार का राम नवमी उत्सव मंदिर में मनाना मुश्किल है। भगवान राम का जन्मोत्सव चैत्र शुक्ल पक्ष की ...
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भगवान राम का काल ऐसा काल था जबकि धरती पर विचित्र किस्म के लोग और प्रजातियां रहती थीं, लेकिन प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से ये प्रजातियां अब लुप्त हो गई हैं। आज यह समझ पाना मुश्‍किल है कि कोई पक्षी कैसे बोल सकता है। रामायण काल में बंदर, भालू आदि की ...
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या देवी सर्वभू‍तेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां सिद्धिदात्री के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं। हे मां, मुझे अपनी ...
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चैत्र नवरात्रि में कई घरों में नवमी को दुर्गा माता की पूजा होती है। इस दिन राम नवमी भी होती हैं। आओ जानते हैं कि नवमी तिथि का ज्योतिष में क्या महत्व है।
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नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। यह मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं। कमल पर विराजमान चार भुजाओं वाली मां सिद्धिदात्री लाल साड़ी में विराजित हैं।
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भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मंत्र-शक्ति प्रदान की है- इसलिए भगवान शंकर को साक्षी बनाकर इनका श्रद्धा से जप करना चाहिए।
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नवमी तिथि पर साधारणतया माता दुर्गा का पूजन, अर्चन, हवन किया जाता है। लेकिन इस‍ तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता सिद्धिदात्री हैं।
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तुलसीदास जी रचित रामचरित मानस में नारियों को सम्मान जनक रूप में प्रस्तुत किया है। जिससे ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:’ ही सिद्ध होता है। नारियों के बारे में उनके जो विचार देखने में आते हैं उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:-
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तारक मंत्र 'श्री' से प्रारंभ होता है। 'श्री' को सीता अथवा शक्ति का प्रतीक माना गया है। राम शब्द 'रा' अर्थात् र-कार और 'म' मकार से मिल कर बना है। 'रा' अग्नि स्वरुप है। यह हमारे दुष्कर्मों का दाह करता है। 'म' जल तत्व का द्योतक है।
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देवी सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थीं इसलिए उन्हें 'जानकी' भी कहा जाता है। कहते हैं कि राजा जनक को माता सीता एक खेत से मिली थी। इसीलिए उन्हें धरती पुत्री भी कहा जाता है। आओ जानने हैं उनके भाई बहनों के बारे में।
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मां दुर्गा का नौंवा रूप हैं सिद्धिदात्री। नवरात्रि के आखिरी दिन यानी नवमी तिथि को देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं। पढ़ें आरती-
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राम नवमी के दिन प्रभु श्री राम के पूजन एवं आरती के उपरां‍‍त नैवेद्य अथवा भोग को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। इस दिन व्रत-उपवास रखने के साथ ही अगर
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