‘फर्टिलिटी सप्लिमेंट्स’ लेने वाले महिला-पुरुष को निराश कर देगी ये रिसर्च

अक्‍सर यह माना जाता रहा है कि और के सप्लिमेंट्स लेने से इन्फर्टिलिटी की समस्या खत्‍म होती है। इसी बात को ध्‍यान में रखकर महिला और पुरुष इस सप्‍लिमेंट का सेवन करते आए हैं। लेकिन अब जो खबर आ रही है, उससे निराशा ही होगी।
हाल ही में हुई एक में यह बात पूरी तरह सही साबित नहीं हुई
है। रिसर्च में सामने आया है कि जिंक और फॉलिक एसिड के सेवन से ना तो में बढ़ोतरी होती है और ना ही काउंट या उसकी क्वालिटी में कोई सुधार होता है।

दरअसल, यूनिवर्सिटी ऑफ यूथा हेल्थ ने कुछ दूसरे मेडिकल हेल्थ सेंटर्स के साथ मिलकर इस रिसर्च को अंजाम दिया है। इस रिसर्च में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ, यू हेल्थ एंड एनआईसीएचडी, शिकागो की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी, फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन और यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा कार्वर कॉलेज ऑफ मेडिसिन ने भाग लिया।

स्‍टडी में हुआ साबित
रिसर्च में यह प्रमाण सामने आए हैं कि जिंक और फॉलिक ऐसिड के सप्लिमेंट्स फर्टिलिटी बढ़ाने में कोई भूमिका अदा नहीं करते हैं। यह रिसर्च मेल इन्फर्टिलिटी को ध्यान में रखकर किया गया था। इस बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अपनी तरह की पहली स्टडी है, जिसमें पुरुषों से संबंधित हाई क्वालिटी डेटा सामने आया कि जिंक और फॉलिक एसिड जन्‍म देने की क्षमता को बढ़ाने और ‘सीमन फंक्शन’ को बेहतर करने का काम नहीं करते।

अब तक इसलिए ही जाना जाता रहा
स्टडी में बताया गया कि आमतौर पर फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सप्लिमेंट्स में जिंक होता है। जिंक एक तरह का मिनरल असेंशल है जो स्पर्म डिवेलपमेंट के लिए इस्‍तेमाल किया जाता रहा है। साथ ही इन सप्लिमेंट्स में नचुरल फॉर्म में फॉलिक एसिड होता है। इसके बारे में कहा जाता है कि ये और स्पर्म फॉर्मेशन में मदद करता है। अब तक कई डॉक्‍टरों की सलाह पर ये सप्लिमेंट्स स्पर्म फॉर्मेशन और स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए प्रमोट किए जाते रहे हैं।

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