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कहानी : जिंदगी का सार है सीखते रहना

Updated: बुधवार, 19 जून 2019 (16:00 IST)
ये कहानी है एक महात्मा की है। वे बहुत विद्वान थे। उनके पास बहुत से लोग आते थे उनसे कुछ न कुछ शिक्षा प्राप्त करने। लेकिन महात्मा खुद को कभी भी अधिक ज्ञानी नहीं समझते थे। वे खुद भी हमेशा दूसरों से कुछ न कुछ सीखते रहते थे।
 
एक दिन उनके एक मित्र ने उनसे पूछा कि दुनियाभर के लोग आपसे ज्ञान लेने आते हैं, आप तो खुद भी महाज्ञानी हैं तो आपको किसी से सीखने की क्या जरूरत है?
 
इस पर महात्माजी को हंसी आ गई और उन्होंने कहा कि इंसान अपनी पूरी जिंदगी में भी कुछ पूरा नहीं सीख सकता और हमेशा बहुत कुछ न कुछ बचा ही रह जाता है। बहुत-सी चीजें ऐसी हैं, जो सीखने योग्य होती हैं लेकिन वे कहीं किसी किताब में पढ़ने को नहीं मिलतीं। बहुत-सी ऐसी बातें और अनुभव ऐसे हैं जिन्हें किताबों में कभी लिखा ही नहीं गया है। हर इंसान और उसके अनुभव में कुछ न कुछ खास होता है, जो उससे सीखा जा सकता है इसलिए हर किसी को सभी से कुछ न कुछ सीखते ही रहना चाहिए।
 
वास्तविकता में रहकर और लोगों से सीखते रहने की आदत ही आपको पूरा तो नहीं, लेकिन पूर्णता के करीब जरूर ले जाती है। यही जिंदगी का सार है।
लेखक के बारे में
नम्रता जायसवाल

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